न्याय प्रणाली में AI को अपनाया जाना, मानव पर्यवेक्षित, गोपनीयता के प्रति सजग बना हुआ है : मेघवाल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 14 Nov 2025 10:09 PM
न्याय प्रणाली में AI को अपनाया जाना, मानव पर्यवेक्षित, गोपनीयता के प्रति सजग बना हुआ है : मेघवाल
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नयी दिल्ली. केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत की न्याय प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाये जाने में मानव-पर्यवेक्षण, नैतिक रूप से निर्देशन और गोपनीयता के प्रति सजगता का ध्यान रखा गया है.
मंत्री ने न्याय तक समान पहुंच विषय पर मैड्रिड में आयोजित 10वें ओईसीडी वैश्विक गोलमेज सम्मेलन में यह टिप्पणी की. इस सम्मेलन का विषय ‘साझा समृद्धि के लिए डेटा-संचालित और लचीली न्याय प्रणालियां’ था.

मेघवाल ने कहा, ”भारत की न्याय प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाये जाने में मानव-पर्यवेक्षण, नैतिक रूप से निर्देशन और गोपनीयता के प्रति सजगता बनी हुई है. (अदालती) फैसलों के क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के लिए एसयूवीएएस (उच्चतम न्यायालय विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर), अनुसंधान के लिए एसयूपीएसीई (कोर्ट दक्षता में उच्चतम न्यायालय पोर्टल सहायता) और एआई-सहायता प्राप्त फाइलिंग और केस-प्रबंधन प्रणालियां न्यायिक विवेक और निष्पक्षता को बनाए रखते हुए अधिक सटीकता, गति और पहुंच को संभव बना रही हैं.” मंत्री ने कहा कि अकेले कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत की अदालतों में लगभग 4.3 करोड़ वर्चुअल सुनवाई हुईं, जो जन स्वास्थ्य संकट के बीच समावेशन और न्याय तक पहुंच के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, ”एआई और एनएलपी उपकरणों की मदद से उच्चतम न्यायालय और कई उच्च न्यायालयों में कार्यवाही के सीधा प्रसारण ने न्यायिक पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक लोकतांत्रिक बनाया है एवं पारर्दिशता को ब­ढ़ाया है.” मेघवाल ने कहा कि ”इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम” (आईसीजेएस) के माध्यम से, अदालतों को पुलिस, अभियोजन पक्ष, जेलों और फोरेंसिक के साथ डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है जिससे त्वरित और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद मिल रही है.

इस गोलमेज सम्मेलन में न्याय मंत्री, वरिष्ठ न्यायिक प्रशासक, वैश्विक नेता, नीति निर्माता और विशेषज्ञ एकत्रित हुए तथा इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि किस प्रकार न्याय संस्थाएं तीव्र प्रौद्योगिकी बदलाव, आर्थिक अनिश्चितता और उभरती नागरिक अपेक्षाओं के इस युग में उत्तरदायी और विश्वसनीय बनी रह सकती हैं. मेघवाल ने कहा कि भारत का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय संबंधी संवैधानिक दृष्टिकोण, संविधान के अनुच्छेद 39ए पर आधारित हर सुधार का मार्गदर्शन करता है, जो सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित करता है.

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