भारत में जहाज निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता: राजनाथ सिंह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 25 Nov 2025 07:58 PM
भारत में जहाज निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता: राजनाथ सिंह
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक रक्षा कंपनियों से भारत के जीवंत जहाज निर्माण उद्योग में अवसरों का लाभ उठाने और अगली पी­ढ़ी की समुद्री क्षमताओं का सह-विकास करने का मंगलवार को आह्वान किया. एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि भारत में जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और समुद्री नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता है क्योंकि भारतीय जहाज निर्माण उद्योग पहले ही विमानवाहक पोत, अनुसंधान पोत और वाणिज्यिक जहाज बना चुका है.

उन्होंने कहा, “भारत को जो चीज. वास्तव में अलग बनाती है, वह है इसका एकीकृत जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र.” उन्होंने कहा कि भारत को वास्तव में अलग बनाने वाला इसका एकीकृत जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र है. सिंह ने कहा कि अवधारणा डिज.ाइन और मॉड्यूलर निर्माण से लेकर रख रखाव, मरम्मत तक, जहाज निर्माण प्रक्रिया का हर चरण स्वदेशी रूप से विकसित और क्रियान्वित किया जाता है. सिंह रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी ‘समुद्र उत्कर्ष’ में मुख्य भाषण दे रहे थे, जिसमें भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की क्षमताओं को प्रर्दिशत किया गया.

उन्होंने उद्योग के हितधारकों, विदेशी साझेदारों, प्रतिनिधियों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “हजारों एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों) द्वारा सर्मिथत हमारे सार्वजनिक और निजी शिपयार्ड ने एक मजबूत मूल्य श्रृंखला बनाई है, जो इस्पात, प्रणोदन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और उन्नत लड़ाकू प्रणालियों तक फैली हुई है.” रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय जहाज निर्माण उद्योग, जिसमें “उत्साही” सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और “गतिशील” निजी क्षेत्र के साझेदार शामिल हैं, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है.

उन्होंने कहा कि भारत “न केवल जहाज, बल्कि विश्वास, न केवल साजो सामान, बल्कि साझेदारियां बनाकर” “समुद्री सदी” को आकार देने में मदद के लिए तैयार है. सिंह ने इस बात पर ज.ोर दिया कि भारत का जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र अनेक विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म की ताकत पर टिका है जो तकनीकी परिपक्वता और औद्योगिक गहराई को प्रतिबिंबित करते हैं.

उन्होंने बताया कि भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां और स्टील्थ फ्रिगेट (रडार को चकमा देने में सक्षम पोत) और विध्वंसक जहाज जैसी प्रमुख परियोजनाएं न केवल देश की नौसैनिक ताकत को रेखांकित करती हैं, बल्कि डिजाइन क्षमता और स्वचालन को भी ब­ढ़ाती हैं.

सिंह ने कहा, “हम विमानवाहक पोतों से लेकर उन्नत अनुसंधान पोतों और ऊर्जा-कुशल वाणिज्यिक जहाजों तक की आपूर्ति करने में सक्षम हैं. यह एकीकृत क्षमता भारत को आने वाले दशक में जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और समुद्री नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने के लिए मजबूती से तैयार करती है.” रक्षा मंत्री ने इस तथ्य पर ज.ोर दिया कि भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के निर्माणाधीन प्रत्येक जहाज. का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में किया जा रहा है. उन्होंने ज.ोर देकर कहा कि भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र का परिवर्तन “दूरदर्शी नीतिगत सुधारों” की एक श्रृंखला पर आधारित है. सिंह ने कहा कि सरकार के प्रयासों का परिणाम यह है कि भारतीय नौसेना के पास 262 स्वदेशी डिजाइन और विकास परियोजनाएं उन्नत चरणों में हैं.

भारत रक्षा नवाचार के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहा है: राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि तेजी से बदलती दुनिया और भू-राजनीति के बीच, भारत को प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण से आगे बढ.कर खुद को भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते ”सक्रिय” दृष्टिकोण अपनाना होगा. सिंह ने नवाचार और स्वदेशीकरण पर नौसेना के प्रमुख कार्यक्रम ‘स्वावलंबन 2025’ में अपने संबोधन में कहा कि भारत ”रक्षा नवाचार के ्स्विवणम युग” में प्रवेश कर रहा है.

सिंह ने यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ”रक्षा क्षेत्र में हमें बड़े पैमाने पर, अधिक साहस के साथ और तेज गति से आगे बढ.ना होगा.” सिंह ने निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वे केवल मुनाफा कमाने तक सीमित न रहें, बल्कि ‘मुनाफे के साथ-साथ राष्ट्रहित’ को भी ध्यान में रखें.

मंत्री ने जोर देकर कहा कि जितने अधिक नवप्रवर्तक आगे बढ.ेंगे, भारत उतना ही अधिक सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनेगा.
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत और रक्षा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ एवं नवप्रवर्तक मंच पर उपस्थित थे. अपने संबोधन से पहले, सिंह ने प्रदर्शनी हॉल का भी दौरा किया और मंगलवार से शुरू हुए दो-दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने वाले कुछ लोगों से बातचीत की.

वर्ष 2022 में पहली बार शुरू हुआ यह आयोजन एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हो गया है, जहां ‘एमएसएमई’ और ‘स्टार्टअप’, सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने में उत्पन्न चुनौतियों के आधार पर अपने समाधान प्रर्दिशत करते हैं.
‘स्वावलंबन 2025’ का आयोजन नौसेना के नेतृत्व में लगभग दो सप्ताह तक चले अभ्यास ‘त्रिशूल’ के समापन के कुछ दिनों बाद किया जा रहा है. ‘त्रिशूल’ का समापन 13 नवंबर को गुजरात के पोरबंदर में सौराष्ट्र तट पर हुआ था.

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