महिलाएं स्वाभाविक रूप से नेता बनने के लिए प्रेरित होती हैं : किरण बेदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 19 Dec 2025 08:23 PM
महिलाएं स्वाभाविक रूप से नेता बनने के लिए प्रेरित होती हैं : किरण बेदी
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अहमदाबाद. देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने शुक्रवार को कहा कि महिलाएं स्वाभाविक रूप से नेता बनने के लिए प्रेरित होती हैं क्योंकि उनमें ईमानदारी, सहानुभूति, निष्ठा और करुणा जैसे गुण होते हैं. बेदी ने ‘शी लीड्स 2.0 : कार्यबल में महिलाओं को सशक्त बनाना – समावेशिता और आर्थिक परिवर्तन का नेतृत्व करना’ नामक एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की. इस कार्यक्रम का आयोजन महिलाओं के नेतृत्व, समावेशिता और आर्थिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन में आयोजित किया गया.

पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल बेदी ने कहा, ”अपने ज्ञान को निरंतर बढ़ाते रहें और सीखते रहें. महिलाओं में ऐसे गुण होते हैं जो उन्हें नेतृत्व के लिए उपयुक्त बनाते हैं. वास्तव में, उनमें अक्सर ऐसे गुण होते हैं जो पुरुषों में नहीं होते. महिलाओं में सहानुभूति, करुणा और संवेदनशीलता होती है. एक नेता, चाहे वह पुरुष हो या महिला, उसमें टीम निर्माण, सहयोगात्मकता, प्रतिस्पर्धा न करने, दूसरों का ख्याल रखने और अपने काम को भली-भांति जानने जैसे गुण होने चाहिए.” उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वाभाविक रूप से नेता बनने के लिए प्रेरित होती हैं क्योंकि वे स्वभाव से अधिक ईमानदार, मानवीय और निष्ठावान होती हैं.

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की पहली महिला अधिकारी बेदी ने कहा, ”माता-पिता को शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करके लड़कियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने चाहिए. महिलाएं केवल शादी करने और मां बनने के लिए ही बड़ी नहीं होतीं. उन्हें पहले आत्मनिर्भर बनना होगा और फिर यह तय करना होगा कि वे अपना जीवन कैसे जीना चाहती हैं.”

उन्होंने बताया कि महिलाओं के नेतृत्व का विकास काफी हद तक माता-पिता के पालन-पोषण, शिक्षा और व्यक्तिगत आकांक्षाओं पर निर्भर करता है. बेदी ने इस बात पर बल दिया, ”एक महिला की ऊर्जा स्वाभाविक रूप से उसके सपनों और स्वयं के प्रति उसकी दृष्टि की ओर केंद्रित होती है. महिलाओं में नेतृत्व इसी दृष्टि पर निर्भर करता है.” मासिक धर्म अवकाश पर अपने विचार साझा करते हुए बेदी ने कहा कि यह एकसमान होने के बजाय आवश्यकता पर आधारित होना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”हर महिला का शरीर अलग होता है. मासिक धर्म को संभालने की हर महिला के शरीर की क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए मुझे लगता है कि यह आवश्यकता-आधारित और न्यूनतम होना चाहिए.” बेदी ने कहा कि अगर किसी महिला को मासिक धर्म की छुट्टी की जरूरत महसूस होती है तो उसे निश्चित रूप से छुट्टी मांगनी चाहिए, लेकिन उसे इस स्थिति को संभालना भी आना चाहिए.
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा, ”सभी महिला खिलाडि़यों को मासिक धर्म होता है, फिर भी वे खेलती हैं. पुलिस में कार्यरत सभी महिलाएं मासिक धर्म के दौरान भी काम पर जाती हैं. इसलिए, मासिक धर्म अवकाश हर महिला के लिए अनिवार्य नहीं होना चाहिए; यदि किसी महिला को इसकी आवश्यकता महसूस होती है, तो उसे इसके लिए आवेदन करना चाहिए.”

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