‘अब युद्ध का चेहरा बदल चुका’; वायुसेना के नए योद्धाओं को रक्षा मंत्री ने दिया AAA का मंत्र

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 13 Jun 2026 01:24 PM
‘अब युद्ध का चेहरा बदल चुका’; वायुसेना के नए योद्धाओं को रक्षा मंत्री ने दिया AAA का मंत्र
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हैदराबाद: आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और नई तकनीकों से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना के नए अधिकारियों को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में 217वें कोर्स की संयुक्त स्नातक परेड (सीजीपी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कैडेट्स को “एडाप्ट, अडॉप्ट और अमेंड” का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आज की लड़ाइयां केवल सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर तकनीकें युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं।

क्या कहा राजनाथ सिंह ने नए कैडेट्स से?
रक्षा मंत्री ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले कैडेट्स को बधाई देते हुए कहा कि उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण समाप्त हुआ है, लेकिन असली जिम्मेदारी अब शुरू होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना हमेशा देश की सुरक्षा की ढाल और तलवार दोनों रही है। उन्होंने कैडेट्स से कहा कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालें, नई तकनीकों को अपनाएं और जरूरत पड़ने पर अपनी रणनीतियों में बदलाव भी करें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि स्मार्ट वर्क और नवाचार भी भविष्य की सफलता की कुंजी होंगे।

भारतीय वायुसेना के इतिहास का क्यों किया उल्लेख?

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना की ऐतिहासिक भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1947-48 के कश्मीर युद्ध के दौरान श्रीनगर एयरलिफ्ट ने युद्ध की दिशा बदल दी थी। वहीं 1971 के युद्ध में ढाका पर निर्णायक हवाई हमलों ने इतिहास रच दिया था। उन्होंने कहा कि आज के कैडेट्स उसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने जा रहे हैं। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक बड़ा दायित्व है, जिसे वायुसेना ने हर चुनौती के समय निभाया है।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण रहा?
रक्षा मंत्री ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने इस अभियान में स्पष्ट रणनीति और सटीक कार्रवाई का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने में वायुसेना की भूमिका बेहद प्रभावी रही। राजनाथ सिंह ने बताया कि इस सफलता के पीछे केवल स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, साहसी और अनुशासित वायुसेना अधिकारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों की सफलता तकनीक और मानव क्षमता दोनों के संतुलन पर निर्भर करती है।

कैसे बदल रहा है आधुनिक युद्ध का स्वरूप?
रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले युद्ध में सैनिक और हथियार दो मुख्य तत्व होते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। आज ड्रोन, सैटेलाइट, रडार, सेंसर और रोबोटिक सिस्टम युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। कई बार हमले करने वाला सैनिक और इस्तेमाल किया गया हथियार दिखाई तक नहीं देता। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां भी सामने आ सकती हैं, जहां दुश्मन ट्रैफिक सिस्टम, संचार नेटवर्क या सीसीटीवी कैमरों को भी नियंत्रित करने की कोशिश करे। इसलिए नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों को पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ तकनीकी युद्ध की भी पूरी समझ विकसित करनी होगी।

भविष्य के योद्धाओं के लिए क्या संदेश दिया गया?
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया में होने वाला हर संघर्ष एक नई सीख लेकर आता है। उन्होंने कैडेट्स से आग्रह किया कि वे भविष्य की युद्ध प्रणालियों और रणनीतियों को गहराई से समझें। उन्होंने भरोसा जताया कि एयर फोर्स अकादमी में मिला प्रशिक्षण उन्हें अनिश्चित और अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही सेनाएं सफल होंगी जो तेजी से बदलती तकनीकों को समझकर उनका प्रभावी उपयोग कर सकेंगी। इसी सोच के साथ भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है।

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