प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले में हस्तक्षेप का आधार नहीं पाया। अदालत ने 25 हजार रुपये के खर्च के आदेश को भी बरकरार रखा।
मामला केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2016 के उस निर्देश से जुड़ा है, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। गुजरात विश्वविद्यालय ने इस निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
2023 में एकल पीठ ने CIC का आदेश किया था रद्द
मार्च 2023 में गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ ने CIC के निर्देश को रद्द कर दिया था। अदालत ने प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी को RTI कानून के तहत अपवादों से संबंधित माना और केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का खर्च लगाया था।
इसके बाद केजरीवाल ने एकल पीठ के फैसले को खंडपीठ के सामने चुनौती दी। सितंबर 2026 में इस अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और 24 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
केजरीवाल के वकील ने खर्च लगाने पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से दलील दी गई कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री की डिग्री से संबंधित मामले को लगातार आगे नहीं बढ़ाया था। उनके वकील ने यह भी कहा कि केजरीवाल ने खुद कोई RTI आवेदन दाखिल नहीं किया था और CIC ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की थी।
बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि यदि प्रधानमंत्री की डिग्री से संबंधित रिकॉर्ड पहले से विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध था, तो उस जानकारी को लेकर विवाद जारी रखने का आधार नहीं होना चाहिए।
गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से क्या दलील दी गई?
गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की दलीलों का विरोध किया। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि मामले की कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया और इसे लेकर सार्वजनिक रूप से भी बयान दिए गए।
विश्वविद्यालय ने अदालत से खर्च लगाए जाने के आदेश को बनाए रखने का आग्रह किया। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि RTI कानून की प्रक्रिया का पालन जरूरी है और अधिकारियों का समय ऐसे मामलों में नहीं लगना चाहिए जो कानून के उद्देश्य के अनुरूप न हों।
2016 से जुड़ा है मामला
इस विवाद की शुरुआत 2016 में हुई थी। उस समय CIC के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी का मुद्दा उठा था। CIC ने बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
गुजरात विश्वविद्यालय ने CIC के निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 2023 में एकल पीठ ने CIC का आदेश रद्द कर दिया और केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का खर्च लगाया। इसके बाद उन्होंने इस फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील की।
RTI प्रक्रिया पर भी हुई थी चर्चा
सितंबर 2026 की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष यह सवाल भी उठा कि क्या इस मामले की शुरुआत में RTI कानून के तहत कोई औपचारिक आवेदन किया गया था। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि CIC की कार्यवाही एक अलग मामले में केजरीवाल की ओर से भेजे गए जवाब के आधार पर आगे बढ़ी थी।
24 सितंबर को खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश और 25 हजार रुपये के खर्च को बरकरार रखा।