‘वन नेशन वन इलेक्शन’ अब केवल राजनीतिक नारा नहीं, भविष्य को लेकर सरकार गंभीर, लेकिन हंगामा क्यूं?

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 06 Oct 2026 12:25 PM
‘वन नेशन वन इलेक्शन’ अब केवल राजनीतिक नारा नहीं, भविष्य को लेकर सरकार गंभीर, लेकिन हंगामा क्यूं?
ऑडियो सुनें

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती इस बात से भी परखी जाती है कि देश में होने वाले चुनावों को चुनाव पर्व कहा जाता है। लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है कि चुनावी खर्च, प्रशासनिक व्यस्तता और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से होने वाली बाधाएँ जन जीवन बाधित होता है। ऐसे में देश में बार-बार होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की जगह एक साथ चुनाव कराने का विचार ‘ वन नेशन वन इलेक्शन ‘अब केवल राजनीतिक नारा नहीं रह गया है, बल्कि यह संविधान संशोधन के स्तर तक पहुंच चुका है। One Nation , One Election को लागू करने के लिए दिसंबर 2024 में लोकसभा में दो विधेयक पेश किए गए थे।

सरकार का तर्क है कि इससे बेकार में होने वाला चुनावी खर्च, प्रशासनिक अमले की व्यस्तता और बार-बार लगने वाली Model Code of Conduct की वजह से होने वाली जनजीवन की रूकावटें कम की जा सकती हैं। दूसरी ओर, विपक्ष और कई संवैधानिक विशेषज्ञों की आपत्ति है कि इससे राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता, संघवाद और लोकतांत्रिक जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

 

अभी One Nation, One Election की कानूनी स्थिति क्या है?

One Nation, One Election को लागू करने वाले दोनों विधेयक 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पेश किए गए थे और 19 दिसंबर 2024 को JPC को भेजे गए। मुख्य संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान में नया Article 82 A जोड़ने तथा अन्य प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है। जुलाई 2026 में लोकसभा ने JPC का कार्यकाल शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ा दिया गया है।

JPC की चर्चाओं में भी विवाद आया है सामने

दरअसल, वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक चुनाव आयोग को किसी विधानसभा का चुनाव एक साथ चुनाव से अलग कराने की सिफारिश करने की शक्ति देता है और इस स्थगन की अवधि पर स्पष्ट सीमा नहीं बताता। यही कारण है कि जेपीसी की चर्चाओं में संघवाद, समय से पहले विघटन, अविश्वास प्रस्ताव और राष्ट्रपति शासन जैसे संवैधानिक प्रश्न प्रमुख बने हुए हैं, जिनका हल ढूंढने की जरूरत है। विपक्ष का हंगामा इन्हीं बातों को लेकर है।

One Nation, One Election और 2034 की समय सीमा

मौजूदा विधेयक की संरचना को देखें तो सामान्य परिस्थितियों में पहली पूर्ण एक साथ चुनाव का चक्र साल 2034 के आसपास बन सकती है। इसका कारण यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था को लोकसभा के एक आम चुनाव के बाद लागू करने और फिर राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को लोकसभा के साथ सिंक्रनाइज़ करने की योजना है।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Nandkishoryadav