रीयल इस्टेट कारोबार में रेरा यानि कि छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रमोटर एण्ड बिल्डर को पीड़ित को 33.70 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।
इसमें 15 लाख 9 हजार 300 रुपये मूल राशि और 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज यानी कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये शामिल है जो मकान बुक कराने वाले ग्राहक को दिया जायेगा।
मामला यू है कि एक ग्राहक ने सन 2012 में प्रमोटर वत्सल्य डेवलपर्स (Vatsalya Developers), सेजबहार, रायपुर में एक अनुबंध कर आवासीय प्लॉट बुक किया था. तीन साल के अंदर फरियादी ने प्लॉट के लिए कुल 15 लाख 9 हजार 300 रुपये का भुगतान किया मगर राशि का भुगतान किए जाने के बावजूद प्रमोटर ने आबंटी को प्लॉट का कब्जा नहीं दिया और कुछ महीने बाद उनके प्लॉट को रदद कर दिया गया। इसके बाद आबंटी ने कई बार चक्कर लगाए और ताकीद दी मगर कान नही धरे गए। इसके बाद उसने जमा राशि की वापसी और अपने हितों की सुरक्षा के लिए सीजी रेरा में आवेदन किया.
पीड़ित ने लिखित शिकायत करते हुए अपने साथ होने वाले अन्याय की जानकारी दी। कई महीने प्रकरण चलने के बाद आज फैसला आया जिसमें रेरा ने माना कि प्रमोटर द्वारा आबंटी की बुकिंग बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त कर दी गई थी जोकि गलत और अन्यायपूर्ण था।
सीजी रेरा ने अपने आदेश में यह भी कहा कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में प्रमोटरों को आबंटियों के साथ किए गए अनुबंधों और अपने वैधानिक दायित्वों का पालन करना होगा. आबंटियों के हितों के विपरीत कार्रवाई होने पर वे कानून के तहत राहत प्राप्त कर सकते हैं. प्राधिकरण ने प्रमोटर को 15 लाख 9 हजार 300 रुपये मूल राशि और 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज, यानी कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये आबंटी को भुगतान करने का आदेश दिया है.