नई दिल्ली: दिल्ली के प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब में कथित हंगामे को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की शिकायत पर आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं और विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में गुरुद्वारा परिसर में कथित नारेबाजी और घटना के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो व पोस्ट प्रसारित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है और शिकायत के साथ सौंपे गए वीडियो फुटेज की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने क्यों दर्ज कराई शिकायत?
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने आरोप लगाया कि शनिवार को गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में राजनीतिक नारेबाजी की गई। कमेटी का दावा है कि कुछ लोग अपने साथ बैनर और नारे लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे थे और बाद में उन्हें निकालकर नारेबाजी शुरू कर दी गई।
कमेटी पदाधिकारियों ने इस घटनाक्रम को सुनियोजित बताते हुए आरोप लगाया कि गुरुद्वारा परिसर को राजनीतिक विवाद में घसीटने की कोशिश की गई। उन्होंने नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त के समक्ष शिकायत देकर मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता कमेटी की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।
अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं पर क्या आरोप हैं?
शिकायत में अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों पर कथित तौर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गुरुद्वारा परिसर में भेजकर नारेबाजी कराने का आरोप लगाया गया है। कमेटी ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट प्रसारित कर मामले को लेकर भ्रामक धारणा बनाने की कोशिश की गई।
कमेटी के पदाधिकारियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल चीमा और आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमन अरोड़ा सहित पार्टी नेतृत्व पर भी गुरुद्वारा साहिब को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया।
इन आरोपों पर संबंधित नेताओं का पक्ष और पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस की कार्रवाई और वीडियो फुटेज की जांच
दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। पुलिस शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए वीडियो फुटेज की जांच कर रही है, ताकि घटनाक्रम और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के संबंध में तथ्यों का पता लगाया जा सके।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि गुरुद्वारा परिसर में वास्तव में क्या हुआ, नारेबाजी किन परिस्थितियों में हुई और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का घटनाक्रम से क्या संबंध है। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
गुरुद्वारा परिसर की मर्यादा को लेकर कमेटी का बयान
DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा सर्वोपरि है और धार्मिक परिसर में किसी भी तरह का व्यवधान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कमेटी पदाधिकारियों ने दावा किया कि शनिवार को पुलिसकर्मी अशोका रोड की ओर से परिसर में दाखिल हुए और कार्रवाई के बाद दूसरे गेट से बाहर निकल गए। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी दरबार हॉल या लंगर हॉल में प्रवेश नहीं कर पाए। उन्होंने इन स्थानों पर प्रवेश के लिए सिर ढकने और जूते उतारने जैसी धार्मिक परंपराओं का भी उल्लेख किया।
कमेटी ने कहा कि गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रार्थना करने, माथा टेकने और लंगर ग्रहण करने का स्थान है। पदाधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी को विरोध प्रदर्शन करना है, तो उसे धार्मिक परिसर के बाहर किया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। वीडियो फुटेज, शिकायत में दिए गए विवरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। एफआईआर दर्ज होना आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।