नीले ड्रम कांड में फांसी की सजा: ‘जिंदगी बर्बाद, अब जान बचेगी या नहीं कुछ भरोसा नहीं’ मुस्कान ने पूछा ये सवाल

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Thu, 15 Oct 2026 03:06 PM
नीले ड्रम कांड में फांसी की सजा: ‘जिंदगी बर्बाद, अब जान बचेगी या नहीं कुछ भरोसा नहीं’ मुस्कान ने पूछा ये सवाल
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मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, कातिल पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला का गुरूर पूरी तरह टूट चुका है। जेल की सलाखों के पीछे अब सिर्फ पछतावा बचा है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से साहिल ने टूटी आवाज में कहा, जिंदगी बर्बाद हो गई… अब जान बचेगी या नहीं, कुछ भरोसा नहीं।

मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी के दौरान जैसे ही मुस्कान और साहिल ने अपने लिए मृत्यु दंड (फांसी) की सजा सुनी, दोनों जेल में ही फूट-फूटकर रोने लगे। वहां मौजूद जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने दोनों को संभाला।

बैरक में वापस जाते समय मुस्कान ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से गुहार लगाते हुए कहा, हमारी अधिवक्ता को बोलिए कि वह हमसे मिलें हमें हाईकोर्ट में अपनी पैरवी करानी है।

वहीं, साहिल ने जेल अधीक्षक से टूटी आवाज में कहा, जिंदगी बर्बाद हो गई… अब जान बचेगी या नहीं, कुछ भरोसा नहीं। सजा के इस एलान के बाद जेल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मुस्कान और साहिल की बैरकों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है और सीसीटीवी कैमरों से भी उन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। जेल सूत्रों के मुताबिक सजा सुनने के बाद से दोनों सदमे में हैं और बैरक में किसी से बातचीत नहीं कर रहे हैं।

डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान ने उनसे रोते हुए कहा, सर, अब हमारी हाईकोर्ट में पैरवी कौन करेगा? हमारी अधिवक्ता रेखा जैन से बोलिए कि वह हमसे बात करें और हाईकोर्ट में हमारी कानूनी पैरवी करें। मेरी दो छोटी-छोटी बेटियां हैं, उनका भविष्य अंधकार में आ गया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि मुस्कान से कहा है कि जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

90 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में अपील का प्रावधान

जिला कोर्ट द्वारा मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनके के अगले कदम पर सबकी नजरें हैं। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, सजा के बाद भी दोनों के पास बचाव के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता पवन प्रधान ने बताया कि कानून के तहत इस सजा के खिलाफ 90 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील करने का नियम है, जहां से उन्हें राहत मिल सकती है।

यदि दोषी खुद पैरवी करने में असमर्थ हैं, तो स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी भी ऐसे गंभीर मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता देकर केस लड़ती है। अधिवक्ता पवन प्रधान के अनुसार, मुस्कान और साहिल के पास अभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने के विकल्प मौजूद हैं। जेल के बंदियों का केस विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नियुक्त अधिवक्ता लड़ते हैं। मुस्कान और साहिल के केस में मैं पैरवी कर रही थी। अभी कोर्ट ने सजा सुनाई है। अभी हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। हाईकोर्ट में एक कमेटी बैठती है, वह भी इसका संज्ञान लेगी। – रेखा जैन, मुस्कान और साहिल की सरकारी अधिवक्ता

सौरभ की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा दिए जाने का फैसला स्वागत योग्य है। ऐसे जघन्य अपराध में इस तरह की सजा जरूर होनी चाहिए। यह सजा पूरे देश में नजीर बनेगी। एसके दीक्षित, एडवोकेट

खैरनगर में उषा मेडिकल स्टोर से मुस्कान ने नशीली दवाएं खरीदी थी। जो सौरभ को देने के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में उषा मेडिकल स्टोर के मालिक ब्रह्मपुरी निवासी अमित जोशी को पुलिस ने गवाह बनाया था। इनकी कोर्ट में गवाही भी हुई थी। मृत्युदंड का फैसला आने के बाद अमित जोशी ने कहा कि दोनों दोषियों के साथ सही हुआ। इससे समाज में बदलाव होगा।

मुस्कान मेरठ की पहली महिला, जिसे फांसी की सजा सुनाई

सौरभ हत्याकांड में मुस्कान मेरठ की ऐसी पहली महिला है, जिसे अदालत ने दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कचहरी में मौजूद कई लोगों का कहना था कि जिले में यह घटना भी बिल्कुल अलग तरह की थी। अदालत में सुनवाई के समय से ही यह चर्चा थी कि क्या मुस्कान को सजा में कुछ राहत मिलेगी या फिर अदालत फांसी जैसा फैसला लेगी।

लोग बोले– समाज के कलंक को जिंदा रहने का हक नहीं

सौरभ हत्याकांड में कोर्ट द्वारा पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी फिर से ट्रेंड में आ गया। लोग इस फैसले को बिल्कुल सही ठहराते हुए कह रहे हैं कि समाज के लिए कलंक बने ऐसे अपराधियों को जिंदा रहने का कोई हक नहीं है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल शर्मा, मनोज कुमार और नरेश वर्मा जैसे यूजर्स ने लिखा कि हत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने के बजाय तलाक लेकर अलग हुआ जा सकता था। वह भी किसी मां का लाडला बेटा था, जिसे इन लोगों ने मार डाला। यूजर्स का कहना है कि इस तरह की घटनाएं शादी जैसे पवित्र रिश्ते से लोगों का भरोसा तोड़ रही हैं। संतोष कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह सब देखकर अब शादी करने की हिम्मत ही नहीं हो रही है।

लंदन की कमाई पर ऐश और नशेड़ी प्रेमी से अफेयर पर फूटा गुस्सा

दीपक कुमार और जावेद नाम के यूजर्स ने कमेंट किया कि सौरभ लंदन में मेहनत करके पैसे कमाता था और पत्नी यहां उन पैसों पर ऐश कर रही थी। पल्लवी देवी ने लिखा कि इतने हैंडसम और प्यार करने वाले पति को छोड़कर एक नशेड़ी दिखने वाले व्यक्ति के चक्कर में हत्या जैसी वारदात को अंजाम दे दिया, इन्हें फांसी ही मिलनी चाहिए थी। कय्यूम और विनोद कुमार जैसे लोगों ने विवाहेतर संबंधों (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) और बॉलीवुड संस्कृति के अंधानुकरण को समाज के इस पतन के लिए जिम्मेदार ठहराया। वहीं अदालत का फैसला आते ही सोशल मीडिया पर मेरठ, नीला ड्रम और सौरभ हत्याकांड जैसे कीवर्ड्स ट्रेंडिंग में आ गए।

डॉ. कमलेंद्र किशोर (मनोचिकित्सक): आजकल पति-पत्नी के रिश्तों में विवाद बढ़ रहे हैं। पहली कोशिश सुलह की होनी चाहिए, लेकिन अगर साथ रहना मुमकिन ही न हो, तो अपराध का रास्ता चुनने के बजाय कानूनी तौर पर अलग हो जाना ही सबसे सही निर्णय है।

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