छत्तीसगढ़ राज के २६ बछर होगे, हमर राज कइसे बनिस, ओखर इतिहास, संघर्ष अउ त्याग के कहानी, हमर भाखा म जानव..

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Sun, 01 Nov 2026 10:06 AM
छत्तीसगढ़ राज के २६ बछर होगे, हमर राज कइसे बनिस, ओखर इतिहास, संघर्ष अउ त्याग के कहानी, हमर भाखा म जानव..
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जय जोहार संगवारी.. छत्तीसगढ़ राज के २६ बछर होगे, हमर राज कइसे बनिस, ओखर इतिहास, संघर्ष अउ त्याग के कहानी ल जानव.

पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग कोई अचानक उठी हुई लहर नहीं थी। यह तो वर्षों तक भीतर-ही-भीतर सुलगती रही एक शांत अग्नि थी, जो छोटे-छोटे प्रयासों से अपना अस्तित्व बनाए हुए थी। जगह-जगह छुटपुट सभायें होती थीं, कुछ लोग जुटते थे, अपने मन की बात कहते थे और फिर अपने-अपने काम में लग जाते थे। सुलभ दूध भंडार के सामने दिया गया वह धरना आज भी स्मृतियों में ताज़ा है। न कोई आक्रोश की आग, न तोड़फोड़, न हिंसा… बस अपने अधिकार और पहचान की एक सधी हुई, संयमित आवाज़।

अन्य प्रदेशों की तरह यहां आंदोलन ने उग्र रूप नहीं लिया। छत्तीसगढ़ की माटी की तरह ही इसका स्वभाव भी शांत रहा। शायद उसी समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह मांग कभी सच बन जाएगी। यह एक सपना-सा लगता था—दूर, धुंधला और अनिश्चित। परंतु इतिहास गवाह है कि शांत संकल्प अक्सर सबसे मजबूत होते हैं। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं और अंततः वह दिन आया जब छत्तीसगढ़ एक पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।ठाकुर प्यारेलाल सिंह डॉ. खूबचंद बघेल महंत लक्ष्मी नारायण दास
पं. वामनराव बलीराम लाखे संत पवन दीवान चंदूलाल चंद्राकर इत्यादि नेता छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के जनक माने जाते हैं।

लेकिन हर आंदोलन की तरह यहां भी एक कड़वा सत्य छिपा रहा। जिन्होंने वर्षों तक तन-मन-धन से इस विचार को सींचा, जिन्होंने धूप-छांव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वे अक्सर परिधि में ही रह गए। और जिन्होंने उस समय कोई विशेष भूमिका नहीं निभाई, वे सत्ता और अवसरों के केंद्र में दिखाई दिए। यह विडंबना केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, हर जनांदोलन की कहानी है।

इस तस्वीर में हैँ- सर्वश्री स्व. हरिठाकुर, स्व.अजीत जोगी, स्व.स्वरूपचंद जैन, स्व.रेशम लाल जांगड़े । तस्वीर 80 के दशक की है और दैनिक नवभारत में प्रकाशित हुई थी। जब छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन अपने चरम पर था। 
तस्वीर : गोकुल सोनी

फिर भी, उपलब्धि का गौरव कम नहीं होता। राज्य का निर्माण केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, यह एक पहचान की पुनर्स्थापना थी। उन अनगिनत गुमनाम चेहरों की मेहनत, धैर्य और विश्वास ने मिलकर एक नए अध्याय की नींव रखी। इतिहास भले सबके नाम दर्ज न करे, लेकिन समय की स्मृति उन सच्चे योगदानकर्ताओं को कभी भुला नहीं सकती।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा करोड़ों प्रदेशवासियों के सपनों, संघर्षों और संकल्पों की गौरवशाली गाथा है। आज हमारा प्रदेश शांति, सुशासन और विकास के नए अध्याय लिख रहा है। छत्तीसगढ़ महतारी के आशीर्वाद से हमारा प्रदेश समृद्धि, आत्मनिर्भरता और विकसित भविष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहे।’

छत्तीसगढ़ी भाषा में यह वीडियो देखिए : 

 

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