11 फर्जी फर्मो के नाम लोन जारी करने के आरोप में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है. मामले की विवेचना पूरी करने के बाद एजेंसी ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान पेश किया है.
इस मामले में बैंक को कुल 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपए की आर्थिक क्षति हुई है. ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से मिली शिकायत की जांच के बाद 28 जनवरी 2020 को अपराध क्रमांक 04/2020 दर्ज किया गया था. विवेचना में सामने आया कि विश्वजीत भौमिक बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से लोगों को छोटे ऋण दिलाने और बैंकों से लोन उपलब्ध कराने का काम करता था. इस दौरान वह ऋण लेने आने वाले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और संपत्ति के मूल दस्तावेज लेता था. साथ ही बैंक के प्रपत्रों और खाली चेकों पर हस्ताक्षर भी करा लेता था.
जांच में पता चला कि भौमिक ने इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में बनाई थीं. कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोपराइटर दर्शाया गया था. तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए, जिन्हें भौमिक के निर्देश पर उसके कार्यालय में तैयार किया गया था. इसके अलावा सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से दाखिल किए गए थे.
विवेचना के अनुसार, 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों और परिपत्रों की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन की सुविधाएं स्वीकृत कीं. ऋण लेने वालों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियों को बंधक के रूप में स्वीकार किया गया. ऋण स्वीकृति से पहले तैयार निरीक्षण रिपोर्ट में फर्मों के व्यवसाय और पते की गलत जानकारी दर्ज की गई. एक फर्म का व्यावसायिक पता वास्तव में विश्वजीत भौमिक का तत्कालीन निवास था.
जांच में यह भी सामने आया कि ऋण के रूप में प्राप्त रकम का उपयोग फर्मों के कारोबार में नहीं किया गया. राशि अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर निकाली गई और इसका अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक पाया गया. बैंक से प्राप्त ऋण की रकम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म एबी फास्टनर्स तक पहुंचाई गई. कूटरचित बिलों के आधार पर एनएसआईसी रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया.