शिंजियांग के लोगों के माधवाधिकारों का सम्मान और गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए : भारत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 07 Oct 2022 09:57 PM
शिंजियांग के लोगों के माधवाधिकारों का सम्मान और गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए : भारत
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नयी दिल्ली. भारत ने शुक्रवार को कहा कि चीन के शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकारों का ‘सम्मान और गारंटी’ सुनिश्चित की जानी चाहिए. उसने साथ ही बताया कि इस क्षेत्र को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में एक प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लेना ‘देश विशिष्ट प्रस्ताव पर मतदान में’ हिस्सा नहीं लेने के उसके दीर्घकालिक चलन पर आधारित है. यह पहला मौका है जब भारत ने अशांत शिंजियांग उइगर क्षेत्र के लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करने के बारे में स्पष्ट तौर पर कहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंिरदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ शिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष स्थिति का ठीक ढंग से और निष्पक्षता से ध्यान रखेगा.’’ उन्होंने कहा कि चीन के शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में एक मसौदा प्रस्ताव पर वोंिटग में भाग नहीं लेना ‘देश विशिष्ट प्रस्ताव पर मतदान में’ हिस्सा नहीं लेने के उसके दीर्घकालिक रूख पर आधारित है.

प्रवक्ता से भारत द्वारा शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा के लिए यूएनएचआरसी में एक मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने के बारे में पूछा गया था. बागची ने कहा, ‘‘ भारत सभी के मानवाधिकारों को सुनिश्चित करने का पक्षधर है. भारत का मतदान में हिस्सा नहीं लेना उसके दीर्घकालिक रूख पर आधारित है कि देश विशिष्ट प्रस्ताव कभी मददगार नहीं होते हैं. भारत ऐसे मुद्दों से निपटने में बातचीत का पक्षधर है.’’ उन्होंने कहा कि हमने मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा चीन के स्वायत्त शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकारों को लेकर किये गए मूल्यांकन का संज्ञान लिया है.

गौरतलब है कि सैंतालीस सदस्यीय परिषद में यह मसौदा प्रस्ताव खारिज हो गया, क्योंकि 17 सदस्यों ने पक्ष में तथा चीन सहित 19 देशों ने मसौदा प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया. भारत, ब्राजील, मैक्सिको और यूक्रेन सहित 11 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
मसौदा प्रस्ताव का विषय था- ‘‘चीन के शिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा.’’ मसौदा प्रस्ताव कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, ब्रिटेन और अमेरिका के एक कोर समूह द्वारा पेश किया गया था, और तुर्की सहित कई देशों ने इसे सह-प्रायोजित किया था.

चीन में उइगर और अन्य मुस्लिम बहुल समुदायों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों को 2017 के अंत से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र के ध्यान में लाया जाता रहा है.

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