नयी दिल्ली. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने आतंकवाद के किसी धर्म से जुड़े नहीं होने पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि देश में करीब 20 करोड़ मुसलमान होने के बावजूद वैश्विक आतंकवाद में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता ”बहुत ही कम” रही है.
डोभाल ने यह भी कहा कि भारत उन संस्कृतियों और धर्मों का मिलन स्थल रहा है, जो सदियों से सद्भाव के साथ सह-अस्तित्व में हैं. उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक समूहों के बीच इस्लाम को एक अनूठा और ”गौरवपूर्ण स्थान” प्राप्त है. डोभाल भारत दौरे पर आए मुस्लिम वर्ल्ड लीग (एमडब्ल्यूएल) के महासचिव डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इस्सा के सम्मान में खुसरो फाउंडेशन और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर थे.
अल-इस्सा ने कहा कि भारत में मुसलमानों को अपनी राष्ट्रीयता और भारतीय संविधान पर गर्व है. डोभाल ने अल-इस्सा को उदारवादी इस्लाम की प्रामाणिक वैश्विक आवाज और इस्लाम की गहरी समझ रखने वाला एक गहन विद्वान बताया. डोभाल ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और लोकतंत्रों की जननी के रूप में भारत अविश्वसनीय विविधता की भूमि है. उन्होंने कहा, ”आपने (अल-इस्सा) बातचीत में हमारे अस्तित्व की मूलभूत विशेषता के रूप में विविधता का विस्तार से उल्लेख किया. यह (भारत) संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं और जातीयताओं का एक मिलन स्थल रहा है, जो सदियों से सद्भाव के साथ सह-अस्तित्व में हैं.”
डोभाल ने कहा, ”एक समावेशी लोकतंत्र के रूप में, भारत अपने सभी नागरिकों को उनकी धार्मिक, जातीय और सांस्कृतिक पहचान पर ध्यान दिये बिना समान अहमियत देने में कामयाब रहा है.” उन्होंने कहा, ”कई धार्मिक समूहों के बीच इस्लाम का एक अनूठा और गौरवपूर्ण स्थान है तथा भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है.” डोभाल ने कहा, ”हम जिस पैमाने की बात कर रहे हैं उसका अंदाजा इस बात से लगता है कि भारत की मुस्लिम आबादी इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के 33 से अधिक सदस्य देशों की संयुक्त आबादी के लगभग बराबर है.”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत असहमति को आत्मसात करने की असीमित क्षमता के साथ विभिन्न विचारों के आश्रय स्थल के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा, ”असहमति का मतलब विघटन नहीं है, असहमति का मतलब अनिवार्य रूप से टकराव नहीं है. लेकिन इस देश में अपने विचारों को लेकर कोई भी खतरे में नहीं है.”
डोभाल ने कहा कि एक गौरवान्वित सभ्यता वाले राष्ट्र के रूप में, भारत हमारे समय की चुनौतियों से निपटने के लिए सहिष्णुता, संवाद और सहयोग को बढ.ावा देने में विश्वास करता है. उन्होंने कहा, ”यह कोई संयोग नहीं है कि लगभग 20 करोड़ मुस्लिम होने के बावजूद, वैश्विक आतंकवाद में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता बहुत ही कम है.”
उन्होंने कहा, ”फिर भी चरमपंथ और वैश्विक आतंकवाद की चुनौती हमें अपनी सीमाओं की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी चौकसी कम नहीं करने और इससे परे सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूर करती है.” डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत उन व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है जो चरमपंथ, नशीले पदार्थों और आतंकवाद को बढ.ावा दे रहे हैं. उन्होंने आतंकवाद से मुकाबला करने की आवश्यकता को रेखांकित करने के लिए 1979 में मक्का में ग्रैंड मस्जिद पर हुए हमले को भी याद किया.
भारत भी कई दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों सहित कई आतंकवादी हमलों का सामना किया है, यह उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि भारत विभिन्न तरीके से आतंकवाद से लड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, नए कानून बनाना और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग करना शामिल है.
उन्होंने कहा, ”हालांकि आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में, गंभीर उकसावे के बावजूद भी भारत ने कानून के शासन, अपने नागरिकों के अधिकारों और मानवीय मूल्यों और मानवाधिकारों की सुरक्षा को दृढ.ता से बरकरार रखा है.” एनएसए ने कहा कि भारत एक ”बेहद जिम्मेदार ताकत” है, लेकिन जब आतंकवादियों की पनाहगाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत महसूस हुई तो उसने राष्ट्र हित में आतंकवाद का खात्मा करने के लिए हर संभव प्रयास किया.
अल-इस्सा ने अतीत में आतंकवाद को किसी भी राष्ट्रीयता, सभ्यता या धर्म से जोड़ने के किसी भी प्रयास को खारिज कर दिया, यह जिक्र करते हुए डोभाल ने कहा कि यह बिल्कुल सही दृष्टिकोण है. उन्होंने कहा, ”आतंकवाद किसी भी धर्म से जुड़ा नहीं है, व्यक्ति गुमराह हो जाते हैं. यह संभवत? आध्यात्मिक और धार्मिक नेताओं का कर्तव्य है कि वे चाहें जिस भी धर्म, विश्वास, आस्था या राजनीतिक विचारधारा से संबंधित हैं, इस पर गौर करें. लेकिन, जो कोई भी हिंसा का रास्ता अपनाता है उससे प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘युद्ध का युग नहीं’ कथन को याद करते हुए डोभाल ने कहा कि आज की दुनिया में जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों के साथ धर्म को शांति और सद्भाव के युग की शुरुआत करने के साथ मानवता के लिए एक प्रेरक प्रकाश स्तंभ बनना होगा.
भारत और सऊदी अरब के बीच ”उत्कृष्ट” संबंधों की सराहना करते हुए डोभाल ने कहा कि ये संबंध साझा सांस्कृतिक विरासत, समान मूल्यों और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं. एनएसए ने कहा कि हमारे नेता भविष्य के लिए एक साझा दृष्टिकोण साझा करते हैं और एक-दूसरे के साथ निकटता से बातचीत कर रहे हैं.
डोभाल ने यह भी कहा कि इस्लाम सातवीं शताब्दी में पैगंबर मोहम्मद के जीवनकाल के दौरान भारत में आया और धीरे-धीरे इस उपमहाद्वीप में एक नया आश्रय पाया. डोभाल ने लोगों को एक साथ लाने और एक-दूसरे के प्रति सामाजिक और बौद्धिक समझ विकसित करने में मदद करने का श्रेय हिंदू धर्म और इस्लाम की आध्यात्मिक सामग्री को दिया. अल-इस्सा भारत सरकार के आधिकारिक निमंत्रण पर यहां आए हैं. एमडब्लूएल एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन है जिसका मुख्यालय मक्का में है, जिसमें सभी इस्लामी देशों और संप्रदायों के सदस्य शामिल हैं.