प्रधान ने छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए उपाय तलाशने को कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 09 May 2022 08:34 PM
प्रधान ने छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए उपाय तलाशने को कहा
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नयी दिल्ली. शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सुझावों के आधार पर तीन से 23 वर्ष की आयु के लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा तथा संस्कृत के ज्ञान एवं कौशल से जोड़ने के लिए संस्कृत विद्यालय समूहों से अभिनव उपाय तलाशने की अपील की. केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘उत्कर्ष महोत्सव’ को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 100-150 सालों में हमारी संस्कृत विधा को योजनाबद्ध तरीकÞे से केवल औपचारिकता तक सीमित रखने का प्रयोजन किया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘एक माहौल बनाया गया जैसे संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा हो . ऐसा करके संस्कृत को सीमित करने का प्रयास किया गया.’’ उन्होंने कहा कि ’’ेन त्सांग के समय से लेकर आज के रायसिना डायलॉग तक संस्कृत की सहजता, आधुनिकता और वैज्ञानिकता को प्रमाण की जÞरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि इसमें एक बड़ा विषय संस्कृत को लेकर श्रेष्ठता का भाव भी रहा. प्रधान ने कहा कि संस्कृत श्रेष्ठ है, इसमें कोई शक नहीं लेकिन इस श्रेष्ठता के भाव को त्याग कर इसे कैसे लोकभाषा बनाया जाए, यह महत्वपूर्ण चुनौती है.

उन्होंने कहा, ‘‘ भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की चुनौती, संस्कृत एवं भारतीय भाषाओं को लोक मानस, लोक भाषा का हिस्सा बनाने की चुनौती, अगली पीढ़ी के अज्ञान के अंधेरों से उजाले की ओर ले जाने की चुनौती हम सब को स्वीकारनी पड़ेगी. ’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी बच्चों को औपचारिक शिक्षा के दायरे में लाने की पहल की है, इसके तहत तीन वर्ष के बच्चों को बाल बाटिका में लाया जायेगा .

शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ अगर हम तीन से 23 वर्ष आयु वर्ग का विचार करें तो इसके तहत 50 करोड़ आबादी आती है.’’ उन्होंने कहा कि इनकी शिक्षा दीक्षा, कौशल विकास को लेकर व्यवस्था सीमित है, ऐसे में इनके लिये अभिनव उपाय खोजने होंगे ताकि यह आयु वर्ग ज्ञान, शिक्षा एवं कौशल से जुड़े .

प्रधान ने कहा, ‘‘ संस्कृत विद्यालय समूह इस संबंध में एक प्रमुख दायित्व ले . ऐसा भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृत की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. ’’ शिक्षा मंत्री ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा एवं स्थानीय भाषा में शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया .
उन्होंने कहा कि भारत की सारी भाषाएं श्रेष्ठ हैं और भारतीय भाषाओं की विविधता में भी जो एकता है, उसमें संस्कृत का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुरूप हमें संस्कृत समेत सभी भारतीय भाषाओं को महत्व देना होगा.’’

 

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