गैर-भाजपा नेताओं को भारत रत्न देने के ऐलान से भाजपा को नए क्षेत्रों में मजबूती से उभरने की उम्मीद

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 09 Feb 2024 09:27 PM
गैर-भाजपा नेताओं को भारत रत्न देने के ऐलान से भाजपा को नए क्षेत्रों में मजबूती से उभरने की उम्मीद
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नयी दिल्ली/हैदराबाद. सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ अक्सर प्राप्तकर्ताओं द्वारा किए गए सार्वजनिक योगदान से परे एक संदेश भी देते हैं. इसके मद्देनजर इस चुनावी साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से इस सम्मान के लिए एम एस स्वामीनाथन के अलावा जिन अन्य चार राजनीतिक हस्तियों के नाम का ऐलान किया गया है उनमें से तीन गैर-भाजपा पृष्ठिभूमि से हैं.

इसके जरिए मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सत्तारूढ. भाजपा, अपने पूर्वर्वितयों के विपरीत सार्वजनिक जीवन में योगदान को मान्यता देने में संकीर्ण राजनीति नहीं करेगी क्योंकि उसे चुनावों के दौरान उन क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति मजबूत करनी है जहां वह अपेक्षाकृत कमजोर रही है.

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पी वी नरसिम्हा राव और ख्याति लब्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को ‘भारत रत्न’ दिए जाने की घोषणा की. इससे पहले वह जननायक कर्पूरी ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वयोवृद्ध नेता व पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को इस सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की थी. चरण सिंह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठकूर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद वैचारिक साथी थे और दोनों ने एक विचारधारा का समर्थन किया.

पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव आजीवन कांग्रेसी रहे और उन्हें आर्थिक सुधारों का राजनीतिक शिल्पी माना जाता है जिसने देश की दिशा बदल दी. हालांकि, 1996 में सत्ता गंवाने के बाद राव की अपनी पार्टी ने उनके और उनकी विरासत के साथ जो व्यवहार किया उसने उन्हें भाजपा  समर्थक हलकों में राव के प्रति सहानुभूति और यहां तक कि सम्मान का भाव पैदा कर दिया. भाजपा ने इसे अक्सर मुद्दा बनाया और इसके लिए गांधी परिवार को दोषी ठहराया.

तेलुगु भाषी राव एकमात्र दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था. राव को भारत रत्न देकर जाहिर तौर पर भाजपा ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अपनी पैठ बढ.ाने का रास्ता ढूंढ.ा है. चरण सिंह ने 1967 में कांग्रेस छोड़ दी और उत्तर प्रदेश में उसका आधिपत्य समाप्त कर उसी साल पार्टी के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने. उन्होंने उत्तर भारत में कृषि समुदायों को एकजुट किया, जिससे कई वर्षों तक सामाजिक न्याय और कांग्रेस-विरोध के प्रति प्रतिबद्ध पार्टियों के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ.

किसानों के हित के एक प्रबल समर्थक रहे चरण सिंह की अपील क्षेत्रों और जातियों से परे होती थी. उन्होंने उस किसान समुदाय को लामबंद किया जिसका हाल के दिनों में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार के साथ बहुत अच्छा रिश्ता नहीं रहा है. केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भी यह देखा गया था.

सिंह जाटों के लिए श्रद्धेय बने हुए हैं. ज्ञात हो कि इस जाति का उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में खासा प्रभाव है और उन्हें आम तौर पर भाजपा का कट्टर समर्थक नहीं माना जाता है. भाजपा विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के सदस्य राष्ट्रीय लोकदल के साथ भी गठबंधन की बातचीत कर रही है. इसका नेतृत्व चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी कर रहे हैं.

राज्यसभा सदस्य जयंत ने भारत रत्न की घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए एक पोस्ट में कहा, ”दिल जीत लिया.” संयोग से, यह चरण सिंह ही थे जिन्होंने ‘दोहरी सदस्यता’ के मुद्दे पर मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली भारत की पहली गैर कांग्रेसी सरकार को गिरा दिया था. भारतीय जनसंघ से जनता पार्टी में आये सदस्यों को अलग-थलग करने के लिए ‘दोहरी-सदस्यता’ का मामला उठाया गया था.

यहां तक कि प्रधानमंत्री बनने के लिए चरण सिंह ने कुछ समय के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाया, लेकिन जब सदन में बहुमत की बारी आई तो इंदिरा गांधी ने समर्थन वापस ले लिया और उनकी सरकार गिर गई. भाजपा के एक नेता ने कहा कि सिंह और कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन का चयन कृषि क्षेत्र को लेकर मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि राव और स्वामीनाथन का दक्षिण भारत से आना दर्शाता है कि मोदी सरकार देश के सभी कोनों के लोगों के योगदान और विशेषज्ञता को महत्व देती है. आने वाले दिनों में भाजपा राष्ट्रीय पुरस्कारों को प्रदान करने के मामले में मोदी सरकार और कांग्रेस की पिछली सरकारों के नजरिये के अंतर को रेखांकित करेगी क्योंकि उसने अक्सर विपक्षी दल पर उन्हें चुनने के लिए राजनीतिक चश्मे का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

मोदी अक्सर कहते हैं कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को भारत रत्न तब दिया गया जब वे प्रधानमंत्री थे जबकि बी आर आंबेडकर और सरदार पटेल जैसे नेताओं को उनके निधन के दशकों बाद इससे नवाजा गया. कर्पूरी ठाकुर अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आते थे और पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उनके योगदान की सराहना होती है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद को ठाकुर का अनुयायी मानते हैं. ठाकुर को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद वह राजग में शामिल हो गए थे. वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से नवाजे जाने से यह संदेश गया कि पार्टी ने भाजपा के उदय और उसकी विचारधारा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस नेता के योगदान का सम्मान दिया.

भारत रत्न की घोषणा से साफ है कि मोदी सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर योगदान की सराहना करती है: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और चौधरी चरण सिंह तथा कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित करने के केंद्र के फैसले की सराहना करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोगों के योगदान की सराहना करती है.

भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने सोशल मीडिया मंच’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”मैं पी. वी. नरसिम्हा राव के प्रेरक नेतृत्व और विरासत का जश्न मनाने में हमारे साथी देशवासियों के साथ शामिल होता हूं क्योंकि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है. मैं इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करता हूं.” उन्होंने कहा कि राव ने सबसे खराब संकट के दौर में बड़ी चतुराई से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दिया और तीव्र आर्थिक प्रगति के दरवाजे खोले. उन्होंने कहा कि वह एक दूरदर्शी राजनेता थे, जिनके पास गहन बुद्धि थी.

उन्होंने कहा, ”हमारे राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने बड़ा योगदान दिया.” भाजपा अध्यक्ष ने चौधरी चरण सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने के फैसले के लिए सरकार को बधाई दी और कहा कि किसानों और कृषि क्षेत्र की सर्वांगीण प्रगति के लिए पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कार्य ‘अविस्मरणीय’ हैं.

उन्होंने कहा, ”कृषि जगत व किसान भाइयों के सर्वविद उत्कर्ष के लिए चौधरी जी द्वारा किए गए कार्य अविस्मरणीय हैं. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता व ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया, वे हमारे समाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों के सच्चे प्रतिनिधि हैं.” उन्होंने कहा, ”आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्होंने संघर्ष किया. उनकी राजनीतिक विरासत से सृजित अनेक राजनीतिक दल आज हमारे लोकतंत्र को सशक्त व समृद्ध कर रहे हैं. राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को सर्मिपत इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं और चौधरी चरण सिंह जी का अभिवादन करता हूं.” नड्डा ने कहा कि स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय उनकी विरासत को उचित श्रद्धांजलि है.

उन्होंने, ”कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण प्रयासों ने लाखों लोगों को भूख और गरीबी के चंगुल से बाहर निकालने में मदद की. लोगों की बेहतरी के लिए नवोन्मेष का दायरा बढ.ाने में उनका योगदान हमारे वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक प्रेरणा है.” भाजपा अध्यक्ष ने स्वामीनाथन को यह सम्मान देने की घोषणा करने के लिए मोदी का आभार जताया.

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने दलगत भावना और जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर तीन प्रतिष्ठित हस्तियों को भारत रत्न से सम्मानित करने के सरकार के फैसले की घोषणा करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. उन्होंने यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”इससे यह संदेश जाता है कि जिन लोगों ने भी देश की प्रगति को दिशा दी है, वे हमारे लिए सम्मानजनक हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह व्यक्तित्व किस पार्टी से जुड़ा है.”

राव की बेटी ने ‘भारत रत्न’ देने के मामले में दलगत भावना से ऊपर उठने को लेकर प्रधानमंत्री को सराहा

पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की बेटी एवं भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से विधानपरिषद सदस्य वाणी देवी ने दलगत भावना से ऊपर उठकर कांग्रेस के दिवंगत नेता को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने के लिए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की. उन्होंने कहा कि हालांकि इसमें कुछ देर हुई, लेकिन ठीक है क्योंकि यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान है.

वाणी ने कहा कि नरसिम्हा राव पूरे राष्ट्र के हैं. उन्होंने कहा, ”हर कोई खुश है. वह केवल तेलुगू माटी के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के सपूत हैं.” उन्होंने कहा कि नरसिम्हा राव उस वक्त प्रधानमंत्री बने थे जब देश मुश्किल समय का सामना कर रहा था. वाणी ने कहा कि उन्होंने (राव ने) सुधारों को लागू किया जिसकी पूरे विश्व ने सराहना की. उन्होंने कहा कि राव ने प्रधानमंत्री रहने के दौरान सुधारों की पहल की और अर्थव्यवस्था से लेकर विदेश मामलों जैसे क्षेत्रों में समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशा.

उन्होंने कहा, ”दलगत भावना से ऊपर उठकर राव के योगदान को मान्यता देना और भारत रत्न प्रदान करना हमारे प्रधानमंत्री (मोदी) के अच्छे मूल्यों, संस्कार को दर्शाता है.” उन्होंने हालांकि कहा कि यह सम्मान और पहले दिया जा सकता था. वाणी ने कहा, ”भारत रत्न सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. हालांकि, इसमें कुछ देर हुई, लेकिन ठीक है. तेलंगाना के लोग नरसिम्हा राव को भारत रत्न दिये जाने से बहुत खुश हैं. परिवार के सदस्य अभिभूत हैं.” उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) नीत तेलंगाना की पूर्ववर्ती सरकार ने नरसिम्हा राव की जन्म शताब्दी को व्यापक स्तर पर मनाया था.

वाणी ने कहा कि नरसिम्हा राव किसी दक्षिणी राज्य से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता थे. उन्होंने कहा कि उन्हें महाराष्ट्र और ओडिशा से फोन आ रहे हैं क्योंकि वह उन राज्यों से सांसद चुने गए थे. उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली से भी फोन आ रहे हैं. नरसिम्हा राव महाराष्ट्र के रामटेक और ओडिशा के बरहमपुर तथा अविभाजित आंध्र प्रदेश के नंदयाल एवं हनुमाकोंडा से लोकसभा के लिए चुने गए थे.

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