असम के दो मंत्रियों द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की ओर से चार जिलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग स्वीकार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने बृहस्पतिवार को अपना 13 दिन से जारी धरना समाप्त कर दिया।
राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य केशव महंत और पीयूष हजारिका ने विधानसभा के बाहर धरनास्थल पर गोगोई से मुलाकात की। इसके बाद गोगोई ने धरना समाप्त किया। गोगोई ने ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग को लेकर दो अक्टूबर को धरना शुरू किया था।
विधायक ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर इन चार जिलों के प्रभावित परिवारों को एकमुश्त अंतरिम सहायता के रूप में 15,000 रुपये और शिवसागर तथा चराइदेव के बाढ़ प्रभावित लोगों को अतिरिक्त 10,000 रुपये देने की मांग की थी।
उन्होंने बाढ़ के कारणों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग भी की थी।
महंत ने कहा, ”मुख्यमंत्री ने हमें गोगोई से इस मुद्दे पर बातचीत करने और सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों की जानकारी उन्हें देने के लिए भेजा है।” उन्होंने कहा, ”रायजोर दल की सूची में शामिल 3,068 परिवारों में से प्रत्येक को 15,000 रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता देने के लिए चार करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की जरूरत होगी। सरकार इन परिवारों को यह राशि देने पर सहमत हो गई है।” महंत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया है और समिति के बारे में जल्द ही जानकारी दी जाएगी।
अतिरिक्त 10,000 रुपये देने की मांग पर मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण कराया जाएगा और उसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा। गोगोई ने कहा कि सरकार ने पहले ही 57,000 परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 15,000 रुपये की लंबित राशि के भुगतान का मुद्दा अब सुलझ गया है।
रायजोर दल के विधायक ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित कई परिवार, विशेषकर शिवसागर के परिवार, शुरूआती सर्वेक्षण में शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, सरकार इस आकलन में छूट गए परिवारों की पहचान के लिए नए सिरे से सर्वेक्षण कराने और एक नई सूची तैयार करने पर सहमत हो गई है।
बैठक के दौरान गोगोई ने सरकार से बाढ़ प्रभावित परिवारों को ओरुनोदोई योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता दोगुनी करने का आग्रह किया। उन्होंने बाढ़ में घर गंवाने वाले लोगों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने की मांग भी की।
विधायक ने कहा कि उन्होंने बाढ़ से हुई मौतों और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके जवाब में राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने की घोषणा की है। गोगोई ने शिवसागर और चराइदेव में प्रदर्शन कर रहे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया।