सबरीमला मुद्दे पर सामुदायिक संगठनों ने LDF का समर्थन किया, कांग्रेस के लिए असहज स्थिति

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 24 Sep 2025 10:48 PM
सबरीमला मुद्दे पर सामुदायिक संगठनों ने LDF का समर्थन किया, कांग्रेस के लिए असहज स्थिति
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तिरुवनंतपुरम/कोट्टायम. केरल में दो प्रमुख सामुदायिक संगठन, नायर र्सिवस सोसाइटी (एनएसएस) और श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम ने सबरीमाला मुद्दे पर सत्तारूढ. एलडीएफ के रुख का समर्थन किया है जो स्थानीय निकाय चुनावों और 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केरल में कांग्रेस के लिए असहज स्थिति है. एनएसएस ने इससे पहले वाम सरकार द्वारा 2018 के उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करने के निर्णय का कड़ा विरोध किया था. शीर्ष अदालत ने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, जो मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लंघन है.

इसके अलावा, यह संगठन राज्य की राजनीति में कांग्रेस का समर्थन करने के लिए भी जाना जाता है, जहां पारंपरिक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक गठबंधन का प्रभुत्व रहा है.

एनएसएस महासचिव जी सुकुमारन नायर एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ के प्रति ‘समान दूरी’ की नीति अपना रहे हैं. उन्होंने कई साक्षात्कारों में खुले तौर पर कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा है, जिसने एनएसएस को आश्वासन दिया है कि सबरीमला में सदियों पुराने अनुष्ठानों को संरक्षित रखा जाएगा. उन्होंने सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की ‘नि्क्रिरयता’ की आलोचना की. नायर ने कांग्रेस पर भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टी हिंदू वोट नहीं चाहती है.

नायर ने कहा, “राज्य सरकार ने हमें आश्वासन दिया है कि सबरीमला में रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को संरक्षित रखा जाएगा.” एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन ने कहा कि वह एनएसएस के मुद्दा आधारित रुख का स्वागत करते हैं.
उन्होंने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, “मुझे नहीं लगता कि एनएसएस ने सरकार की सभी नीतियों का लगातार विरोध किया है. उन्होंने पहले अगड़ी जातियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का स्वागत किया था. यह रुख भी मुद्दा-आधारित है.” नटेसन ने कहा कि इस समय एनएसएस की स्थिति निश्चित रूप से आगामी स्थानीय निकायों और विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ. मोर्चे की मदद करेगी.

सुकुमारन नायर की टिप्पणी पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी ने एनएसएस पर भरोसा नहीं खोया है. उन्होंने कहा, “कांग्रेस और यूडीएफ के एनएसएस के साथ हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं.” यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी कांग्रेस के रुख पर एनएसएस को समझाने का प्रयास करेगी, उन्होंने कहा कि कांग्रेस “उचित समय पर संगठन से संपर्क करेगी.” चेन्निथला ने कहा कि वैश्विक अयप्पा संगमम आयोजित करने से पहले, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस बल का उपयोग करके महिलाओं को मंदिर में ले जाने के लिए अयप्पा भक्तों से माफी मांगनी चाहिए.

समान नागरिक संहिता सबरीमला मंदिर प्रशासन का रास्ता साफ करेगी: केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) देश में लागू हो जाएगी जिस पर लंबे समय से बहस चल रही है. उन्होंने तर्क दिया कि इससे सबरीमला सहित अन्य मंदिरों के प्रशासन की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय प्रारूप का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि यह बयान ‘संकीर्ण राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर’ दिया गया था. मंगलवार शाम को इस जिले के मेविडा में अपने जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत एक सभा में गोपी ने कहा कि राष्ट्रीय प्रारूप धार्मिक संस्थानों को अधिक प्रभावी ढंग से विनियमित करने में मदद कर सकता है.

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, ”जैसे ही यूसीसी अस्तित्व में आएगी, यह विभिन्न समुदायों की जरूरतों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी.” उन्होंने कहा कि एक संरचित प्रणाली अंतत? सबरीमला के साथ-साथ भारत भर के कई अन्य मंदिरों को भी अपने दायरे में ले सकती है.
उन्होंने कहा, ”अगर एक सर्मिपत देवस्वओम विभाग स्थापित किया जाए, तो ऐसे मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है. कोई यह नहीं कह सकता कि ऐसा नहीं होगा. और यह सिर्फ सबरीमला की बात नहीं है, ऐसे कई और भी मंदिर हैं.” बातचीत में एक प्रतिभागी ने पूछा कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सबरीमला मंदिर का क्या होगा? इसके उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह मूल कानून बन जाएगा और इसके बाद मंदिरों के प्रशासन के लिए संभवत? एक राष्ट्रीय व्यवस्था बनेगी. उन्होंने केरल में एक अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स) की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि इससे भविष्य में राज्य को लाभ होगा.

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