कांग्रेस ने डीयू में ‘मनुस्मृति’ पढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने डीयू में एलएलबी छात्रों को ‘मनुस्मृति’ पढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ये सब संविधान और बाबसाहेब भीमराव आंबेडकर की विरासत पर हमला करने के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रयास को अंजाम तक पहुंचाने की चाल का हिस्सा है.

डीयू के विधि संकाय ने अपने प्रथम और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को ‘मनुस्मृति’ पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन करने के वास्ते दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था से मंजूरी मांगी है. इसका शिक्षकों के एक वर्ग ने आलोचना की है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”ये सब संविधान और डॉक्टर आंबेडकर की विरासत पर हमला करने के आरएसएस के दशकों पुराने प्रयास को अंजाम तक पहुंचाने के लिए नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की चाल का हिस्सा है.”

उन्होंने दावा किया कि 30 नवंबर, 1949 को प्रकाशित ”आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइज.र” में लिखा गया था कि ”भारत के नए संविधान के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि इसमें कुछ भी भारतीय नहीं है. संविधान के रचनाकारों ने इसमें ब्रिटिश, अमेरिकी, कनाडाई, स्विस और कई अन्य संविधानों के तत्वों को शामिल किया है लेकिन इसमें प्राचीन भारतीय कानूनों/स्मृतियों का कोई निशान नहीं है. हमारे संविधान में प्राचीन भारत के अद्वितीय संवैधानिक विकास का कोई उल्लेख नहीं है. मनु के कानून बहुत पहले लिखे गए थे… आज तक मनुस्मृति में बताए गए उनके कानून दुनिया की प्रशंसा पाते हैं लेकिन हमारे संवैधानिक पंडितों के लिए इसका कोई मतलब नहीं है.”

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