चुनावी बॉण्ड पर अधूरी जानकारी देने के लिए एसबीआई को न्यायालय की फटकार, नोटिस जारी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 15 Mar 2024 10:25 PM
चुनावी बॉण्ड पर अधूरी जानकारी देने के लिए एसबीआई को न्यायालय की फटकार, नोटिस जारी
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने अधूरी जानकारी देने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को फटकार लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि बैंक को प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के लिए विशिष्ट संख्या प्रदान करना होगा जो खरीदार और प्राप्तकर्ता राजनीतिक दल के बीच राजनीतिक संबंध का खुलासा करेगा.

न्यायालय ने देश के सबसे बड़े बैंक को अपने निर्देशों के अनुपालन में विशिष्ट अक्षरांकीय संख्या (यूनीक अल्फा-न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा न करने के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया और कहा कि एसबीआई उन संख्याओं के खुलासे के लिए “कर्तव्यबद्ध” था.
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने चुनावी बॉण्ड मामले पर अपने फैसले में खरीदार, राशि और खरीद की तारीख सहित बॉण्ड के सभी विवरण का खुलासा करने का निर्देश दिया था.

इस पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बृहस्पतिवार को उन संस्थाओं की पूरी सूची जारी की, जिन्होंने राजनीतिक चंदा देने के लिए चुनावी बॉण्ड खरीदे थे. आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर ये आंकड़े सार्वजनिक किए जाने के एक दिन बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि एसबीआई को सभी जानकारियां मुहैया करानी हैं. पीठ ने बैंक को नोटिस जारी किया और मामले में आगे की सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की.

सीजेआई ने बैंक के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा, ”एसबीआई की ओर से कौन पेश हो रहा है? क्योंकि हमारे फैसले में हमने विशेष रूप से खरीदार, राशि और खरीद की तारीख सहित बॉण्ड के सभी विवरणों का खुलासा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने बॉण्ड संख्या का खुलासा नहीं किया. इसका खुलासा एसबीआई को करना होगा.” विशिष्ट अक्षरांकीय संख्या का उन लोगों से मिलान किया जाएगा, जिन्होंने उन दलों के चुनावी बॉण्ड खरीदे हैं जिन्हें उन्होंने चंदा दिया था.

सीजेआई ने कहा, ”उन्होंने (एसबीआई) बॉण्ड संख्या का खुलासा नहीं किया. इसका खुलासा एसबीआई को करना होगा.” उन्होंने कहा, ”लेकिन सच कहें, तो उन्होंने जितनी जानकारी उपलब्ध कराई है उसे लेकर हम नाराजगी जता सकते हैं क्योंकि वे (बॉण्ड संख्या का खुलासा करने के लिए) कर्तव्यबद्ध थे.” न्यायालय, निर्वाचन आयोग की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहा था जिसमें चुनावी बॉण्ड मामले में न्यायालय के 11 मार्च के आदेश के एक हिस्से में संशोधन का अनुरोध किया गया है.

न्यायालय ने अपने पंजीयक (न्यायिक) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निर्वाचन आयोग द्वारा सीलबंद कवर में सौंपे गए आंकड़ों को स्कैन किया जाए और उन्हें डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाए. आयोग के वकील ने कहा कि उन्होंने 11 मार्च के आदेश में मामूली संशोधन के लिए अर्जी दायर की है, जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि निर्वाचन आयोग अदालत को सौंपे गए आंकड़ों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा. उन्होंने कहा कि आयोग ने उन आंकड़ों की कोई प्रति अपने पास नहीं रखी है जिन्हें अदालत को सौंपा गया है क्योंकि इसे सीलबंद कवर में दिया गया था.

पीठ ने कहा, ”यह निर्देश जारी करते समय, न्यायालय ने माना था कि इस अदालत की रजिस्ट्री को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की एक प्रति ईसी के पास भी होगी.” आयोग ने अनुरोध किया कि इन दस्तावेजों को उसे वापस किया जाए ताकि वह न्यायालय के निर्देशों का पालन कर सके और इन्हें अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर सके.

पीठ ने कहा, ”इस अदालत का पंजीयक (न्यायिक) यह सुनिश्चित करेगा कि न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा सौंपे गए आंकड़ों को स्कैन किया जाए और उन्हें डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाए.” पीठ ने कहा कि इस काम को शनिवार शाम पांच बजे तक पूरा करना बेहतर रहेगा और एक बार यह कार्य हो जाने के बाद मूल दस्तावेज निर्वाचन आयोग को वापस कर दिए जाएं जिसके बाद आयोग आंकड़ों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा.

पीठ ने कहा कि स्कैन की गई और डिजिटल फाइल की एक प्रति निर्वाचन आयोग के वकील को भी उपलब्ध कराई जाए. मामले में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला बिल्कुल स्पष्ट था कि एसबीआई को चुनावी बॉण्ड संबंधी सभी विवरण निर्वाचन आयोग को देने होंगे. याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि एसबीआई ने आयोग को जानकारी मुहैया कराने की समयावधि बढ़ाए जाने का अनुरोध करने के लिए शीर्ष अदालत में दायर अपनी अर्जी में कहा था कि उसके पास बॉण्ड संख्या हैं.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह केंद्र की ओर से पेश हो रहे हैं, एसबीआई की ओर से नहीं. उन्होंने कहा, ”क्या न्यायालय एसबीआई को नोटिस जारी करने पर विचार करेगा. हो सकता है कि उनके पास कहने के लिए कुछ हो.” पीठ ने कहा, ”जब मामले की सुनवाई जारी है तो उन्हें यहां होना चाहिए.” मेहता ने कहा कि एसबीआई इस मामले में पक्षकार नहीं है. उन्होंने कहा कि जब एसबीआई ने अर्जी दायर की थी, तब वे अदालत में मौजूद थे और उस अर्जी का निपटारा कर दिया गया था.

पीठ ने कहा, ”संविधान पीठ के फैसले में एसबीआई को चुनाव आयोग को खरीदे गए चुनावी बॉण्ड के सभी विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता थी, साथ ही खरीद और राजनीतिक दलों द्वारा भुनाये जाने की तारीख भी प्रस्तुत करना था. यह कहा गया है कि एसबीआई ने चुनावी बॉण्ड की अल्फा-न्यूमेरिक संख्या का खुलासा नहीं किया है. न्यायालय ने कहा, ”हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह एसबीआई को नोटिस जारी करे, जिसका जवाब सोमवार (18 मार्च) तक देना है.”

क्षेत्रीय दलों को चुनावी बॉण्ड से कुल 5,221 करोड़ रुपये की राशि मिली

क्षेत्रीय दलों को अप्रैल 2019 और जनवरी 2024 के बीच चुनावी बॉण्ड के जरिये 5,221 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला, जो इसी अवधि में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली 6,060.51 करोड़ रुपये की राशि से 839 करोड़ रुपये कम है. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी चुनावी बॉण्ड के आंकड़ों के मुताबिक दो राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) को इस अवधि में क्रमश? 1,421.86 करोड़ रुपये और 65.45 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. अन्य राष्ट्रीय दलों बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)और एनपीपी (नेशनल पीपुल्स पार्टी) को चुनावी बॉण्ड के जरिये कोई राशि नहीं मिली है.

क्षेत्रीय दलों में, अकेले तृणमूल कांग्रेस को 1,609.53 करोड़ रुपये की राशि चुनावी बॉण्ड के माध्यम से प्राप्त हुई है. यह राशि इस माध्यम से चंदा प्राप्त करने वाले 22 क्षेत्रीय दलों द्वारा प्राप्त कुल दानराशि का 30 प्रतिशत है. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस)ने चुनावी बॉण्ड के जरिए 1,214.70 करोड़ रुपये, बीजू जनता दल (बीजद) ने 775.50 करोड़ रुपये, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक)ने 639 करोड़ रुपये, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने 337 करोड़ रुपये, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा)ने 218.88 करोड़ रुपये और शिवसेना ने 159.38 करोड़ रुपये जुटाए.

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने चुनावी बॉण्ड के माध्यम से 73.5 करोड़ रुपये जुटाए जबकि जनता दल सेक्युलर ने 43.40 करोड़ रुपये, सिक्किम क्रांतिकारी पार्टी ने 36.5 करोड़ रुपये, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने 31 करोड़ रुपये, जन सेना पार्टी ने 21 करोड़ रुपये, समाजवादी पार्टी (सपा) ने 14.05 करोड़ रुपये, जनता दल यूनाइटेड ने 14 करोड़ रुपये और झारखंड मुक्ति मोर्चा को 13.5 करोड़ रुपये इस माध्यम से प्राप्त हुए.

चुनावी बॉण्ड से अकाली दल ने 7.2 करोड़ रुपये, ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने 6.05 करोड़ रुपये और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 5.5 करोड़ रुपये जुटाए. महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी को चुनावी बॉण्ड के जरिए एक करोड़ रुपये से कम राशि प्राप्त हुई.

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा पूर्व में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 से जनवरी 2024 तक 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बॉण्ड बेचे गए हैं. चुनाव आयोग की ओर से अब तक प्रकाशित आंकड़ों में मार्च 2018 से 11 अप्रैल 2019 तक की अवधि के बॉण्ड शामिल नहीं है.

पिछले माह जारी अपनी एक रिपोर्ट में इसने कहा कि भाजपा को चुनावी बॉण्ड से 6566 करोड़ रुपये (54.77 फीसदी) की सर्वाधिक राशि प्राप्त हुई. इसके बाद कांग्रेस को 1123 करोड़ रुपये (9.37 फीसदी) और तृणमूल कांग्रेस को 1092 करोड़ रुपये (9.11 फीसदी) की रकम मिली. उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर एक हलफनामे में, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बताया कि 1 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी 2024 के बीच दानदाताओं द्वारा विभिन्न मूल्यवर्ग के कुल 22,217 चुनावी बॉण्ड खरीदे गए, जिनमें से 22,030 को राजनीतिक दलों ने भुनाया.

चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली प्रमुख कंपनियां

उच्चतम न्यायालय के फैसले से रद्द किए जा चुके चुनावी बॉन्ड को खरीदने वाली प्रमुख कंपनियों का ब्योरा इस प्रकार है…

* फ्यूचर गेमिंग और होटल र्सिवसेज – 1,368 करोड़ रुपये

* मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड – 966 करोड़ रुपये

* क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड – 410 करोड़ रुपये

* वेदांता लिमिटेड – 400 करोड़ रुपये

* हल्दिया एनर्जी लिमिटेड – 377 करोड़ रुपये * भारती ग्रुप – 247 करोड़ रुपये

* एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड – 224 करोड़ रुपये

* वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन – 220 करोड़ रुपये

* केवेंटर फूडपार्क इन्फ्रा लिमिटेड – 194 करोड़ रुपये

* मदनलाल लिमिटेड – 185 करोड़ रुपये

* डीएलएफ ग्रुप – 170 करोड़ रुपये

* यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल – 162 करोड़ रुपये

* उत्कल एल्यूमिना इंटरनेशनल – 145.3 करोड़ रुपये

* जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड – 123 करोड़ रुपये

* बिड़ला कार्बन इंडिया – 105 करोड़ रुपये

* रूंगटा संस – 100 करोड़ रुपये

* डॉ रेड्डीज – 80 करोड़ रुपये

* पीरामल एंटरप्राइजेज ग्रुप – 60 करोड़ रुपये

* नवयुग इंजीनियरिंग – 55 करोड़ रुपये

* शिरडी साई इले्ट्रिरकल्स – 40 करोड़ रुपये

* सिप्ला लिमिटेड – 39.2 करोड़ रुपये

* लक्ष्मी निवास मित्तल – 35 करोड़ रुपये

* ग्रासिम इंडस्ट्रीज – 33 करोड़ रुपये

* जिंदल स्टेनलेस – 30 करोड़ रुपये

* बजाज ऑटो – 25 करोड़ रुपये

* सन फार्मा लैबोरेटरीज – 25 करोड़ रुपये

* मैनकाइंड फार्मा – 24 करोड़ रुपये

* बजाज फाइनेंस – 20 करोड़ रुपये

* मारुति सुजुकी इंडिया – 20 करोड़ रुपये

* अल्ट्राटेक – 15 करोड़ रुपये

* टीवीएस मोटर्स – 10 करोड़ रुपये

* एडलवाइस ग्रुप – 4 करोड़ रुपये

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