धर्मबीर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ क्लब थ्रो में स्वर्ण पदक जीता, प्रणव को रजत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 05 Sep 2024 08:23 PM
धर्मबीर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ क्लब थ्रो में स्वर्ण पदक जीता, प्रणव को रजत
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पेरिस. धर्मबीर ने बुधवार को यहां एशियाई रिकॉर्ड तोड़ते हुए पुरुष एफ51 क्लब थ्रो स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता जबकि प्रणव सूरमा ने रजत पदक हासिल किया जिससे पैरालंपिक की इस स्पर्धा में भारत का दबदबा रहा. विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता सोनीपत के 35 साल के धर्मबीर सबसे पहले मैदान पर उतरे. उन्होंने शुरुआती चार प्रयास में फाउल करने के बाद पांचवें प्रयास में क्लब को 34.92 मीटर की दूरी तक फेंक और फिर पूरी स्पर्धा के दौरान शीर्ष पर बने रहे.

प्रणव ने अपने पहले ही प्रयास में 34.59 मीटर का थ्रो किया लेकिन इसके बावजूद फरीदाबाद का यह 29 वर्षीय खिलाड़ी धर्मवीर को नहीं पछाड़ पाया. र्सिबया के फिलिप ग्राओवाक ने अपने दूसरे प्रयास में 34.18 मीटर का थ्रो करके कांस्य पदक जीता. इसी स्पर्धा में हिस्सा ले रहे एक अन्य भारतीय और 2017 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता अमित कुमार सरोहा हालांकि 23.96 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ 10वें और अंतिम स्थान पर रहे.

एफ 51 क्लब थ्रो स्पर्धा उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़, पैर और हाथों में मूवमेंट बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. सभी प्रतियोगी बैठे-बैठे प्रतिस्पर्धा करते हैं और ताकत उत्पन्न करने के लिए अपने कंधों और बांह पर निर्भर रहते हैं. नहर में गलत तरीके से गोता लगाने के कारण धर्मबीर का कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था. पैरा खेलों ने उन्हें जीवन में एक नई दिशा दी जब साथी पैरा खिलाड़ी अमित कुमार सरोहा ने उन्हें इनसे जोड़ा. दो साल के भीतर धर्मबीर ने 2016 रियो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया जो एक सफल करियर की शुरुआत थी. तब से उन्होंने भारत के लिए कई पदक जीते हैं, जिसमें 2022 एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक भी शामिल है.

क्रिकेट और रोलर हॉकी के शौकीन प्रणव जब 16 साल के थे तब उनके सिर पर सीमेंट की शीट गिर गई जिससे रीढ. की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण वह लकवाग्रस्त हो गए. अपने परिवार के समर्थन और सकारात्मक सोच ने उन्हें ध्यान और शिक्षा की ओर मुड़ने में मदद की. उन्होंने अपनी 12वीं बोर्ड परीक्षा में 91.2 प्रतिशत अंकों के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातकोत्तर की डिग्री और बैंक ऑफ बड़ौदा में सहायक प्रबंधक के रूप में नौकरी हासिल की.

अमित के लिए पैरालंपिक में धर्मबीर के स्वर्ण और प्रणव के रजत से बेहतर कोई गुरु दक्षिणा नहीं

अमित कुमार सरोहा पैरालंपिक में पुरुषों की क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में भले ही आखिरी स्थान पर रहे हों लेकिन उनके शिष्य धर्मबीर के स्वर्ण और प्रणव सूरमा के रजत पदक के रूप में युवा पीढ़ी की सफलता उनके लिए मिशन पूरा होने की तरह है. बुधवार को पैरालंपिक में भारत के पदकों की संख्या 24 हो गई जब धर्मबीर और प्रणव ने शीर्ष दो में जगह बनाई लेकिन अमित इसी स्पर्धा में आखिरी स्थान पर रहे. अमित हालांकि इस बात से उत्साहित हैं कि टीम स्वर्ण पदक के साथ लौटेगी.

इस 39 वर्षीय खिलाड़ी ने प्रतियोगिता में बाद कहा, ”मैं यह नहीं कहूंगा कि यह मेरे लिए दुर्भाग्यपूर्ण था.” अमित ने कहा, ”हां, मेरी स्पर्धा अच्छी नहीं रही. मैं धर्मबीर को देख रहा था, उसने पहले चार थ्रो फाउल किए थे. मैं बहुत चिंतित हो रहा था कि स्पर्धा बदतर होती जा रही है और मेरे साथ भी यही स्थिति हुई.” अमित ने इस स्पर्धा की जटिलता को समझाते हुए कहा कि सफल होने के लिए कई कारकों का एक साथ काम करना जरूरी होता है.

उन्होंने बताया, ”हमारी दिव्यांगता बहुत गंभीर है – हमारी अंगुलियां काम नहीं करती हैं और हमें क्लब को गोंद से चिपकाना पड़ता है. लेकिन ठंड के कारण यह इतना चिपचिपा हो गया था कि पकड़ में नहीं आ रहा था. चिपचिपाहट के कारण इस प्रक्रिया में मेरी उंगलियों की त्वचा भी फट गई.” लेकिन अमित ने कहा कि अपने चौथे प्रयास में पदक जीतने से चूकने से उन्हें कोई निराशा नहीं हुई.

उन्होंने कहा, ”मेरा जो सपना था, वह सच हो गया. जब से मैंने खेलों में भाग लेना शुरू किया, तब से पैरालंपिक में पदक जीतना मेरा सपना था और यह मेरी चौथी प्रतियोगता है- आप जानते हैं कि मैं टीम में सबसे सीनियर एथलीट हूं – तो क्या हुआ अगर मैं इसे नहीं जीत पाया, मेरे शिष्य ने इसे जीत लिया.” यह पूछे जाने पर कि क्या धर्मबीर का स्वर्ण शिक्षक दिवस से पहले उपहार था, अमित ने कहा कि यह उनकी किसी भी इच्छा से बढ़कर है.

उन्होंने कहा, ”हम स्वर्ण पदक लेकर वापस जा रहे हैं और इससे बड़ी गुरु दक्षिणा नहीं हो सकती कि हम साथ थे, हम एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर रहे थे और उन्होंने स्वर्ण पदक जीता.” अमित ने कहा,”सिर्फ शिक्षक दिवस का उपहार ही नहीं, उन्होंने आज मुझे सभी उपहार दिए हैं (जो कोई दे सकता है). सिर्फ उन्होंने ही नहीं, बल्कि प्रणव (सूरमा) ने भी, क्योंकि जब मैंने भारत में क्लब थ्रो शुरू किया था तब कोई नहीं जानता था कि यह क्या है.”

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