कर्नाटक ‘धर्मस्थल’ मामला: न्यायालय ने अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 23 Jul 2025 08:47 PM
कर्नाटक ‘धर्मस्थल’ मामला: न्यायालय ने अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
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नयी दिल्ली/बेंगलुरु. उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक में ‘धर्मस्थल’ के धर्माधिकारी डी. वीरेंद्र हेगड़े के भाई से जुड़े मामलों में मीडिया में रिपोर्टिंग पर रोक लगाने संबंधी अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सार्वजनिक रूप से रिपोर्टों को किसी तीसरे अनधिकृत पक्ष के साथ साझा करने या खुलासा करने पर रोक लगाने से संबंधी अदालत का यह आदेश राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल में महिलाओं की कथित हत्या की खबरों से संबंधित था.

एक स्थानीय अदालत के एकपक्षीय अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर याचिका में उस निर्देश की वैधता पर सवाल उठाया गया है, जिसमें 390 मीडिया संस्थानों को धर्मस्थल दफन मामले से जुड़े लगभग 9,000 लिंक और खबरें हटाने का निर्देश दिया गया था.
प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”आप पहले उच्च न्यायालय जाइए.” निचली अदालत ने यह आदेश श्री मंजूनाथस्वामी मंदिर संस्थाओं के सचिव हर्षेंद्र कुमार द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में पारित किया था. कुमार ने कथित रूप से झूठी और अपमानजनक सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को उजागर किया था, जबकि किसी भी प्राथमिकी में उनके या मंदिर अधिकारियों के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं थे.

हाल में कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने जोर देकर कहा था कि धर्मस्थल में महिलाओं की कथित हत्या के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गहन जांच होनी चाहिए. इससे पहले, राज्य सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था. धर्मस्थल मंदिर दफन मामले के संबंध में धर्मस्थल धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े के भाई हर्षेंद्र कुमार डी. के खिलाफ किसी भी अपमानजनक सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाने वाले बेंगलुरु की अदालत के आदेश के खिलाफ यूट्यूब चैनल ‘थर्ड आई’ ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है.

धर्मस्थल मुद्दा: भाजपा ने पारदर्शी जांच की उम्मीद जताई

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने दक्षिण कन्नड़ जिले के एक धर्मस्थल में सामूहिक रूप से शवों को दफनाने के आरोपों की जांच विशेष जांच दल द्वारा पारदर्शी तरीके से किए जाने की बुधवार को उम्मीद जताई. साथ ही राज्य सरकार से इस मुद्दे के जरिए ”माहौल और व्यवस्था को नष्ट करने के प्रयासों को रोकने” की मांग की.

सरकार ने पुलिस महानिदेशक (आंतरिक सुरक्षा प्रभाग) प्रणव मोहंती की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसमें पुलिस उप महानिरीक्षक (भर्ती) एम एन अनुचेथ और आईपीएस अधिकारी सौम्यलता एस के और जितेंद्र कुमार दयामा शामिल हैं.

विजयेंद्र ने संवाददाताओं से कहा, ” राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है, जांच जल्द से जल्द होनी चाहिए. सभी की इच्छा है कि पारदर्शी जांच हो और सच्चाई सामने आए. लेकिन सरकार को भी इस मुद्दे के जरिए वहां माहौल और व्यवस्था को खराब करने की कोशिशों तथा झूठे प्रचार पर ध्यान देना चाहिए.” भाजपा नेता ने कहा, ” हम भी इसके पीछे की साजिशों से वाकिफ हैं. अगर इस मुद्दे को लेकर वहां की व्यवस्था को नष्ट करने की कोई कोशिश की गई, तो हम विचार करेंगे कि आगे क्या करना है.” दरअसल पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में कथित सामूहिक हत्या, बलात्कार और शवों को सामूहिक तौर पर दफ.नाए जाने के दावों के बाद एसआईटी का गठन किया गया था.

एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि वह 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल में काम करता था और उसे धर्मस्थल में कई शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था. इन शवों में महिलाओं और नाबालिगों के शव भी शामिल थे. उसने आरोप लगाया था कि कुछ शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान थे. उसने इस संबंध में एक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी दिया है.

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