मुंबई. कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए शहरों में कबूतरों को दाना डालने और स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री जैसे ”बेतुके” मुद्दों पर विवाद पैदा कर रही है.
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जाति-आधारित या सांप्रदायिक तनाव को ”प्रतिदिन भड़का रही है”.
उन्होंने कहा कि सरकार ध्यान भटकाने के लिए ”बेतुकी” बहस छेड़ रही है. उन्होंने कहा, ”महाराष्ट्र सरकार को हमें यह नहीं बताना चाहिए कि हमें किस समय मांस खाना चाहिए, कौन से मसाले या नमक का इस्तेमाल करना चाहिए; उसे हमारी व्यक्तिगत आदतों, शादियों या हमारी सोच पर नियंत्रण करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ऐसी चीजों के लिए हमारे राज्य में कोई जगह नहीं है, लेकिन यह सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है.” सपकाल ने कहा कि ”कबूतर जिहाद” भड़काने के बजाय सरकार को मंत्री मंगल प्रभात लोढ.ा से कबूतरों को रखने के लिए एक भवन लेना चाहिए और पक्षियों के लिए एक अस्पताल उपलब्ध कराना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जारी बहस का जिक्र किया कि क्या स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए मुंबई में कबूतरखानों को बंद कर देना चाहिए.
लोढ.ा ने कबूतरखानों पर पूर्ण प्रतिबंध का विरोध किया है.
सपकाल ने कहा कि कबूतरों की बीट और पंख गंभीर श्वसन संक्रमण का कारण बनते हैं. उन्होंने बताया कि उनके मित्र एवं लेखक नरेंद्र लांजेवार की इसी संक्रमण से मृत्यु हो गई थी. कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया, ”पूर्व मुख्यमंत्री (दिवंगत) विलासराव देशमुख ने हर जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में ‘दंगा काबू पथक’ (दंगा नियंत्रण दल) का गठन किया था. लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘दंगा करो पथक’ बनाया है जो सामाजिक अशांति पैदा करने के लिए नासिक, नागपुर और पुणे जैसे स्थानों पर जाता है. अब वे मुंबई में भी यही कर रहे हैं.” सपकाल ने कहा, ”लोग इस ‘कबूतर-जिहाद’ के पीछे की सच्चाई समझ गए हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि धारावी और मोतीलाल नगर पुर्निवकास जैसी परियोजनाओं के माध्यम से मुंबई की आधी से अधिक जमीन अदाणी समूह को दे दी गई.
कुछ शहरों में स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सपकाल ने कहा कि भाजपा अपने अतीत पर चर्चा से बचने के लिए अनावश्यक विवाद पैदा करना चाहती है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ के नेताओं ने कभी स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन अंग्रेजों से पेंशन स्वीकार की.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता धनंजय मुंडे के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी अपने सरकारी बंगले में रहने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”मुंडे ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन सत्ता की उनकी लालसा खत्म नहीं हुई. उन्हें (मुंडे) शायद यह आश्वासन दिया गया होगा कि कुछ समय बाद उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया जाएगा, इसलिए वह अभी भी सरकारी बंगले में रह रहे हैं.” उन्होंने फडणवीस को ”राज्य का अब तक का सबसे असहाय मुख्यमंत्री” भी बताया क्योंकि वह अक्षम मंत्रियों को हटा नहीं सके.