चंडीगढ़. पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया. पुरोहित (83 वर्ष) ने अपने त्याग पत्र में लिखा, ” व्यक्तिगत कारणों और कुछ अन्य प्रतिबद्धताओं की वजह से, मैं पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के पद से इस्तीफा दे रहा हूं. कृपया इसे स्वीकार करें.”
पुरोहित ने शुक्रवार को यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. उनकी मुलाकात चंडीगढ़ महापौर चुनाव में भाजपा की जीत के कुछ दिनों बाद हुई थी. महापौर चुनाव में तीनों पदों पर भाजपा को जीत मिली है. इन चुनावों में कांग्रेस- आम आदमी पार्टी गठबंधन को झटका लगा है. इस गठबंधन के नेताओं ने पीठासीन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है.
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की पीठ ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. पार्टी ने अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी. उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई के ‘आप’ पार्षद के अनुरोध पर विचार करने के लिए शुक्रवार को सहमति जताई थी.
विधानसभा सत्र आयोजित करने और कुलपतियों की नियुक्तियों सहित कई मुद्दों पर पुरोहित का पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मतभेद रहा है. पुरोहित ने मान को भेजे अपने आधिकारिक पत्रों को “प्रेम पत्र” कहे जाने पर भी आपत्ति जताई थी. पुरोहित को अगस्त 2021 में पंजाब का राज्यपाल और चंडीगढ़ का प्रशासक नियुक्त किया गया था. इससे पहले, पुरोहित 2016 से 2017 तक असम के राज्यपाल और 2017 से 2021 तक तमिलनाडु के राज्यपाल रहे. पुरोहित 1984, 1989 और 1996 में नागपुर से तीन बार लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं.