भारत, जापान सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर हुए सहमत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 08 Sep 2022 08:41 PM
भारत, जापान सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर हुए सहमत
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तोक्यो. भारत और जापान ने बृहस्पतिवार को द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा लड़ाकू विमानों के पहले अभ्यास सहित और अधिक सैन्य अभ्यासों में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच दोनों देशों की विशेष द्विपक्षीय रणनीतिक व वैश्विक साझेदारी एक स्वतंत्र, मुक्त और कानून-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

रक्षा मंत्री राजनाथ ंिसह ने जापान की अपनी आधिकारिक यात्रा के पहले दिन यहां अपने जापानी समकक्ष यासुकाजु हमदा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग तथा क्षेत्रीय मामलों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की. दोनों मंत्रियों ने 90 मिनट तक चली बैठक के दौरान दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सैन्य अभ्यास करने पर सहमति व्यक्त की.

ंिसह ने हमदा ने मुलाकात के बाद ट्वीट किया, ‘‘जापान के रक्षा मंत्री यासुकाजु हमदा के साथ द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग व क्षेत्रीय मामलों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की. इस साल दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं.’’ यह उल्लेख करते हुए कि भारत और जापान एक विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी का अनुसरण करते हैं, ंिसह ने कहा कि जापान के साथ भारत की रक्षा साझेदारी स्वतंत्र, मुक्त और कानून-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
भारत के रक्षा मंत्रालय ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि दोनों मंत्रियों ने “भारत-जापान रक्षा साझेदारी और इसकी अहम भूमिका के महत्व को स्वीकार किया जो एक स्वतंत्र, मुक्त एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.” दोनों मंत्रियों ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि लड़ाकू विमानों के पहले अभ्यास के शीघ्र आयोजन से दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच बहुत अधिक सहयोग और अंतर-संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा.

विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापानी समकक्षों के साथ यहां आयोजित दूसरी भारत-जापान 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के बाद रक्षा मंत्री ंिसह ने कहा, “हमें यह जानकर खुशी हो रही है कि हमारी वायु सेनाएं लड़ाकू विमानों के पहले अभ्यास के जल्द आयोजन के लिए मिलकर काम कर रही हैं.”

जापानी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने पुष्टि की कि वे जापान-भारत विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और अधिक बढ़ाने के लिए रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान को बढ़ावा देना जारी रखेंगे, ताकि संबंधित रक्षा अधिकारियों के बीच घनिष्ठ संचार कायम रखते हुए स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत सुनिश्चित किया जा सके तथा इसे सशक्त बनाया जा सके.

इसने कहा कि इसके अलावा, मंत्रियों ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की दृष्टि से पहले जापान-भारत संयुक्त लड़ाकू विमान अभ्यास के लिए समन्वय में प्रगति का स्वागत किया. हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप के बीच भारत, अमेरिका और कई अन्य विश्व शक्तियां स्वतंत्र, मुक्त और कानून-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आवश्यकता पर जोर देती रही हैं.

चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके हिस्सों पर अपना दावा करते हैं. चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान भी बनाए हैं. भारत के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान ंिसह ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत-जापान द्विपक्षीय रक्षा अभ्यास में गहन साझेदारी दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रमाण है.

उन्होंने रक्षा उपकरण और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी के दायरे का विस्तार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
बयान के अनुसार, मंत्री ने जापानी उद्योगों को भारत के रक्षा गलियारों में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया, जहां भारत सरकार द्वारा रक्षा उद्योग के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाया गया है. दोनों मंत्रियों ने ‘धर्म गार्जियन’, ‘जिमेक्स’ और ‘मालाबार’ सहित द्विपक्षीय व बहुपक्षीय अभ्यास जारी रखने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की.

उन्होंने इस वर्ष मार्च में अभ्यास ‘मिलन’ के दौरान ‘रेसिप्रोकल प्रोविजन आॅफ सप्लाई एंड र्सिवसेज एग्रीमेंट’ के क्रियान्वयन का स्वागत किया. जापानी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय प्रशिक्षण के दौरान जापान के आत्मरक्षा बलों और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान से संबंधित समझौते के कार्यान्वयन जैसी पहलों के माध्यम से अंतर-संचालन में सुधार का स्वागत किया.

इसने कहा कि इसके अलावा, रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी सहयोग के संबंध में मंत्रियों ने पुष्टि की कि दोनों देश ठोस सहयोग की दिशा में मिलकर काम करना जारी रखेंगे. उन्होंने जापान और भारत दोनों सहित बहुपक्षीय रक्षा सहयोग और आदान-प्रदान में वृद्धि का भी स्वागत किया, जिसमें दो साल से आयोजित किया जा रहा बहुपक्षीय अभ्यास “मालाबार” शामिल है जिसमें जापान, अमेरिका, भारत और आॅस्ट्रेलिया शामिल हैं.

जापान के बयान में कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने यूक्रेन की स्थिति सहित क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और एक नियम-आधारित व्यवस्था की बुनियाद पर शांतिपूर्ण, स्थिर एवं समृद्ध दुनिया की दिशा में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, जो राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती है. इसमें कहा गया कि उन्होंने सभी देशों के लिए धमकी या बल प्रयोग या एकतरफा यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का सहारा लिए बिना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया. इस वर्ष भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं.

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