जयशंकर ने दिया जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करने का उदाहरण, कहा: संयुक्त राष्ट्र प्रेरणा ले

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 26 Sep 2023 10:28 PM
जयशंकर ने दिया जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करने का उदाहरण, कहा: संयुक्त राष्ट्र प्रेरणा ले
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संयुक्त राष्ट्र. हाल में संपन्न जी20 सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने की भारत की पहल का उदाहरण देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र से सुरक्षा परिषद को समसामयिक बनाने के लिए ‘प्रेरणा लेने का आह्वान किया.’ इस माह के प्रारंभ में नयी दिल्ली में जी20 सम्मेलन में उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के इस संगठन ने आम सहमति से नयी दिल्ली घोषणापत्र अपनाया तथा अफ्रीकी संघ को उसमें स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किया जाना एक ‘अहम कदम’ है. उन्होंने कहा, ”यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत की पहल पर अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया. ऐसा कर हमने समूचे महाद्वीप को आवाज दी जिससे उसे लंबे समय से वंचित रखा गया था.”

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, ”सुधार के इस महत्वपूर्ण कदम से उससे भी अधिक पुराने संगठन संयुक्त राष्ट्र को सुरक्षा परिषद को समसामयिक बनाने के लिए प्रेरणा लेनी चाहिए. प्रभाव एवं विश्वसनीयता दोनों के लिए व्यापक प्रतिनिधित्व एक पूर्वशर्त है.” उन्होंने कहा, ”जिस रूप में संयुक्त राष्ट्र अपने आप को पेश करता है, उसके लिए साझा आधार खोजना जरूरी है. दूसरों को सुनना एवं उनके दृष्टिकोण को सम्मान देना कोई कमजोरी नहीं होती है, यह तो सहयोग का मूलभूत तत्व है. केवल तभी वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक प्रयास सफल हो सकते हैं.” उन्होंने कहा कि कैसे अपनी चर्चाओं में देश अक्सर ‘नियम आधारित व्यवस्था को बढ.ावा देने की वकालत करते हैं और समय समय पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति सम्मान की भी बात उठायी जाती है.”

उन्होंने कहा, ”लेकिन इन सभी चर्चाओं के लिए, अब भी कुछ देश हैं जो एजेंडा तय करते हैं और नियमों को परिभाषित करते हैं. लेकिन यह अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता और ऐसा भी नहीं है कि उसे चुनौती नहीं दी जा सकती.” जयशंकर ने कहा, ”एक बार हम सभी अपना दिमाग इस पर लगायें तो निश्चित ही निष्पक्ष, समान एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था उभरकर सामने आयेगी.” दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भारत सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए सालों से प्रयासरत है. उसका कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य का पूरी तरह हकदार है क्योंकि यह परिषद वर्तमान रुप में 21वीं सदी की भौगोलिक-राजनीतिक हकीकत का प्रतिनिधित्व नहीं करती है.

जयशंकर का संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आतंकवाद पर राजनीतिक सहूलियत से काम नहीं करने का आह्वान
भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर अपनी प्रतिक्रिया तय करने में ‘राजनीतिक सहूलियत’ को आड़े नहीं आने देने का आह्वान किया. यह बयान एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच कनाडा पर परोक्ष प्रहार प्रतीत होता है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान तथा अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप की कवायद चुनिंदा तरीके से नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि वे दिन बीत गये जब कुछ राष्ट्र एजेंडा तय करते थे और उम्मीद करते थे कि दूसरे भी उनकी बातें मान लें.

विदेश मंत्री ने कहा, ” हमें टीका भेदभाव जैस अन्याय फिर नहीं होने देना चाहिए. जलवायु कार्रवाई भी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों से मुंह फेरकर जारी नहीं रह सकती है. खाद्य एवं ऊर्जा को जरूरतमंदों के हाथों से निकालकर धनवान लोगों तक पहुंचाने के लिए बाजार की ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा, ” न ही हमें ऐसा करना चाहिए कि राजनीतिक सहूलियत आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर प्रतिक्रया तय करे. क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान तथा अंदरूनी मामलों में गैर हस्तक्षेप की कवायद चुनिंदा तरीके से नहीं की जा सकती.” उनका इशारा परोक्ष रूप से अमेरिका की ओर था जिसने सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कथित रूप से कनाडा को खुफिया सूचना उपलब्ध करायी थी.

राजनीतिक सहूलियत संबंधी जयशंकर की टिप्पणी कनाडा के संदर्भ में प्रतीत होती है जिसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हाल में अपने देश में एक खालिस्तानी चरमपंथी नेता की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘संभावित’ संलिप्तता का आरोप लगाया था. भारत ने उनके बयान को ‘बकवास’ एवं ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदर बागची ने पिछले सप्ताह कहा था, ” उन्होंने (कनाडाइयों ने) आरोप लगाये हैं. हमारे लिए ऐसा जान पड़ता है कि कनाडा सरकार के ये आरोप प्राथमिक तौर पर राजनीति से प्रेरित हैं.” कनाडा में 770,000 सिख जनसंख्या है जो देश की कुल जनसंख्या का दो प्रतिशत है. वहां सिख एक अहम वोटबैंक समझे जाते हैं.

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा, ” हमारी चर्चाओं में, हम अक्सर नियम आधारित व्यवस्था को बढ.ावा देने की वकालत करते हैं. समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति सम्मान की भी बात भी उठायी जाती है. लेकिन इन सभी चर्चाओं के लिए, अब भी कुछ देश हैं जो एजेंडा तय करते हैं और नियमों को परिभाषित करते हैं. यह अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता . ऐसा भी नहीं है कि इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है.” जयशंकर ने कहा, ”एक बार हम सभी अपना दिमाग इस पर लगायें तो निश्चित ही निष्पक्ष, समान एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था उभरकर सामने आयेगी.”

उन्होंने कहा, ” जब हम सामूहिक प्रयास को प्रोत्साहित करते हैं , तब भारत विविध साझेदारों के साथ सहयोग को बढ.ावा देने का प्रयास करता है. गुटनिरपेक्ष के दौर से आगे बढ.कर हमने विश्वमित्र की अवधारणा विकसित की है. यह विविध प्रकार के देशों के साथ संवाद एवं साझेदारी करने के हमारे सामर्थ्य एवं इच्छा में झलकती है.” वह क्वाड और ब्रिक्स जैसे संगठनों के तेजी से विकास का जिक्र करते हुए यह बात कही.

जयशंकर ने कहा, ” सभी देश अपने राष्ट्रहित को आगे बढ.ाते हैं. भारत में हमे वह वैश्विक भलाई के विरूद्ध नजर नहीं आया. जब हम अग्रणी ताकत बनने की आकांक्षा लेकर बढ.ते हैं तो यह आत्म-अभ्युदय नहीं बल्कि अधिक जिम्मेदारी लेना एवं योगदान करना होता है.” जयशंकर ने कहा कि दुनिया उथल-पुथल के असाधारण दौर से गुजर रही है . उन्होंने कहा कि यही असाधारण जिम्मेदारी का ही भाव है कि भारत ने जी20 की अध्यक्षता संभाली. उन्होंने कहा, ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का भारत का दृष्टिकोण महज कुछ देशों के संकीर्ण हितों पर नहीं, बल्कि कई राष्ट्रों की प्रमुख चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करता है.

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