कठुआ मुठभेड़ : सुरक्षाबलों ने तलाश अभियान तेज किया, पूछताछ के लिए कुछ और लिए गए हिरासत में

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सेना के गश्ती दल पर घात लगाकर हमला करने के जिम्मेदार आतंकवादियों को पकड़ने के लिए कठुआ-उधमपुर-डोडा इलाके के घने जंगलों में जारी तलाश अभियान बृहस्पतिवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया और सुरक्षाबलों ने इस अभियान को तेज करते हुए अतिरिक्त र्किमयों को तैनात किया. आतंकवादियों द्वारा सोमवार को किए गए हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद से करीब 60 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जिनमें वे तीन संदिग्ध भी शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादियों को रसद की आपूर्ति की थी और आश्रय दिया था. उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में वह महिला भी शामिल है जिसने खाना पकाकर एक व्यक्ति को दिया था. उसके द्वारा पकाया गया खाना 10 से 15 लोगों के लिए पर्याप्त था. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि उक्त खाना आतंकवादियों के लिए था.

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर और पंजाब के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों ने कठुआ में अहम बैठक की और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. माना जा रहा है कि आतंकवादियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की. अधिकारियों ने बताया कि अंतर राज्यीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर और पंजाब से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमापार से होने वाली घुसपैठ से निपटने, जम्मू संभाग और सीमावर्ती पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों का मुकाबला करने के तरीकों पर चर्चा की गई.

उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान जवान सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि आतंकवादियों द्वारा संर्विधत विस्फोट उपकरण (आईईडी) लगाए जाने का खतरा है. अधिकारियों ने बताया कि तलाश अभियान का दायरा जम्मू संभाग के कठुआ, उधमपुर और डोडा जिलों के पहाड़ी इलाकों तक बढ़ा दिया गया है क्योंकि जून से ही इन इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है.

उन्होंने बताया कि सेना की नौवीं कोर के जवानों ने कठुआ की पहाड़ियों में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है जबकि 16वीं कोर के डेल्टा फोर्स ने अतिरिक्त जवानों को उधमपुर और डोडा जिलों में भेजा है और खासतौर पर सियोज धार इलाके पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जो ऐतिहासिक रूप से 1990 में आतंकवादियों का पनाहगाह रहा है, मुख्यरूप से विदेशी आतंकवादियों के लिए.

अधिकारियों ने बताया कि यह पहाड़ी इलाके की घेराबंदी के लिए किया जा रहा है ताकि आतंकवादी बचकर भाग न सके. उन्होंने कहा कि जमीन पर अभियान को अंजाम दे रहे जवानों की मदद ड्रोन कर रहे हैं. इसके अलावा सेना के विशेष बलों और खोजी कुत्तों को भी तैनात किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि यह इलाका घने जंगलों से घिरा है जिसमें गहरी घाटियां, गुफाएं और कठिन भूस्थिति है. इसके अलावा जवानों को बारिश और धुंध जैसी विपरीत मौसमी घटनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि राजमार्ग पर और चल रही अमरनाथ यात्रा से जुड़े स्थानों सहित संवेदनशील स्थानों पर संभावित आईईडी हमले से बचने के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं.

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