मुंबई. उद्धव और राज ठाकरे के बीच सुलह की अटकलों पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नाराज हो गए और एक संवाददाता से कहा कि उन्हें इसके बजाय सरकार के काम के बारे में बात करनी चाहिए. शनिवार को जब शिंदे सतारा जिले में अपने पैतृक गांव दरे में थे, तो टीवी मराठी के एक संवाददाता ने उनसे शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे के बीच सुलह की अटकलों पर प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया. इसपर, शिंदे चिढ़ गए और उन्होंने संवाददाता की बात अनुसनी कर दी.
शिवसेना नेता ने कहा, “काम के बारे में बात करें.” इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने कहा कि यह तो जाहिर सी बात है कि शिंदे नाराज होंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा. राउत ने पत्रकारों से कहा, “मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस अपना गुस्सा नहीं दिखाएंगे, लेकिन इसे लेकर उनके पेट में मरोड़ देते रहेगा. हम जानते हैं कि भाजपा की खुशी कितनी झूठी है. वे यह (गठबंधन) नहीं चाहते हैं.” शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा था, “अगर वे साथ आते हैं, तो हमें खुशी होगी. अलग-थलग पड़े लोगों को साथ आना चाहिए, और अगर उनके विवाद खत्म हो जाते हैं, तो यह अच्छी बात है….मुझे लगता है कि मीडिया बहुत ज्यादा अटकलें लगा रहा है, इसलिए कुछ समय तक इंतजार करना बेहतर है.” यह पूछे जाने पर कि क्या इसका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों पर असर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) आसानी से चुनाव जीत जाएगा.
राज ठाकरे ने फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर को दिए साक्षात्कार में कहा कि उन्हें अविभाजित शिवसेना में उद्धव के साथ काम करने में कोई समस्या नहीं थी. इस बयान के बाद सुलह की अटकलें शुरू हो गईं. राज ठाकरे ने कहा कि सवाल यह है कि क्या उद्धव उनके साथ काम करना चाहते हैं. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच संभावित सुलह की अटकलों को हवा देते उनके बयानों से संकेत मिलता है कि वे “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर सकते हैं और लगभग दो दशक के कटु मतभेद के बाद हाथ मिला सकते हैं.
जहां एक ओर, मनसे प्रमुख ने कहा है कि ‘मराठी मानुष’ के हित में एकजुट होना कठिन नहीं है, तो वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह छोटी-मोटी लड़ाइयां भूलने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करने वालों को तरजीह न दी जाए. उद्धव का इशारा संभवत: हाल ही में राज ठाकरे द्वारा अपने आवास पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मेजबानी करने की ओर था. अपने चचेरे भाई का नाम लिए बिना उद्धव ठाकरे ने कहा था कि ‘चोरों’ की मदद करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. उनका स्पष्ट इशारा भाजपा और शिंदे नीत शिवसेना की ओर था.
साल 2022 में उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका तब लगा था जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़कर तत्काली महा विकास आघाडी सरकार गिरा दी थी. इसके बाद शिंदे ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी. पिछले वर्ष 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए हुआ चुनाव शिवसेना (उबाठा) ने विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी के तहत लड़ा था. पार्टी ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 20 सीट पर ही उसे जीत मिली थी.
शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के भतीजे राज ने जनवरी 2006 में पार्टी छोड़ दी थी और अपने फैसले के लिए उद्धव को जिम्मेदार ठहराया था. इसके बाद उन्होंने मनसे की स्थापना की जिसने शुरू में उत्तर भारतीयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. लेकिन 2009 के विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीतने के बाद मनसे का जनाधार घटता चला गया और 2024 के विधानसभा चुनाव में उसका खाता तक नहीं खुला.
राज को जवाब देने से पहले क्या उद्धव ने पत्नी की अनुमति ली थी: भाजपा नेता नितेश राणे
महाराष्ट्र के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नितेश राणे ने रविवार को सवाल किया कि क्या शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले पत्नी रश्मि ठाकरे से सलाह ली थी, जिससे दोनों चचेरे भाइयों के बीच सुलह की अटकलें तेज हो गई हैं.
पिछले कुछ दिन में राज और उद्धव ने संभावित सुलह की अटकलों को हवा दी है और ऐसे बयान दिए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि वे “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज करके महाराष्ट्र और मराठी ‘मानुष’ के हित में हाथ मिला सकते हैं. राणे ने एक हिंदी समाचार चैनल से बातचीत में कहा, “आपको उद्धव ठाकरे से पूछना चाहिए कि क्या उन्होंने मनसे के साथ हाथ मिलाने से पहले रश्मि ठाकरे की अनुमति ली है. ऐसे फैसलों में उनकी राय अधिक मायने रखती है.” मंत्री ने आरोप लगाया कि यह रश्मि ठाकरे ने ही राज ठाकरे को शिवसेना से बाहर निकालने में मुख्य भूमिका निभाई थी, जबकि उस समय दोनों चचेरे भाइयों के बीच “कोई बड़ा मतभेद” नहीं था.
राज ठाकरे और उद्धव के बीच सुलह की अटकलों पर संजय राउत ने कहा- ‘भावनात्मक बातचीत जारी है’
शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच “भावनात्मक बातचीत” जारी है. राउत ने पत्रकारों से कहा कि शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मनसे के अध्यक्ष और अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ सुलह के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रखी है. राउत ने कहा, “गठबंधन की कोई घोषणा नहीं हुई है. फिलहाल भावनात्मक बातचीत जारी है.” राज्यसभा सदस्य ने कहा, “वे (राज और उद्धव) पारिवारिक कार्यक्रमों में मिलते हैं. वे भाई हैं.”