पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को आईएईए की निगरानी में लिया जाना चाहिए: राजनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 15 May 2025 10:32 PM
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को आईएईए की निगरानी में लिया जाना चाहिए: राजनाथ
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श्रीनगर. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के हाथ में परमाणु आयुधों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में लिया जाना चाहिए. रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान के कुछ दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत पाकिस्तान द्वारा किये जाने वाले ”न्यूक्लियर ब्लैकमेल” को सहन नहीं करेगा तथा सीमापार आतंकवाद का करारा जवाब दिया जायेगा.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जम्मू कश्मीर की अपनी पहली यात्रा पर आए रक्षा मंत्री ने सैनिकों से बातचीत में कहा कि इस अभियान ने आतंकी संगठनों और पाकिस्तान में उनके आकाओं को स्पष्ट तौर पर बता दिया कि वे खुद को कहीं भी सुरक्षित न समझें सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का संकल्प कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने पाकिस्तान की परमाणु धमकी पर भी ध्यान नहीं दिया है.

उन्होंने कहा, ”पूरी दुनिया ने देखा है कि पाकिस्तान ने कितने गैरजिम्मेदाराना तरीके से कई बार भारत को परमाणु धमकी दी है.” सिंह ने कहा, ”मैं पूरी दुनिया के सामने यह प्रश्न उठाना चाहता हूं कि पाकिस्तान, जो कि एक दुष्ट और गैर जिम्मेदार देश है, क्या उसके हाथों में परमाणु हथियार सुरक्षित हैं?” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में लिया जाना चाहिए. आईएईए वैश्विक परमाणु आयुध निगरानी संस्था है. रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ इतिहास में की गई सबसे बड़ी कार्रवाई बताया.

उन्होंने कहा, ”पिछले 35-40 वर्ष से भारत सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का सामना कर रहा है. आज भारत ने पूरी दुनिया को यह स्पष्ट कर दिया है कि हम आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकते हैं.” सिंह ने कहा कि पहलगाम हमले को अंजाम देकर भारत के मस्तक को चोट पहुंचाने और देश की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान की छाती पर चोट पहुंचाई गई और उसके जख्मों का एकमात्र इलाज आतंकी संगठनों को पनाह देना बंद करना तथा अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने देना ही है. इक्कीस वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पाकिस्तान यात्रा को याद करते हुए सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने घोषणा की थी कि अब उसकी सरजमीं से आतंकवाद को नहीं फैलाया जायेगा.

उन्होंने कहा, ”लेकिन पाकिस्तान ने भारत को धोखा दिया और अब भी दे रहा है. अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. और अगर आतंकवाद जारी रहा तो यह कीमत बढ़ती जाएगी.” रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को स्पष्ट रूप से पुन: रेखांकित किया है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी आतंकवादी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में छिपे आतंकी और उनके आका अब भारतीय बलों के निशाने पर हैं.

उन्होंने कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने भी स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते और अगर वार्ता होगी तो वह आतंकवाद और पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) पर होगी.” सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता ने पाकिस्तान में छिपे आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं को यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कहीं भी खुद को सुरक्षित न समझें.
उन्होंने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिले कर्ज का जिक्र करते हुए कहा, ”रही बात पाकिस्तान की, तो वह देश तो मांगते-मांगते अपनी जहालत से एक ऐसी हालत में आ गया है, कि उसके बारे में यह भी कहा जा सकता है, कि पाकिस्तान जहां खड़ा होता है, वहीं से मांगने वालों की लाइन शुरू होती है. अभी आपने सुना ही होगा, कि कैसे वह फिर एक बार आईएमएफ के पास कर्ज मांगने गया. वहीं, दूसरी तरफ हमारा देश है कि हम, आज उन देशों की श्रेणी में आते हैं, जो आईएमएफ को निधि देते हैं ताकि आईएमएफ गरीब देशों को कर्ज दे सके.”

रक्षा बलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ”रक्षा मंत्री के तौर पर मुझे आप सभी को बहुत करीब से जानने का मौका मिला है. मैं आपके साहस और वीरता को जानता हूं और साथ ही पहलगाम जैसी घटनाओं के प्रति आपके गुस्से को भी जानता हूं. मैं जानता हूं कि पहलगाम की घटना के बाद आपके अंदर गुस्सा था, पूरे देश के अंदर गुस्सा था.” उन्होंने कहा, ”और मुझे इस बात की भी खुशी है कि आपने अपने गुस्से को सही दिशा दी और बहुत साहस और बुद्धिमत्ता के साथ आपने पहलगाम का बदला लिया.” कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने छह-सात मई की रात को पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचों पर सटीक हमले किए, जिसके बाद पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया.

पाकिस्तानी कार्रवाइयों का भारतीय पक्ष ने कड़ा जवाब दिया. भारतीय सेना ने 26 सैन्य ठिकानों पर हमला करने के पाकिस्तान के प्रयासों के जवाब में 10 मई को मिसाइल और अन्य लंबी दूरी के हथियारों से आठ पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को निशाना बनाया.
दोनों पक्षों ने 10 मई को अपराह्न में सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच वार्ता के बाद सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति की घोषणा की थी.

पाकिस्तान से केवल आतंकवाद और पीओके पर बात होगी : राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर ही होगी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कश्मीर की अपनी पहली यात्रा पर आए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत सशस्त्र बलों की मदद से जल्द ही क्षेत्र से आतंकवाद का सफाया कर देगा.

सिंह ने कश्मीर दौरे के दौरान बादामी बाग छावनी की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए एक पोस्ट में कहा, ”श्रीनगर के बादामी बाग छावनी में बहादुर भारतीय सेना के जवानों के साथ अद्भुत बातचीत हुई. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को फिर से परिभाषित किया है कि भारतीय धरती पर किसी भी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा.” उन्होंने कहा, ”आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती; पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल आतंकवाद और पीओके पर ही होगी. ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आज भारत ने पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ हम किसी भी हद तक जा सकते हैं.” उन्होंने कहा कि सरकार और देश की जनता हर कदम पर, हर स्थिति में सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.

सिंह ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि सेना के सहयोग से भारत जल्द ही क्षेत्र से आतंकवाद का सफाया कर देगा, ”ताकि कोई भी देश की संप्रभुता पर बुरी नजर डालने की हिम्मत न कर सके.” रक्षामंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए नागरिकों तथा ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
उन्होंने घायल सैनिकों के साहस की भी सराहना की तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. उन्होंने सीमा पार कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, ”आज मैं यहां रक्षा मंत्री के साथ-साथ एक संदेशवाहक के रूप में भी आया हूं. पूरे देश की शुभकामनाएं, उनकी प्रार्थनाएं और उनकी कृतज्ञता लेकर मैं आपके बीच आया हूं. एक तरह से आप समझिये कि मैं एक डाकिया बनकर आपके बीच आया हूं और देशवासियों का संदेश लाया हूं. संदेश यह है कि ‘हमें हमारी सेनाओं पर गर्व है’.” सिंह ने सैन्य बलों को उन्नत हथियारों, उपकरणों और आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई.

उन्होंने कहा, ”हमारी सरकार ने सुनिश्चित किया है कि हमारी सेनाएं हर स्थिति के लिए तैयार रहें. आधुनिक राइफलें, मिसाइल रक्षा कवच और ड्रोन जैसे कई नए उपकरण भारत में तेजी से बनाए जा रहे हैं.” सिंह ने कहा, ”एलओसी (नियंत्रण रेखा) और एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर पहले से कहीं ज्यादा संपर्क सुनिश्चित किया गया है. सरकार सैनिकों की उस निष्ठा और तत्परता के लिए उनकी सेवा करने की कोशिश कर रही है, जिसके साथ वे देश की सेवा करते हैं.” बादामी बाग छावनी में सैनिकों के साथ संवाद के दौरान सिंह के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंह, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

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