संसद निष्क्रिय हो गई है; लोकतंत्र ‘सांस लेने के लिए संघर्ष’ कर रहा: चिदंबरम

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 07 Aug 2022 06:17 PM
संसद निष्क्रिय हो गई है; लोकतंत्र ‘सांस लेने के लिए संघर्ष’ कर रहा: चिदंबरम
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि संसद ‘‘निष्क्रिय’’ हो गई है.
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि संस्थानों को नियंत्रित, कमजोर किया जा रहा है या उन पर कब्जा कर लिया गया है और देश में लोकतंत्र ‘‘सांस लेने के लिए संघर्ष’’ कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू सत्र चालू रहने के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तलब किए जाने से विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बचाने में ‘‘असफल’’ रहे.

चिदंबरम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उन टिप्पणियों को खारिज किया, जिनमें उन्होंने बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन को ‘राम मंदिर की नींव रखे जाने के दिन’ से जोड़ा था. उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शन की तारीख तय की गई थी, उस समय ‘शिलान्यास’ की वर्षगांठ की बात तो ‘‘दिमाग में दूर-दूर तक नहीं थी.’’ चिदंबरम ने कहा कि यह तारीख इस बात को ध्यान में रखकर तय की गई थी कि शनिवार को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान होने के कारण दिल्ली में सभी सांसद मौजूद होंगे. उन्होंने कहा कि तर्क को तोड़ने-मरोड़ने के लिए कोई भी व्यक्ति किसी पर भी दोषारोपण कर सकता है.

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, पांच अगस्त, 2019 को ही जम्मू-कश्मीर को अवैध रूप से विभाजित किया गया था. एक गंभीर मुद्दे पर चर्चा करते समय इन्हें एक तरफ छोड़ देना चाहिए.’’ शाह ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में बढ़ोतरी के मुद्दों को लेकर कांग्रेस द्वारा काले कपड़े पहनकर किए गए प्रदर्शन को पार्टी की ‘‘तुष्टीकरण’’ की नीति बताया था और कहा था कि उसने पांच अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर की आधारशिला रखे जाने का विरोध करने के लिए यह प्रदर्शन किया.
चिदंबरम ने भाजपा नेताओं के इस आरोप को भी खारिज किया कि पांच अगस्त को किया गया कांग्रेस का प्रदर्शन ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में ईडी की पूछताछ का सामना कर रहे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बचाने की कोशिश था.

उन्होंने कहा, ‘‘हमने घोषणा की थी और स्पष्ट किया था कि पांच अगस्त का प्रदर्शन केवल महंगाई, बेरोजगारी और अग्निपथ के खिलाफ है. यदि लोग घोषणा को लेकर बहरे एवं अंधे होने का नाटक करते हैं, तो हम क्या कर सकते हैं?’’ चिदंबरम ने कहा कि ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में तलब किए गए नेता अपना बचाव करने में सक्षम हैं और पार्टी के सभी नेता उनके समर्थन में खड़े हैं.

संसद के कामकाजी घंटों के दौरान पिछले बृहस्पतिवार को ईडी द्वारा खड़गे को तलब किए जाने के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि सदन का सत्र चालू होने के दौरान ईडी द्वारा तलब किए गए खड़गे को बचाने में सभापति जिस दिन ‘‘विफल’’ रहे, वह राज्यसभा के लिए ‘‘दुखद दिन’’ था.

उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा का अमेरिका सरकार ने समर्थन किया. कार्यपालिका शाखा ने विधायिका शाखा के प्राधिकार एवं स्वायत्तता का सम्मान किया. अमेरिका सरकार ने ताइवान के पास समुद्र में अपने विमानवाहक भेजे और उसने हवाई मदद भी तैयार रखी.’’ चिदंबरम ने कहा, ‘‘हमारे देश में कार्यपालिका शाखा ने उस समय विपक्ष के नेता को तलब किया, जब राज्यसभा का सत्र चल रहा था और विधायिका शाखा के दो प्रमुखों में से एक ने ‘‘असमर्थतता दिखाई’’. उन्होंने कहा कि यह एक ‘‘दुखद दिन’’ था.

विपक्ष के कई नेताओं के खिलाफ ईडी की जांच के संबंध में चिदंबरम ने किसी एक मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह और स्पष्ट होता जा रहा है कि जांच एवं कानूनों की ताकत का इस्तेमाल केवल विपक्ष के सदस्यों पर किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘संस्थानों को नियंत्रित, कमजोर किया जा रहा है या उन पर कब्जा कर लिया गया है. लोकतंत्र ‘सांस लेने के लिए संघर्ष’ कर रहा है. भले ही हमारे पास लोकतंत्र का कवच है, लेकिन भीतर से यह कवच खोखला हो चुका है. यह लगभग सभी संस्थानों पर लागू होता है. इसी का जिक्र राहुल गांधी ने (शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में) अपने जवाब में किया था.’’ महंगाई समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध के कारण संसद के मानसून सत्र में कार्यवाही बार-बार स्थगित होने की वजह से पर्याप्त काम नहीं हो पाने के मद्देनजर चिदंबरम ने कहा कि वह इस ‘‘दुखदायी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि संसद निष्क्रिय हो चुकी है.’’ उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र बड़ा कारण यह है कि सत्ता पक्ष की संवाद और चर्चा में ‘‘कोई दिलचस्पी’’ नहीं है.

चिदंबरम ने संसद में महंगाई पर चर्चा के दौरान दिए गए उस जवाब के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में मंदी का कोई जोखिम नहीं है, क्योंकि इसके वृहत आर्थिक बुनियादी सिद्धांत ‘‘पूरी तरह उत्कृष्ट’’ हैं.
उन्होंने कहा कि विपक्ष में से किसी ने भी आसन्न मंदी या मुद्रास्फीति के कारण मंदी पैदा होने का जिक्र ही नहीं किया.

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