‘परीक्षा पे चर्चा’ के सातवें संस्करण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किये 25 मंत्र

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 29 Jan 2024 09:59 PM
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) के सातवें संस्करण के दौरान यहां भारत मंडपम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की. देश भर से लगभग 2.26 करोड़ विद्यार्थी डिजिटल और भौतिक रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए. प्रधानमंत्री ने छात्रों को आयोजन स्थल यानी भारत मंडपम के महत्व को समझाया और उन्हें जी20 शिखर सम्मेलन के बारे में बताया जहां पिछले दिनों दुनिया के सभी प्रमुख नेता इकट्ठे हुए थे और दुनिया के भविष्य पर चर्चा की थी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के सातवें संस्करण के दौरान निम्नलिखित 25 मंत्र साझा किये:

1- माता-पिता को अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को उनका विजिटिंग कार्ड नहीं बनाना चाहिए.

2-सही समय जैसी कोई चीज नहीं है, इसलिए उसका इंतजार न करें.

3-बच्चों को सामर्थ्यवान बनाना चाहिए और उन्हें दबावों से मुकाबला करने में मदद करनी चाहिए.

4-छात्रों और शिक्षकों के बीच का नाता केवल परीक्षा के कालखंड का नहीं, बल्कि पहले दिन से ही प्रगाढ़ होना चाहिए

5-निर्णय आधारित फैसले लेने की सहायता के साथ प्रौद्योगिकी और मोबाइल फोन का प्रभावी उपयोग करें.

6-स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय, नींद के समय को नष्ट कर देता है, मैं बिस्तर पर लेटते ही 30 सेकंड के भीतर सो जाता हूं.

7-अपने बच्चों के बीच कभी प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता के बीज न बोएं, बल्कि भाई-बहन एक-दूसरे के लिए प्रेरणा स्रोत बनें.

8-शिक्षक नौकरी की भूमिका में नहीं हैं बल्कि वे छात्रों का जीवन संवारने की जिम्मेदारी निभाते हैं.

9-यदि लाखों चुनौतियां हैं, तो अरबों समाधान भी हैं.

10-खुद से प्रतिस्पर्धा करें, मित्रों से नहीं.

11-अंतिम क्षणों तक तैयारी न करें, अवांछित तनाव से बचने के लिए शांत दिमाग के साथ परीक्षा दें.

12-असफलताओं से निराशा नहीं होनी चाहिए. हर गलती एक नई सीख है.

13- जब कोई स्वार्थ न हो तो निर्णय में कभी भ्रम नहीं होता.

14- छात्रों, परिवारों और शिक्षकों को एक व्यवस्थित सिद्धांत को लागू करने के बजाय प्रक्रिया विकसित करते हुए सामूहिक रूप से बाहरी तनाव के मुद्दे का समाधान करना चाहिए.

15-परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना कोई शून्य-संचय खेल नहीं है.

16-दोस्ती कोई लेन-देन वाली भावना नहीं, अपने दोस्तों की सफलता पर भी खुशी मनाएं.

17-अभिभावकों के अति उत्साह या छात्रों के अत्यधिक गंभीर होने के कारण होने वाली गलतियों से बचने की जरूरत पर जोर दिया.

18-परिवारों में विश्वास की कमी को दूर करने की जरूरत है.

19-अभिभावक परीक्षा के दिन को नए कपड़ों, रीति-रिवाजों या स्टेशनरी के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें.

20. प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां जीवन में प्रेरणा का काम करती हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए.

21-घरों में ‘नो गैजेट जोन’ बनाएं.

22-परिवार के सदस्यों के बीच पारर्दिशता बनाएं, उनके साथ फोन के पासवर्ड साझा करें, रात्रिभोज के दौरान अपने पास कोई गैजेट न रखें.

23-मोबाइल फोन की तरह इंसानी शरीर को भी चार्ज करने की जरूरत होती है. 24-हमेशा ऐसे दोस्त बनाएं, जो ज्यादा समझदार और मेहनती हों. आप ऐसे दोस्तों से प्रेरित होते हैं.

25-कंप्यूटर और फोन के कारण लिखने की आदत कम हो रही है. लिखने की आदत बनाए रखें.

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