लंदन. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का ताबूत बुधवार को अंतिम यात्रा पर लंदन के बकिंघम पैलेस से संसद भवन के लिए निकला जहां उसे वेस्टमिंस्टर हॉल में ‘लाइंग-इन-स्टेट’ में रखा जाएगा और उसके बाद सोमवार को वेस्टमिंस्टर एबे में महारानी का राजकीय तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा.
ताबूत को महाराजा की ट्रूप रॉयल हॉर्स आर्टिलरी की घोड़ों वाली तोपगाड़ी में रखा गया और स्थानीय समयानुसार अपराह्न 2:22 बजे पैलेस आॅफ वेस्टमिंस्टर तक का करीब दो किलोमीटर का रस्मी जुलूस शुरू हुआ. इसमें महाराजा चार्ल्स तृतीय और उनके बेटे प्रिंस विलियम तथा प्रिंस हैरी भी शामिल हुए और ताबूत के साथ में चलते रहे. इस दौरान हाइड पार्क और बिग बेन से तोपों की सलामी दी गयी.
महारानी की अन्य संतान प्रिंसस एनी और प्रिंस एंड्रयू तथा प्रिंस एडवर्ड भी तोपगाड़ी के पीछे चल रहे थे. टेम्स नदी के पास से गुजरने वाले इस जुलूस के मार्ग में हजारों लोग कतारबद्ध खड़े थे. वेस्टमिंस्टर हॉल में कैंटरबरी के आर्चबिशप मोस्ट रेवरेंड जस्टिन वेल्बी ताबूत को लेंगे और एक संक्षिप्त प्रार्थना सेवा की जाएगी. इसमें वेस्टमिंस्टर के डीन, वैरी रेवरेंड डॉ डेविड हॉयले भी शामिल होंगे और साथ ही शाही परिवार के अन्य सदस्य रहेंगे. इसके बाद ताबूत को एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर रखा जाएगा.
अंतिम संस्कार से पहले ‘लाइंग-इन-स्टेट’ चरण शुरू होगा और अनेक अधिकारी निगरानी रखेंगे. इस दौरान महारानी के ताबूत को चार दिन के लिए इस अवस्था में रखा जाएगा और लोग उनकी अंतिम झलक पा सकेंगे. वेस्टमिंस्टर हॉल दिवंगत महारानी की एक झलक पाने के लिए सोमवार शाम से इंतजार में खड़े हजारों लोगों के लिए स्थानीय समयानुसार शाम पांच बजे खुलेगा.
ताबूत यात्रा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही बकिंघम पैलेस के बाहर ‘द मॉल’ पर और टेम्स नदी के किनारे हजारों लोग जुटे थे.
यह भीड़ महारानी के प्रति सम्मान और उनके निधन पर देशभर में फैली शोक की लहर की ताजा झलक है. महारानी का बृहस्पतिवार को उनके बाल्मोरल स्थित ग्रीष्मकालीन आवास पर निधन हो गया. वह 96 वर्ष की थीं.
महारानी के अंतिम संस्कार से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां संभाल रहे मेजर जनरल क्रिस्टोफर घीका ने कहा, ‘‘यह बहुत दुखद दिन है, लेकिन यह महारानी के लिए हमारा कर्तव्य अदा करने का आखिरी मौका है, वहीं महाराजा के लिए कुछ करने का हमारा पहला अवसर है. हमारे लिए यह बहुत सम्मान की बात है.’’
महारानी एलिजाबेथ के ताबूत को लंदन ले जाने वाले विमान पर 60 लाख लोगों की नजर थी
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताबूत को स्कॉटलैंड के एडिनबरा से लंदन ले जाने वाले ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स ट्रांसपोर्ट विमान पर करीब 60 लाख लोग नजर रखने की कोशिश कर रहे थे, जिससे यह इतिहास में सबसे अधिक ट्रैक की जाने वाली उड़ान बन गई. वेबसाइट फ्लाइटरडार24 ने बुधवार को यह जानकारी दी.
महारानी का ताबूत मंगलवार शाम को आरएएफ ग्लोबमास्टर सी-17 विमान से एडिनबरा के सेंट गाइल्स चर्च से यहां लाया गया था.
इससे पिछला रिकॉर्ड 22 लाख लोगों द्वारा विमान को ट्रैक करने का था. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलौसी को पिछले महीने ताइवान लेकर आ रहे अमेरिकी सैन्य विमान को फ्लाइटरडार24 पर तब 22 लाख लोग देख रहे थे.
वेबसाइट ने कहा कि मंगलवार को एडिनबरा से आरएएफ नॉर्थोल्ट जा रहे ब्रिटिश सैन्य विमान के उड़ान भरने के पहले ही मिनट के दौरान करीब 60 लाख लोगों ने उसे ट्रैक करने की कोशिश की. भारी संख्या में लोगों के एक साथ विमान को ट्रैक करने की कोशिश के कारण साइट पर व्यवधान उत्पन्न हुआ. वेबसाइट पर उपयोगकर्ता हवा में विमानों के पथ पर नजर रख सकते हैं.
बीबीसी की खबर के मुताबिक 47.9 लाख लोग उसकी वेबसाइट व ऐप देख रहे थे जबकि 2.96 लाख लोग यूट्यूब पर किए जा रहे प्रसारण को देख रहे थे. उड़ान ने कॉलसाइन ‘‘किटीहॉक’’ का इस्तेमाल किया. यह उस सैन्य उड़ान के लिये इस्तेमाल होता है जिसमें महारानी बैठी हों. फ्लाइटरडार24 ने कहा कि उसने विमान के उड़ान भरने से पहले अपने मंच को यथासंभव स्थिर बनाने के लिए कदम उठाए थे.