मुंबई: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के कदमों पर दोनों निर्वाचन आयुक्तों के कई बार आपत्ति जताने संबंधी मीडिया की एक खबर के बाद शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने बुधवार को दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार “जेल जाएंगे”।
खबर में दावा किया गया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के क्रियान्वयन के दौरान 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कदमों पर 14 बार आपत्ति जताई। खबर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुमार ने निर्वाचन आयोग की “विश्वसनीयता को नष्ट” कर दिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे! उन्हें जाना ही होगा! उनके आका देश छोड़कर भाग जाएंगे!” राउत ने नयी दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में लोकतंत्र को बचाने की एक प्रतिशत भी इच्छा है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ”ज्ञानेश कुमार को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर मोदी जी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो मैं राष्ट्रपति से अपील करता हूं कि वे सीईसी को बर्खास्त करें।” उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति कुछ नहीं करती हैं, तो लोकतंत्र और देश को बचाने के लिए सेना प्रमुख को आगे आना चाहिए। राज्यसभा सदस्य ने यह भी मांग की कि न्यायपालिका को मीडिया में आई खबर का संज्ञान लेना चाहिए।
राउत ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) में तीन आयुक्त होते हैं। सुखबीर ंिसह संधू और विवेक जोशी ने शिकायत की कि उन्होंने 10 महीनों में 14 आपत्तियां उठाईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया, खासकर एसआईआर के फॉर्म 6 और दूसरे मुद्दों के मामले में।
राउत ने कहा, “फिर भी ज्ञानेश कुमार ने इसे आगे बढ़ाया। कैबिनेट सचिव से शिकायत की गई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार ने “अमित शाह के कहने पर यह देशद्रोह” किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक साजिश की वजह से भाजपा ने पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनाव जीते। महाराष्ट्र में भी भाजपा ने कुमार की वजह से ही विधानसभा चुनाव जीता।
गौर करने वाली बात है कि जब नवंबर 2024 में महाराष्ट्र में चुनाव हुए थे, तब कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं थे। राउत ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बात करते हुए दावा किया कि संधू और जोशी ने कुमार के खिलाफ “बगावत” कर दी है। उन्होंने कहा, “देश सुखबीर संधू और विवेक जोशी का आभारी है। उन्होंने देश के सामने ज्ञानेश कुमार का मुखौटा उतार दिया है। उन्होंने गृह मंत्रालय का भी मुखौटा उतार दिया है। जिस तरह से लोग चुनाव जीतते आ रहे हैं और बेईमानी से काम कर रहे हैं।” राउत ने आरोप लगाया, “दस महीनों में इन दो चुनाव आयुक्तों ने 14 आपत्तियां जताई हैं। यह मामला कैबिनेट सचिव और अमित शाह तक पहुंचा था; अमित शाह ने इसे दबा दिया।” शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे ने दावा किया कि ईसीआई ने भारत को “दुनिया का सबसे बड़ा पूर्व लोकतंत्र” बना दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक पार्टी के एजेंट के तौर पर काम करते हुए, भारत के लोकतंत्र को खत्म करने के लिए उन्होंने लाखों भारतीयों के मतदान के अधिकार छीन लिए हैं। ठाकरे ने आरोप लगाया, “भारत की आजादी के समय जो सफर ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ (चुनाव) से शुरू हुआ था, उसे इस संस्था ने अब चुंिनदा मतदाता सूची तक सीमित कर दिया है। यह संस्था, जो कभी निष्पक्ष हुआ करती थी, अब पूरी तरह से धोखाधड़ी का अड्डा बन चुकी है।”