सुक्खू ने सिंघवी की हार की जिम्मेदारी ली है, हिमाचल संकट खत्म हो गया है: डी.के. शिवकुमार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 29 Feb 2024 10:00 PM
सुक्खू ने सिंघवी की हार की जिम्मेदारी ली है, हिमाचल संकट खत्म हो गया है: डी.के. शिवकुमार
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शिमला.  कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक डी.के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के नेता अभिषेक मनु सिंघवी की हार की जिम्मेदारी ली है और हर विधायक से व्यक्तिगत रूप से बात करने के बाद मतभेद दूर कर लिए गए हैं.

पार्टी पर्यवेक्षक भूपेन्द्र हुड्डा के साथ यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे शिवकुमार से पूछा गया कि क्या सुक्खू मुख्यमंत्री बने रहेंगे तो उन्होंने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी. जब पत्रकारों ने जोर देकर यह सवाल पूछा कि क्या सुक्खू मुख्यमंत्री बने रहेंगे तो उन्होंने कहा, “जब सुक्खू मुख्यमंत्री हैं तो आप काल्पनिक सवाल क्यों पूछ रहे हैं.” शिवकुमार ने यह भी कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने सुक्खू, पार्टी विधायकों और प्रदेश इकाई की प्रमुख प्रतिभा सिंह से बात की है और सभी मतभेद दूर कर लिए गए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि सभी आंतरिक मामलों को सुलझाने के लिए एक समन्वय समिति बनाने का निर्णय लिया गया है और कोई भी नेता प्रेस से बात नहीं करेगा. पर्यवेक्षकों ने कहा कि लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह शाम को कैबिनेट बैठक में भाग लेंगे.
सिंह ने बुधवार को इस्तीफे की पेशकश की थी और बाद में कहा था कि वह अपने इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए दबाव नहीं डालेंगे.
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस की पहली प्राथमिकता अनुशासन बनाए रखना है, सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया है और पार्टी के सभी विधायकों और अन्य नेताओं ने मिलकर काम करने का संकल्प लिया है.

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कांग्रेस के उन छह विधायकों को अयोग्य करार दिया है, जिन्होंने राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए हाल ही हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया था. इससे पहले कांग्रेस नेताओं की चिंताएं बढ़ा रहीं प्रतिभा सिंह ने कहा कि अगर बागी विधायकों की शिकायतें दूर कर दी गई होतीं तो छह विधायकों की अयोग्यता को टाला जा सकता था.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव हार गई. हिमाचल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पार्टी मजबूत है और मतभेदों को सुलझा लिया गया है. उन्होंने कहा कि समिति राज्य सरकार और संगठन के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी. उन्होंने कहा, “चुनौती लोकसभा चुनाव में सभी चार सीट जीतने की है, जिसके लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी.” सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार स्थिर है और पांच साल तक चलेगी.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले बागी विधायक जनता का सामना नहीं कर पाएंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि “ये विधायक हमारे भाई हैं और अगर वे वापस आना चाहते हैं तो गलतियों को माफ किया जा सकता है, लेकिन हम उनसे संपर्क करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके मोबाइल फोन पर बात नहीं हो पा रही है.”

हिमाचल में सरकार बचाने में प्रियंका गांधी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर आए संकट को टालने और सरकार बचाने में ‘महत्वपूर्ण’ भूमिका निभाई. सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘ऑपरेशन लोटस’ को विफल करने के लिए प्रियंका गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ निरंतर संपर्क में बनी रहीं.
सूत्रों ने प्रियंका गांधी की भूमिका का उल्लेख ऐसे समय किया जब पार्टी ने आधिकारिक रूप से कहा है कि हिमाचल प्रदेश में अब स्थिति उसके नियंत्रण में है और सरकार अस्थिर करने का भाजपा का प्रयास विफल रहा.

पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ”राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल प्रदेश में जिस तरह से कांग्रेस विधायकों ने बगावत की, उससे लग रहा था कि एक और राज्य कांग्रेस के हाथ से निकल जाएगा. लेकिन पार्टी आलाकमान ने सक्रियता और सख्ती दिखाई, इससे न सिर्फ कांग्रेस का संकट टल गया, बल्कि सरकार भी बच गई.” सूत्रों का दावा है कि भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में सरकार गिराने की ‘पूरी साजिश’ रची थी लेकिन जैसे ही बगावत की भनक लगी तो आलाकमान सक्रिय हो गया.

सूत्रों ने कहा, ”पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी तुरंत सक्रिय हो गईं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ खुद मोर्चा संभाल लिया. वरिष्ठ नेताओं भूपिंदर सिंह हुड्डा, डीके शिवकुमार और भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया और सख्त निर्देश दिए गए कि उन्हें सभी को साथ लेकर चलना है.” सूत्रों ने बताया कि प्रियंका गांधी पार्टी अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सभी महत्वपूर्ण नेताओं से लगातार संपर्क में बनी रहीं.

प्रियंका गांधी 2022 में हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अभियान का चेहरा थीं. वह पहले भी कांग्रेस के लिए ”संकटमोचक” की भूमिका निभा चुकी हैं. हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एकमात्र सीट पर हुए मतदान में कांग्रेस के छह विधायकों द्वारा ‘क्रॉस वोटिंग’ किये जाने के बाद भाजपा ने जीत हासिल की थी और उसके बाद राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था. विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बृहस्पतिवार को इन छह विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. विधायकों ने सदन में वित्त विधेयक पर सरकार के पक्ष में मतदान करने के पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया था.

हिमाचल में विधायकों की अयोग्यता टाली जा सकती थी : प्रतिभा सिंह
कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई की प्रमुख प्रतिभा सिंह ने कहा कि अगर बागी विधायकों की शिकायतों का समय पर समाधान कर दिया गया होता तो उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को टाला जा सकता था. प्रतिभा सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ घंटे पहले ही हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव में ‘क्रॉस वोटिंग’ करने के लिए बृहस्पतिवार को छह कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया.

राज्य के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की मां प्रतिभा सिंह ने कहा कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने से 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि असंतुष्ट विधायक पिछले एक साल से अधिक समय से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बार-बार पार्टी की जीत के लिए कड़ी मेहनत करने वाले संगठन के सर्मिपत नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करने का दबाव बना रही थीं. उन्होंने इससे पहले कहा था कि पार्टी नेता और विधायक नाखुश हैं, क्योंकि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया जा रहा है.

इस बीच, विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने राज्य में मौजूदा राजनीतिक संकट के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया.
जयराम ठाकुर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने सदन के अंदर और सार्वजनिक मंचों पर भी अपना दर्द बयां किया था. ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने भी सिर्फ आश्वासन दिया है और मुद्दे का समाधान नहीं किया है.

ठाकुर ने कहा कि कटौती प्रस्तावों पर मत विभाजन की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधानसभा में बहुमत खो दिया है और बजट पारित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आम जनता का विश्वास खो चुकी है. इससे पहले सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षकों भूपिंदर सिंह हुड्डा और डी के शिवकुमार की मौजूदगी में पार्टी विधायकों के साथ नाश्ते पर बैठक की. शिवकुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ” हम सभी विधायकों की बात को सुन रहे हैं और सरकार को कोई दिक्कत नहीं है.”

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