बारिश से रावण के पुतले भीगे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 01 Oct 2025 10:03 PM
बारिश से रावण के पुतले भीगे
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नयी दिल्ली/जयपुर. दशहरे से एक दिन पहले अचानक हुई बारिश ने दिल्ली और जयपुर सहित उत्तर भारत के कई इलाकों में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बनाने वाले कारीगरों की मेहनत पर पानी फेर दिया. बारिश से सैकड़ों पुतले भीग गए और कारीगरों को भारी नुकसान हुआ. दो दिन पहले तक कारीगर पुतलों को अंतिम रूप दे कर उन्हें ट्रकों के माध्यम से दशहरा कार्यक्रम स्थलों तक भेजने की तैयारी कर रहे थे लेकिन बुधवार को कारीगरों के चेहरे मायूस नजर आए.

पश्चिमी दिल्ली के तीतारपुर बाजार के अनुभवी पुतला निर्माता महेंद्र पाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हम साल भर इंतजार करते हैं और एक महीने से ज्यादा दिन-रात काम करते हैं लेकिन इस बारिश ने बड़ा नुकसान कर दिया है.” करीब 75 वर्षीय पाल पिछले 50 साल से इस धंधे में हैं. उन्होंने इस बार 25 से ज्यादा पुतले बनाए थे जिनमें से 10 से अधिक बारिश के कारण खराब हो गए.

उन्होंने कहा, ”प्राकृतिक आपदाओं में जैसी मदद दी जाती है, ठीक उसी तरह ही हमें भी मदद दी जानी चाहिए. हम जिला मजिस्ट्रेट, दिल्ली सरकार, मुख्यमंत्री, केंद्र और हमारे स्थानीय जनप्रतिनिधियों से हमें सहायता देने की अपील करते हैं.” एशिया का सबसे बड़ा रावण पुतला बाजार माना जाने वाला दिल्ली का तीतारपुर, जयपुर के व्यस्त गोपालपुरा बाइपास स्थित ‘रावण मंडी’ से कई किलोमीटर दूर है. लेकिन तस्वीर दोनों जगह एक जैसी है-टूटे-फूटे और भीगे पुतलों के धड़, हाथ-पैर और बांस की चौखटें सड़कों के किनारे बिखरी पड़ी हैं. पुतलों का रंग धुल चुका है और कारीगरों को पुतलों को फिर से तैयार करने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

जयपुर में गुर्जर की ढाणी के पास काम करने वाले कारीगर गोर्धन ने कहा कि उनके परिवार द्वारा बनाए गए सभी बड़े पुतले बारिश में खराब हो गए और अब पुतलों को एक दिन में ठीक करना संभव नहीं है. उन्होंने बताया, ”हम अब छोटे पुतलों पर ध्यान दे रहे हैं जिन्हें हमने टेंट के नीचे सुरक्षित रखा था.” तीतारपुर के एक और कारीगर सतपाल राय का कहना है कि उनका नुकसान लाखों रुपये का है. वहीं, जयपुर के बजू ने करीब 200 पुतले बनाने के लिए एक लाख रुपये उधार लिया था लेकिन अब उन्हें लाख रूपये की कमाई की उम्मीद भी नहीं दिख रही.

अधिकतर पुतला बनाने वाले मजदूर वर्ग से आते हैं और त्योहारी सीजन में कुछ अतिरिक्त कमाई की उम्मीद में यह काम करते हैं.
तीतारपुर के एक अन्य विक्रेता अजय ने बताया, ”मैंने 51 पुतले बनाए थे. इनमें से सिर्फ 22 ही पहुंचा पाए हैं बाकी बारिश से खराब हो गए. अब जितना हो सके पुतलों को दोबारा ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन समय बहुत कम है. हमारे लिए त्योहार बर्बाद हो गया.” बाजारों में खरीदार अब भी घूम-घूमकर पुतलों का मुआयना कर रहे हैं. कई लोग टूटे-फूटे पुतलों पर मोलभाव करते नजर आ रहे हैं, तो कुछ सबसे बेहतर पुतला तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

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