तिब्बतियों ने भारत, अन्य देशों से पंचेन लामा के ठिकाने का पता बताने के लिए चीन पर दबाव देने को कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 25 Apr 2024 09:19 PM
तिब्बतियों ने भारत, अन्य देशों से पंचेन लामा के ठिकाने का पता बताने के लिए चीन पर दबाव देने को कहा
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धर्मशाला. निर्वासित तिब्बती सरकार ने बृहस्पतिवार को भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों से कहा कि पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यीमा का पता-ठिकाना बताने के लिए चीन पर दबाव डाला जाए. उसने लगभग 29 साल पहले चीन में न्यीमा के लापता होने की जांच के लिए एक स्वतंत्र तथ्यान्वेषी आयोग को अनुमति देने को भी कहा. यह मांग हिमाचल प्रदेश के इस शहर में चोएक्यी न्यीमा की 35वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में की गई. दलाई लामा द्वारा न्यीमा को छह वर्ष की उम्र में पंचेन लामा बनाने की घोषणा के ठीक तीन दिन बाद वह गायब हो गए थे.

तिब्बत के शीर्ष नेताओं द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में अन्य देशों की सरकारों और संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया गया है कि वे चीन में अपने राजदूतों को 11वें पंचेन लामा से मिलने और उनके ठिकाने तथा कुशलक्षेम का पता लगाने का निर्देश दें. पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध धर्म में दूसरा सबसे बड़ा पद है. तिब्बत की निर्वासित सरकार के ‘सिक्योंग’ या राजनीतिक प्रमुख पेनपा सेरिंग ने सैकड़ों तिब्बतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कहा, ”हमारी सबसे बड़ी चिंता है कि पंचेन अब जीवित हैं या नहीं.”

उन्होंने कहा, ”अगर उन्हें जीवित मान लिया जाए तो क्या उन्हें पिछले 29 साल से उनके माता-पिता के साथ पाला-पोसा गया है या उन्हें किसी सुदूरवर्ती ऐसी जगह पर रखा गया जहां कोई तिब्बती भाषा में बोल भी नहीं सकता? उनके आसपास रहने वाले कितने लोगों ने उनके साथ बुरा बर्ताव और उन्हें प्रताड़ित किया होगा?” सेरिंग ने चीन की सरकार पर पंचेन लामा के मूलभूत मानवाधिकारों और आजादी का घोर उल्लंघन करने का आरोप लगाया. दलाई लामा ने चोएक्यी न्यीमा को मई 1995 में 11वें पंचेन लामा के तौर पर मान्यता दी थी. चीन ने इस कदम का विरोध करते हुए अपने खुद के पंचेन लामा के तौर पर ग्यालत्सेन नोरबू को पदासीन किया था.

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