छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) में बाढ़ और भारी बारिश से तबाह हुई फसलों के मुआवजे तथा कर्ज माफी की मांग को लेकर किसानों और विभिन्न संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया है।
किसान संगठनों (जैसे भारतीय किसान यूनियन) ने फसल के नुकसान के लिए ₹65,100 प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है, जिसका आधार 21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन और ₹3,100 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य को बनाया गया है।
बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों के चलते किसान ऋण चुकाने में असमर्थ हैं, इसलिए सहकारी समिति, बैंक और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने की मांग की गई है।
बाढ़ में बेघर हुए परिवारों के लिए क्षतिग्रस्त मकानों के सर्वे के बाद ₹1.20 लाख से ₹5 लाख तक की आवासीय सहायता, मुख्यमंत्री राहत कोष की तात्कालिक सहायता को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 करने और प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता देने की मांग उठी है।
विपक्ष और संगठनों की कार्रवाई: कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर NH-30 पर चक्काजाम किया और प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन, इंद्रावती बचाओ मंच और अन्य स्थानीय संगठनों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है.
बस्तर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि बीते दिनों बस्तर में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। कई लोगों के मकान ढह गए और हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। इसके बावजूद प्रभावितों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस और किसान संगठनों ने प्रभावितों के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
बाढ़ प्रभावित किसानों को 65 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
खेती के लिए किसानों द्वारा लिए गए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन को माफ किया जाए।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों के लिए 3 लाख रुपये दिए जाएं।
क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख रुपये दिए जाएं।
बाढ़ में बह गए मवेशियों के लिए 60 हजार रुपये की सहायता दी जाए।
Watch Video