भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है। हालांकि, प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें हर मुकाबले में प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिली। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बताया कि उन्होंने खुद वैभव से इस बारे में बातचीत की थी और उन्हें समझाया था कि कई बार खिलाड़ी को अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है।
गंभीर ने स्पष्ट किया कि प्लेइंग-11 का फैसला टीम की जरूरत और मैच जीतने की क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में मौजूद खिलाड़ियों, कोच और कप्तान को यह तय करना होता है कि किसी मुकाबले के लिए सबसे बेहतर टीम संयोजन क्या है। उन्होंने कहा, ‘यह इस बात पर निर्भर करता है कि ड्रेसिंग रूम में कौन है या कोच और कप्तान किसे महसूस करते हैं कि वह हमें मैच जिता सकता है। साथ ही यह भी देखना होता है कि लंबे समय से किसने अच्छा प्रदर्शन किया है।’ गंभीर ने यह भी बताया कि वैभव को खिलाने का मतलब किसी ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना होगा जिसने पिछले डेढ़ से दो साल में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
गंभीर ने कहा, ‘अगर वैभव आज खेलता है तो मेरे और उस खिलाड़ी के बीच मुश्किल बातचीत होगी जिसे बाहर करना पड़ेगा, चाहे वह अभिषेक हो या संजू। हम अचानक उस संयोजन को नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसने पिछले डेढ़ या दो साल में इतना प्रभाव डाला है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘तीन या चार मैचों में असफल होने के बाद हम उन्हें बाहर करके ऐसे युवा खिलाड़ी को नहीं खिला सकते जो बहुत प्रतिभाशाली है और अच्छी फॉर्म में भी है। इसलिए कभी-कभी आपको अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है। हम ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना चाहते हैं।’
वैभव ने इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। 15 साल और 99 दिन की उम्र में वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बने और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ा। इसके बाद उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल और 118 दिन की उम्र में पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया।
हालांकि अफगानिस्तान सीरीज और एशियाड से पहले जापान के खिलाफ एकमात्र टी20 मुकाबले में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में वापसी करते हुए उन्होंने 21 गेंदों पर 38 रन बनाए। फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ वैभव ने नौ गेंदों पर 15 रन बनाए। भारत ने यह मुकाबला 19 रन से जीतकर स्वर्ण पदक बरकरार रखा। 15 साल, छह महीने और छह दिन की उम्र में वैभव एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय भी बने। उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा।