छत्तीसगढ़ में तेंदुओं की संख्या में गिरावट को लेकर वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 03 Mar 2024 07:44 PM
छत्तीसगढ़ में तेंदुओं की संख्या में गिरावट को लेकर वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
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रायपुर. एक नई रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में तेंदुओं की संख्या में गिरावट होने की जानकारी सामने आने के बाद वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन की अपील की है. रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में तेंदुओं की संख्या 2018 में 852 से घटकर 2022 में 722 होने की बात सामने आई है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 29 फरवरी को जारी एक रिपोर्ट में तेंदुओं की संख्या और अधिवास में गिरावट के प्रमुख कारणों में से एक अवैध शिकार है.

तेंदुओं की संख्या में गिरावट पर चिंता जताते हुए वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने अवैध शिकार को रोकने, लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन के उपाय करने का आह्वान किया है. यह रिपोर्ट राज्य वन विभागों के सहयोग से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए तेंदुए की आबादी के आकलन पर आधारित है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ”छत्तीसगढ़ में 2022 में तेंदुओं की अनुमानित संख्या 722 है, जबकि 2018 में यह संख्या 852 थी, जिससे गिरावट का पता चलता है.” इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में 55,717 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 41.21 प्रतिशत है.

उत्तरी छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान-तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य स्थित है, जो मध्य प्रदेश के जंगलों के माध्यम से अचानकमार बाघ अभयारण्य से जुड़ा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, अचानकमार, उदंती-सीतानदी और इंद्रावती बाघ अभयारण्यों में क्रमश? 76, 28 और तीन तेंदुओं की अनुमानित संख्या है, जबकि इन क्षेत्रों का उपयोग करने वाले तेंदुओं की संख्या क्रमश? 108, 52 और तीन है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अचानकमार बाघ अभयारण्य में तेंदुए का घनत्व 7.19 प्रति 100 वर्ग किमी था, जो 2018 के पिछले अनुमान से बहुत अलग नहीं है. उदंती-सीतानदी बाघ अभयारण्य के उप निदेशक वरुण जैन ने कहा कि वन र्किमयों ने वन्यजीवों की निगरानी के लिए अभयारण्य में पैदल गश्त बढ़ा दी है और एक अवैध शिकार रोधी टीम अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सूचना नेटवर्क को मजबूत करने पर सक्रिय रूप से काम कर रही है.

जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर अवैध शिकार भी तेंदुओं की संख्या में गिरावट का एक मुख्य कारण है. उन्होंने कहा, ”ओडिशा विशेष कार्यबल ने पिछले साल तेंदुए की 30 से अधिक खाल जब्त की थीं. हमने एक अवैध शिकार रोधी टीम तैनात की है और अपने मुखबिरों के नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. पिछले एक साल में हमारी शिकार रोधी टीम ने 120 लोगों को गिरफ्तार किया है.”

बिलासपुर के वन्यजीव संरक्षणवादी मंसूर खान ने कहा कि जंगली सूअर और अन्य छोटे जानवरों का शिकार करने के लिए ग्रामीणों द्वारा बिछाए गए बिजली के तार तेंदुए की मौत के मुख्य कारणों में से एक थे. उन्होंने कहा कि नियमित गश्त और वन्यजीवों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने से इन समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी. वन्यजीव कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने राज्य में तेंदुओं की संख्या में गिरावट के लिए अवैध शिकार को एक प्रमुख कारण बताया.

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