राहुल गांधी की दोषसिद्धि से जुड़े मामले पर बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करेंगे: सिंघवी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 12 Jul 2023 09:14 PM
राहुल गांधी की दोषसिद्धि से जुड़े मामले पर बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करेंगे: सिंघवी
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को कहा कि ”मोदी उपनाम” वाली टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की याचिका गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद अब इस विषय में बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी.

सिंघवी ने इससे जुड़े एक सवाल पर संवाददाताओं से कहा, ”बहुत बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करेंगे. (याचिका) तैयार की जा रही है. शीघ्र ही इसे दाखिल किया जाएगा. इसके बाद उस पर जिरह होगी.” कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय का रुख किया जाएगा. गुजरात उच्च न्यायालय ने मोदी उपनाम वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध गत सात जुलाई को खारिज कर दिया था.

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर 2019 के मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी. फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे.

पीएमएलए में जीएसटीएन से संबंधित संशोधन का फैसला विरोधियों को डराने का कदम: कांग्रेस

कांग्रेस ने धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2022 में जीएसटी नेटवर्क से संबंधित संशोधन के फैसले को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि यह ‘टैक्स टेररिज्म (कर लगाकर परेशान करने)’ को बढ़ावा देने की तरह है. पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने की नीयत से यह फैसला किया है.

वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2022 में संशोधन किया है. इसके तहत जीएसटी की प्रौद्योगिकी इकाई संभालने वाली जीएसटीएन को उन इकाइयों में शामिल कर लिया गया है, जिनके साथ ईडी सूचना साझा कर सकता है.

सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ”मोदी सरकार एक साथ दो निशाने साधना चाहती है. पहला तो बाजार की कमर तोड़ना और दूसरा विपक्ष के अंगों को मरोड़ना. 7 जुलाई से पीएमएलए को जीएसटी से संबंधित विषयों में लागू किया गया. बहाना दिया गया है कि ये देश के लिए जरूरी है. 9 राज्यों ने इसका विरोध क­यिा, इसके बाद भी इसे लागू किया गया.” उन्होंने दावा किया, ”चुनाव आ रहे हैं, इसल­िए सरकार ने सोचा क­ि अपने प्रतिद्वंदी को कैसे डराया जाए. इस सोच के साथ जीएसटी को पीएमएलए के दायरे में लाया गया है. यह केंद्र सरकार का नया औजार है.”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार द्वारा ‘टैक्स टेररिज्म’ बढ़ावा देने की तरह है. सिंघवी ने सवाल किया, ”यह नई अधिसूचना बिना विचार विमर्श के कैसे और क्यों आई? क्या इसका कारण सरकार के डर और भय को व्यापक बनाना है? क्या ये छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापार पर नियंत्रण करने का नया तरीका है? क्या इसका विशेष संदेश सिर्फ विपक्ष के लिए होगा? जीएसटी को पीएमएलए के दायरे में लाने की अचानक जरूरत क्यों पड़ी?” उन्होंने कहा कि सरकार ने इस फैसले के पीछे जो वजह बताई हैं वही कारण उसने नोटबंदी के समय बताए थे, लेकिन नतीजा क्या निकला, सबको पता है.

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