प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती तो दो-तीन लाख वोटों से हारते प्रधानमंत्री मोदी : राहुल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 11 Jun 2024 07:38 PM
प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती तो दो-तीन लाख वोटों से हारते प्रधानमंत्री मोदी : राहुल
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रायबरेली. रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल के लोकसभा चुनाव में ‘नफरत, हिंसा और अहंकार के खिलाफ मतदान’ करने के लिये जनता को धन्यवाद देते हुए मंगलवार को दावा किया कि अगर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव लड़तीं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो-तीन लाख वोट से हार जाते.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल ने यहां ‘आभार सभा’ में कहा, ”इस चुनाव में हिंदुस्तान ने संदेश भेजा है कि हमें नरेन्द्र मोदी जी का विजन अच्छा नहीं लगता. हमें नफरत नहीं चाहिए, हमें हिंसा नहीं चाहिए. हमें मोहब्बत की दुकान चाहिए. हमें देश के लिए नया विजन चाहिए. अगर देश को नया विजन देना है तो उत्तर प्रदेश से ही देना होगा और उत्तर प्रदेश ने संदेश दिया है कि हम प्रदेश और देश में इंडिया गठबंधन, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को चाहते हैं.” राहुल ने अयोध्या की सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पराजय का जिक्र करते हुए कहा, ”जवाब अयोध्या की जनता ने दिया है. सिर्फ अयोध्या में ही नहीं,…. वाराणसी में भी प्रधानमंत्री जान बचाकर निकले हैं. मैं अपनी बहन (प्रियंका वाड्रा) से कह रहा हूं कि अगर यह वाराणसी में लड़ जातीं तो आज प्रधानमंत्री दो-तीन लाख वोट से वाराणसी का चुनाव हार जाते.”

उन्होंने कहा, ”मैं यह बात अहंकार से नहीं कह रहा हूं बल्कि इसलिए कह रहा हूं क्योंकि प्रधानमंत्री को जनता ने संदेश दिया है कि आपकी जो राजनीति है वह हमें अच्छी नहीं लगी. हम प्रगति चाहते हैं. आपने 10 साल इस देश में बेरोजगारी, नफरत और हिंसा फैलाई . जनता ने प्रधानमंत्री को जवाब दिया.” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”शुरुआत आपके (जनता के) दिल में हुई थी तभी आपने बदलाव लाया है. मैं दिल से आपका धन्यवाद करना चाहता हूं. आने वाले समय में मैं चाहता हूं कि जो देश के सामने सच्चे मुद्दे हैं… बेरोजगारी, महंगाई का मुद्दा, किसानों और मजदूरों का मुद्दा है… ये मुद्दे उठाए जाएं और गरीबों की मदद करने की राजनीति हो.” उन्होंने कहा कि जनता ने ही नकारात्मक राजनीति के खिलाफ पूरे देश में माहौल बनाया है, अवाम ने ही देश की राजनीति को बदल डाला है.

राहुल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संविधान को सिर माथे लगाये जाने का जिक्र करते हुए कहा, ”पहले मोदी जी कह रहे थे कि भगवान मुझे आदेश देते हैं और मैं काम करता हूं. पता नहीं कैसे उनके भगवान हैं… वह 24 घंटे अडाणी और अंबानी जी की मदद करते हैं. मगर आपने फोटो देखी होगी कि नरेन्द्र मोदी जी संविधान को सिर पर लगाए थे. यह सब आपने (जनता) उनसे करवाया है. देश के प्रधानमंत्री को आपने संदेश भेजा है कि अगर उन्होंने संविधान को छुआ तो आप उनके साथ क्या करेंगे.” राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों को अहंकार का शिकार नहीं बनने की हिदायत भी दी.

उन्होंने कहा, ”इंडिया गठबंधन के सभी साथी दल साथ खड़े हो गये हैं. देश की आत्मा को समझ में आ गया कि मोदी जी, अमित शाह जी हिंदुस्तान के संविधान को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. जो हिंदुस्तान की नींव है, उससे वे खिलवाड़ कर रहे हैं, इसलिए पूरा देश एक साथ खड़ा हो गया.” राहुल ने संसद में जनता के मुद्दों के लिये संघर्ष करने का वादा करते हुए कहा, ”आज हमारे पास संसद में सेना (विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) बैठी हुई है. इस बार हमारी पूरी कोशिश होगी कि विपक्ष के तौर पर हम अग्निवीर योजना को रद्द करायें.”

उन्होंने कहा, ”यह (लोकसभा चुनाव में समर्थन) आपने हमें राजनीतिक निर्णय नहीं दिया है बल्कि यह मोहब्बत का फैसला था और इस बात को मैं जिंदगी भर नहीं भूलने वाला हूं. अमेठी की जनता से भी कहना चाहता हूं. मैं रायबरेली से सांसद हूं लेकिन जो मैंने आपसे कहा था , जो भी रायबरेली में होगा वह अमेठी में भी होगा. आप सभी को मैं दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं. आपने हिंदुस्तान की राजनीति बदल दी आपने पूरे देश को संदेश दिया कि आप नफरत के खिलाफ हैं, आप देश की राजनीति बदलेंगे.”

बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे हैं: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई मंत्रिपरिषद के कई सदस्यों का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे हैं. उन्होंने यह दावा भी किया कि कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं.

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर जिन मंत्रियों के नाम साझा किए उनमें इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई अन्य नाम शामिल हैं. उन्होंने कहा, ”पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे. कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं.”

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