राज्य के कांकेर जिले में माओवादी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में भानुप्रतापपुर की विशेष एनआईए अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए से जुड़े प्रकरण में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों में पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम (35 वर्ष), निवासी इमलीपारा, कागबरस, थाना कोयलीबेड़ा; रमेश पुनेम उर्फ बुधरू (25 वर्ष), निवासी वड्डे पारा, पूसनार, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर और पुनऊ राम मंडावी (22 वर्ष), निवासी बिचपारा, गोमे शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 3,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव ने पैरवी की। यह प्रकरण 18 मई 2023 का है। जानकारी के अनुसार, कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की गतिविधियों की सूचना सुरक्षा बलों को मिली थी। इसके बाद सीओबी चिलपरस और ढूंट्टा से सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम को तलाशी अभियान के लिए रवाना किया गया था। अभियान के दौरान जवान कागबरस, नयापारा और चिलपरस के जंगलों में तलाशी लेते हुए केसोकोड़ी की ओर बढ़ रहे थे।
इसी दौरान पहाड़ी जंगल के नजदीक कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां दिखाई दीं। सुरक्षा बलों को देखते ही संदिग्ध भागने लगे। जवानों ने तत्काल इलाके की घेराबंदी की और तीनों को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, रमेश पुनेम उर्फ बुधरू और पुनऊ राम मंडावी के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, तलाशी लेने पर उनके कब्जे से वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी चिट्ठियां, नक्सली साहित्य, नकदी, गुलेल, टॉर्च और चाकू सहित अन्य सामग्री बरामद हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, तीनों को पकड़ने के दौरान सुरक्षा बलों की टीम पर हमला भी किया गया था। इस घटना में एक जवान के दाहिने हाथ में चोट आई थी। जवानों ने परिस्थितियों को नियंत्रित करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया और बरामद सामग्री जब्त की। Also Read – शहीद STF जवान के माता-पिता का आरोप, बहू को 84 लाख मिलने के बाद हुई बेपरवाह घटना के बाद कोयलीबेड़ा पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 08/2023 दर्ज किया गया। प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 और 307, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 38(2) और 39(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना अंतागढ़ के तत्कालीन एसडीओपी अमर सिदार ने की।