कांग्रेस ‘लेटरल एंट्री’ पर कर रही गुमराह: वैष्णव ने मनमोहन और अहलूवालिया का नाम लेते हुए कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 19 Aug 2024 10:46 PM
कांग्रेस ‘लेटरल एंट्री’ पर कर रही गुमराह: वैष्णव ने मनमोहन और अहलूवालिया का नाम लेते हुए कहा
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नयी दिल्ली/बीकानेर. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कांग्रेस पर वरिष्ठ नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ की सरकार की पहल पर भ्रामक दावे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कदम से अखिल भारतीय सेवाओं में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की भर्ती प्रभावित नहीं होगी. वैष्णव ने कहा कि नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ 1970 के दशक से कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान होती रही है और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मोंटेक सिंह अहलूवालिया अतीत में की गई ऐसी पहल के प्रमुख उदाहरण हैं.

मंत्री ने तर्क दिया कि प्रशासनिक सेवाओं में ‘लेटरल एंट्री’ के लिए प्रस्तावित 45 पद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की कैडर संख्या का 0.5 प्रतिशत हैं, जिसमें 4,500 से अधिक अधिकारी शामिल हैं और इससे किसी भी सेवा की सूची में कटौती नहीं होगी.
‘लेटरल एंट्री’ वाले नौकरशाहों का कार्यकाल तीन साल है जिसमें दो साल का संभावित विस्तार शामिल है.

वैष्णव ने कहा कि मनमोहन सिंह ने 1971 में तत्कालीन विदेश व्यापार मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में ‘लेटरल एंट्री’ से प्रवेश किया था और वित्त मंत्री बने और बाद में प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि इस रास्ते से सरकार में शामिल हुए अन्य लोगों में सैम पित्रोदा और वी कृष्णमूर्ति, अर्थशास्त्री बिमल जालान, कौशिक बसु, अरविंद विरमानी, रघुराम राजन और अहलूवालिया हैं. जालान सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार और बाद में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे.

विरमानी और बसु को भी क्रमश? 2007 और 2009 में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. राजन ने मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में भी काम किया और बाद में 2013 से 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्य किया. अहलूवालिया को शैक्षणिक और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से सरकारी भूमिकाओं में लाया गया था. उन्होंने 2004 से 2014 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया. वैष्णव ने कहा कि इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को 2009 में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का प्रमुख नियुक्त किया गया था.

मनमोहन सिंह, मोंटेक अहलूवालिया ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए आए थे: मेघवाल का राहुल गांधी पर पलटवार

केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर उनके इस दावे के लिए निशाना साधा कि सरकार ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए आरक्षण प्रणाली को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है. मेघवाल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 1976 में ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए ही वित्त सचिव बनाया गया था. मंत्री ने गांधी के इस आरोप को भी “निराधार” बताया कि इस तरीके से आरएसएस के लोगों को लोकसेवक के रूप में नियुक्त किया जाएगा.

मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को नियम बनाने का अधिकार देकर ‘लेटरल एंट्री’ प्रणाली को व्यवस्थित बनाया. उन्होंने कहा कि पहले शासन में इस तरह के प्रवेश के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं थी. उन्होंने बीकानेर में ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “जो भी नियुक्ति या भर्ती या चयन होना है, यूपीएससी करेगा. इसमें भाजपा, आरएसएस का मुद्दा कहां है? निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं.” मेघवाल ने कहा कि आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ.ावा देता है. मंत्री ने आरोप लगाया कि गांधी झूठ फैलाकर लोगों को गुमराह करने और यूपीएससी जैसी संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के झूठे आरोप लगा रहे हैं और ­वह अपने प्रयास में कभी सफल नहीं होंगे.

मेघवाल ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद संभालने के बावजूद गांधी गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं. मंत्री ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह भी ‘लेटरल एंट्री’ का हिस्सा थे. आपने 1976 में उन्हें सीधे वित्त सचिव कैसे बना दिया?” उन्होंने कहा कि तत्कालीन योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ‘लेटरल एंट्री’ के ज.रिए सेवा में आए थे.

मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का प्रमुख बनाया गया था. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक है. क्या एनएसी एक संवैधानिक संस्था है.” उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री से ऊपर रखा गया था. मंत्री ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1961 में आरक्षण का विरोध किया था और विपक्ष के नेता के रूप में राजीव गांधी ने लोकसभा में ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था.

मेघवाल ने कहा कि ये संविदा पद हैं. उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि कोई पर्यावरण विशेषज्ञ उप-सचिव बन जाता है, तो इसमें क्या समस्या है…व्यक्ति को किसी विशेष क्षेत्र का विशेषज्ञ होना चाहिए.” उन्होंने कहा कि ‘लेटरल एंट्री’ सभी के लिए खुली है. मेघवाल ने कहा, “एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग भी आवेदन करते हैं. आईएएस की रिक्तियां अलग हैं. उनका दावा है कि हम आरक्षण खत्म कर रहे हैं. जब आप भर्ती कर रहे थे तो आप क्या कर रहे थे? अचानक उनका ओबीसी के प्रति प्रेम सामने आ गया है. वे एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.” कोलकाता में कनिष्ठ डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश र्शिमंदा है.

मेघवाल ने कहा, “घटना के बाद सबूत नष्ट करने के प्रयास किए गए. यह बहुत शर्मनाक घटना है और हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.” बाद में, बीकानेर से सांसद मेघवाल भारत-पाक सीमा पर खानूवाली स्थित बीएसएफ चौकी पहुंचे और महिला बीएसएफ र्किमयों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया.

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