बांग्लादेश में सर्वोच्च न्यायिक परिषद बहाल, संसद नहीं हटा सकेगी न्यायाधीशों को : सर्वोच्च न्यायालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 20 Oct 2024 08:02 PM
बांग्लादेश में सर्वोच्च न्यायिक परिषद बहाल, संसद नहीं हटा सकेगी न्यायाधीशों को : सर्वोच्च न्यायालय
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ढाका. बांग्लादेश के उच्चतम न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायिक परिषद को न्यायिक कदाचार के आरोपों की जांच करने के अधिकार के साथ रविवार को बहाल कर दिया. शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही अपने उस पिछले फैसले को भी बरकरार रखा, जिसमें 16वें संविधान संशोधन को “अवैध” घोषित किया गया था, जिसके तहत न्यायाधीशों को हटाने का अधिकार संसद को हस्तांतरित किया गया था.

उच्चतम न्यायालय के वकील रूहुल कुद्दुस ने उच्चतम न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद संवाददाताओं को बताया, ”यह आदेश प्रधान न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद के नेतृत्व वाली उच्चतम न्यायालय की अपीलीय प्रभाग की छह सदस्यीय पीठ द्वारा पारित किया गया.” सुनवाई में मौजूद कुद्दुस ने कहा कि इस फैसले ने मूल संवैधानिक प्रावधानों को मजबूत किया है.

इस फैसले का मतलब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान पारित 16वें संवैधानिक संशोधन को रद्द करना भी है, जिसके तहत न्यायाधीशों पर महाभियोग चलाने का कार्य उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों वाली सर्वोच्च न्यायिक परिषद के बजाय संसद को सौंप दिया गया था.

सोलहवां संशोधन जनवरी 2014 में पारित किया गया, जिसने सर्वोच्च न्यायिक परिषद को न्यायाधीशों को अक्षमता या कदाचार के लिए हटाने के उसके अधिकार से वंचित कर दिया. हालांकि मई 2016 में उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने 16वें संशोधन को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जिसे सरकार ने जनवरी 2017 में चुनौती दी.

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा के नेतृत्व वाली सात न्यायाधीशों की अपीलीय खंडपीठ ने जुलाई 2017 में उच्च न्यायालय के उस फ.ैसले को बरकरार रखा, जिसमें 16वें संविधान संशोधन को ”अवैध” घोषित किया गया था. फैसले के बाद, तत्कालीन हसीना सरकार ने शीर्ष अदालत से फैसले की समीक्षा करने के लिए एक याचिका दायर की, जिसका निस्तारण शीर्ष अदालत के रविवार के फैसले के साथ हुआ.

इस मामले पर 2017 के उच्चतम न्यायालय के फैसले ने सिन्हा का तत्कालीन सरकार के साथ परोक्ष तौर पर टकराव हो गया, जिसके कारण उन्हें विदेश में रहते हुए अपने पद से जबरन इस्तीफ.ा देना पड़ा और तब से वे बांग्लादेश से बाहर ही हैं. छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन की वजह से हसीना के लगभग 15 साल के शासन का अंत हो गया और उन्हें पांच अगस्त को देश छोड़ना पड़ा. चार दिन बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की भूमिका संभाली. सत्ता संभालने के बाद से, नये प्रशासन ने हसीना की तत्कालीन सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं को गिरफ़्तार किया है.

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