कई दशकों से सिनेमा में भावनाओं का इंद्रधनुष दर्शाती रही है होली

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 13 Mar 2025 09:08 PM
कई दशकों से सिनेमा में भावनाओं का इंद्रधनुष दर्शाती रही है होली
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नयी दिल्ली. फिल्मों में होली के दृश्यों और गीतों को भी सालों से अलग-अलग रंग में प्रस्तुत किया जाता रहा है और इसके माध्यम से सिनेमा भावनाओं के इंद्रधनुष को दर्शाने वाला सशक्त माध्यम रहा है. साल 1959 में आई फिल्म ‘नवरंग’ के ‘जा रे हट नटखट..’ से लेकर 1993 की फिल्म ‘डर’ तक होली के गीतों में उत्साह, उमंग से लेकर डर और संघर्ष की भावनाओं को दर्शाया गया है.

साल 2013 की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ में, रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण ‘बलम पिचकारी’ की धुन पर जोश से नाचते हैं जो आज होली मनाते लोगों के बीच प्रमुखता से बजता हुआ सुनाई देता है. राजेश खन्ना और आशा पारेख अभिनीत 1971 की हिट फिल्म ‘कटी पतंग’ का ‘आज ना छोड़ेंगे…’ नायक और नायिका के बीच संबंधों में आए बदलाव की ओर इशारा करता है, जिसमें नायिका को सफेद परिधान में विधवा के रूप में दर्शाया गया है.

गीत के अंत में खन्ना का किरदार नायिका की सफेद साड़ी पर रंग डालता है, जो दर्शाता है कि वे सामाजिक अस्वीकृति का सामना करने के लिए तैयार हैं. इसके दो साल बाद धर्मेंद्र और वहीदा रहमान की फिल्म ‘फागुन’ आई, जिसमें भी होली ने एक संघर्षशील लेखक और एक संपन्न परिवार की महिला के बीच संबंधों को दर्शाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

फिल्म का गीत ‘पिया संग खेलूं होरी फागुन आयो रे’ में धर्मेंद्र का किरदार अपनी पत्नी पर रंग डालता है, लेकिन वह अपनी महंगी साड़ी खराब करने के लिए उससे नाराज होती है. नाराज पति घर छोड़कर चला जाता है और कुछ साल बाद, वे फिल्म होली के मौके पर ही मिलते हैं. अपने पति को खो चुकी एक महिला का सफेद परिधान और होली के इंद्रधनुषी रंग… यह विरोधाभास हिंदी फिल्मों में एक जाना-पहचाना रूपक है.

साल 1975 में आई ‘शोले’ में होली का दृश्य दो बार है. ”होली कब है, कब है होली?” यह एक सामान्य सा सवाल लग सकता है, लेकिन खूंखार डाकू गब्बर सिंह का किरदार निभा रहे अमजद खान का यह संवाद आज होली से जुड़ गया है. फिल्म में गब्बर के इसी संवाद के बाद मौज-मस्ती वाला गाना ‘होली के दिन’ फिल्माया जाता आता है और इसका अंत खून-खराबे के साथ होता है. साल 1981 की फिल्म ‘सिलसिला’ में होली को एक नाटकीय रूप में इस्तेमाल किया गया था. अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, जया बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया गाना ‘रंग बरसे’ दो विवाहित जोड़ों के बीच जटिल संबंधों को सामने लाता है. अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘बागबान’ (2003) का गीत ‘होली खेरें रघुबीरा’ भी बहुत लोकप्रिय है.

इससे बहुत पहले वी शांताराम की 1959 की फिल्म ‘नवरंग’ में होली से जुड़े जश्न का इस्तेमाल ‘जा रे हट नटखट, ना छेड़ मेरा घूंघट’ गीत में प्रेमियों के बीच शरारत भरी लड़ाई को दर्शाया गया है. संजय लीला भंसाली की ‘राम लीला’ में, दीपिका पादुकोण का किरदार ‘लहू मुंह लग गया’ गीत में होली मनाता दिखाई देता है. होली के गीतों में भय की भावना भी दर्शाई गई है.

सनी देओल अभिनीत ‘डर’ में शाहरुख खान का किरदार राहुल जब एक दृश्य में ढोल वाला बनकर आता है तो उसका चेहरा होली के रंगों में ही छिपा रहता है. देओल की ही दूसरी फिल्म ‘दामिनी’ में शीर्ष किरदार होली के दिन अपने पति के छोटे भाई और उसके दोस्तों को घरेलू सेविका का दुष्कर्म करते हुए देख लेती है. दामिनी का किरदार मीनाक्षी शेषाद्रि ने निभाया था.

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