नयी दिल्ली. कांग्रेस ने ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में अपने शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद मंगलवार को आरोप लगाया कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई बदले की राजनीति और डराने-धमकाने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस मामले में कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप बैठने वाला नहीं है.
ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में धनशोधन के आरोप में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने नौ अप्रैल को दाखिल आरोप-पत्र के संज्ञान के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पड़ताल की और सुनवाई की अगली तारीख 25 अप्रैल निर्धारित की.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को ज.ब्त करना कानून के शासन का मुखौटा लगाकर किया गया एक राज्य प्रायोजित अपराध है.” उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा की गई बदले की राजनीति और डराने-धमकाने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है.
रमेश ने जोर देकर कहा, ”भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप नहीं बैठेगा. सत्यमेव जयते!” कांग्रेस नेता व वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने एक वीडियो जारी कर कहा, ”नेशनल हेराल्ड के विषय में जो प्रक्रियाएं हो रही हैं, वो नई नहीं हैं, क्योंकि जब ये मामला शुरू हुआ था, तभी हमने कहा था कि ये बड़ा विचित्र मामला है. यह केस बिना एक रुपये, बिना एक रुपये की संपत्ति के हस्तानांतरण के शुरू हुआ है.” उन्होंने कहा, ”नेशनल हेराल्ड की पुरानी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी जी और अन्य लोग जुड़े हुए थे. इसमें ना कोई लाभांश दिया जा सकता है और ना ही वाणिज्यिक लेनदेन हो सकता है.”
सिंघवी ने आरोप लगाया, ”इस कड़ी में एक मनगढ़ंत और झूठा मामला रचा गया है. उसी श्रृंखला में आरोप पत्र दाखिल करने की भी प्रक्रिया हुई है. शुरुआत से इस मामले का कानूनी रूप से सामना किया जा रहा है.” उन्होंने दावा किया कि यह एक फर्जी मामला है और इसमें कोई तथ्य नहीं है. राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”अंततोगत्वा इस मामले में कोर्ट स्पष्टता प्रदान करेगा. इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से चलाया जा रहा है, जो दिख रहा है. ”
विशिष्ट शिक्षण संस्थानों में भी संकट पैदा कर रहे हैं बेरोजगारी और वेतन स्थिरता: कांग्रेस
कांग्रेस ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्यागिकी संस्थानों (एनआईटी) और भारतीय सूचना प्रौद्यागिकी संस्थानों (आईआईआईटी) में ‘प्लेसमेंट’ में गिरावट के दावे वाली एक खबर को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि बेरोजगारी तथा वेतन स्थिरता केवल अनौपचारिक क्षेत्र और ग्रामीण आबादी को प्रभावित नहीं कर रहे हैं, बल्कि विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में भी संकट पैदा कर रहे हैं.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी में प्लेसमेंट में आई चिंताजनक गिरावट को दर्ज किया है रमेश ने एक बयान जारी कर कहा, ”आज एक प्रमुख अख.बार ने और आईआईटी में प्लेसमेंट के चिंताजनक रुझानों पर और भी विस्तार से एक खबर प्रकाशित की है.”
कांग्रेस नेता ने इस खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच, भारत के 23 में से 22 आईआईटी में प्लेसमेंट में गिरावट दर्ज की गई तथा इनमें से 15 आईआईटी में प्लेसमेंट में गिरावट 10 प्रतिशत से अधिक थी. रमेश का कहना है, ”साल 2021-22 में प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल हुए आईआईटी के 90.43 प्रतिशत बीटेक छात्रों को नौकरी मिल गई थी, जबकि 2023-24 में केवल 80.25 प्रतिशत छात्रों को ही नौकरी मिली. 2023-24 में, 25 में से 23 आईआईआईटी में प्लेसमेंट की दर 2021-22 की तुलना में घटी. इनमें से 16 संस्थानों में प्लेसमेंट में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई.” उन्होंने दावा किया कि 2022-23 और 2023-24 के बीच, 31 एनआईटी में से 27 एनआईटी में इंजीनियरिंग स्नातकों को दिए गए औसत वेतन पैकेज में गिरावट दर्ज की गई तथा इनमें से तीन संस्थानों में औसत पैकेज में तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक की गिरावट देखी गई.
रमेश ने कहा, ”आईआईटी देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान हैं, जहां सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश प्रक्रिया होती है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक और छात्र आर्किषत करती है. इंजीनियरिंग को वैसे भी सबसे अधिक नौकरी-योग्य डिग्रियों में से एक माना जाता है. अगर आईआईटी जैसे संस्थानों से हर पांच में से एक इंजीनियर नौकरी पाने में असमर्थ है, तो इससे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि देश के बाकी पढ.े-लिखे युवाओं की बड़ी आबादी को रोजगार कैसे मिलेगा.” उन्होंने दावा किया कि एनआईटी और आईआईआईटी जैसे संस्थानों में भी प्लेसमेंट में गिरावट देखी जा रही है, जो देश में बड़े पैमाने पर नौकरी के बाजार में ठहराव की ओर इशारा करता है.
रमेश ने कहा, ”कांग्रेस कई वर्षों से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और वेतन स्थिरता के मुद्दे उठाती आ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेसमेंट डेटा यह साबित करता है कि यह संकट केवल अनौपचारिक क्षेत्र और ग्रामीण आबादी को प्रभावित नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमारे सबसे विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में भी संकट पैदा कर रहे हैं.
महंगाई पर संसद का विशेष सत्र बुलाए और ‘श्वेत पत्र’ जारी करे सरकार: कांग्रेस
कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि महंगाई के मुद्दे पर सरकार को संसद का व.शिेष सत्र बुलाने के साथ ही ‘श्वेत पत्र’ जारी करना चाहिए. अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल के दाम को तुरंत कम किया जाए, जरूरी सामानों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सख्त नीति लाई जाए तथा महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए.
लांबा ने संवाददाताओं से कहा, ”सरकार ने महंगाई से मुंह मोड़ लिया है. इनका एकमात्र लक्ष्य है कि कैसे सरकारी और निजी कंपनियों की जेब भरी जाए. देश का आम आदमी इस महंगाई का खामियाजा भुगत रहा है.” उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार और वर्तमान मोदी सरकार के तहत पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम की तुलना भी की.
लांबा का कहना था, ”वर्ष 2014 में पेट्रोल की कीमत 72 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन आज यही आंकड़ा 98 से 100 रुपये प्रति लीटर तक है. कांग्रेस सरकार में डीजल 55 रुपये प्रति लीटर था, जबकि भाजपा की सरकार में 88 रुपये प्रति लीटर हो गया है.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस की सरकार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क प्रति लीटर 9.20 रुपये था, आज वही बढ.कर 19.90 रुपये हो गया है. 2014 में डीजल पर उत्पाद शुल्क 3.46 रुपये था, आज वही बढ.कर 15.80 रुपये हो गया है. कांग्रेस सरकार में कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन आज 65.31 डॉलर प्रति बैरल है.” लांबा ने कहा कि कांग्रेस महंगाई के खिलाफ देश भर में आंदोलन कर रही है और देश की महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और वे इस आंदोलन में जुड़ रही हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से लूट-खसोट करके कुछ कंपनियों को मुनाफा पहुंचाया जा रहा है, जिनसे भाजपा को चंदा लेना है.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”हमारी मांग है कि इस मामले में कैग ऑडिट किया जाए. अगर ऐसा नहीं होगा तो साफ हो जाएगा कि इस पूरे मामले में भाजपा की मिलीभगत है.” लांबा ने कहा, ”एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के दाम को तुरंत कम किया जाए, जरूरी सामानों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सख्त नीति लाई जाए, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए, महंगाई पर चर्चा के लिए संसद में विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए, जिसमें श्वेतपत्र जारी किया जाए.” भाषा हक