हिंदी अरुणाचल के लिए जोड़ने वाली भाषा है, सीखने में कोई दिक्कत नहीं: मुख्यमंत्री पेमा खांडू

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 10 Jul 2025 09:55 PM
हिंदी अरुणाचल के लिए जोड़ने वाली भाषा है, सीखने में कोई दिक्कत नहीं: मुख्यमंत्री पेमा खांडू
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नयी दिल्ली. अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि उनके राज्य में प्रत्येक जनजाति अपनी अलग बोली और भाषा बोलती है तथा ऐसे में हिंदी उनके राज्य को जोड़ने वाली भाषा है. खांडू ने ‘पीटीआई वीडियोज’ से एक साक्षात्कार में कहा कि हिंदी अरुणाचल प्रदेश में शुरुआत से ही स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है और इसे सीखने में कोई समस्या नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में इतनी विविधता है कि 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां अपनी अलग-अलग भाषाएं और बोलियां बोलती हैं.

उन्होंने कहा, ”अगर मैं अपनी बोली, अपनी भाषा में बात करूंगा तो दूसरी जनजाति के लोग समझ नहीं पाएंगे. इसलिए हर कोई हिंदी बोलता है. व्याकरण संबंधी गलतियां अवश्य हो सकती हैं… लेकिन अगर आप किसी गांव में भी जाएंगे, तो सभी ग्रामीण हिंदी समझेंगे और बोलेंगे. हम चुनाव प्रचार के दौरान और विधानसभा में भी हिंदी बोलते हैं.” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने महाराष्ट्र और कुछ दक्षिणी राज्यों में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच कहा, ”हिंदी निश्चित रूप से एक जोड़ने वाली भाषा है. इसे सीखने में कोई समस्या नहीं है. इसे सीखना चाहिए.” उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश रणनीतिक रूप से अहम स्थान है जहां सुरक्षा बल के जवान विभिन्न राज्यों से आते हैं और अधिकतर जवान हिंदी में बात करते हैं.

उन्होंने कहा, ”वहां सीमा सड़क संगठन भी है. इसलिए कई अन्य माध्यम हैं जिनके जरिए हमने हिंदी को तेजी से सीखा.” मुख्यमंत्री ने कुछ राज्यों में हिंदी का विरोध होने के बारे में सवाल पूछे जाने पर कहा कि हर किसी की अपनी मातृभाषा होती है, हर राज्य की अपनी भाषा होती है और हर जनजाति की भी अपनी भाषा होती है.

उन्होंने उनकी सरकार द्वारा स्वदेशी भाषाओं और संस्कृति के प्रचार एवं संरक्षण के लिए आदिवासी मामलों का एक विभाग शुरू किए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ”इसे महत्व दिया जाना चाहिए… यहां तक कि मैं भी अपने राज्य में मानता हूं कि जनजातियों की विभिन्न भाषाओं को संरक्षित किया जाना चाहिए.” खांडू ने कहा कि वह शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने वाले युवाओं से कहते हैं कि वे घर लौटकर अपनी भाषा में बात करें. उन्होंने कहा, ”क्योंकि यही उनकी पहचान है, क्योंकि हमारे देश में इतने सारे समुदाय, विभिन्न धार्मिक समूह, विभिन्न पृष्ठभूमियां हैं, इसलिए, अपने स्थान पर अपनी भाषा को संरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है.”

अगला दलाई लामा स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश से होगा, चीन से नहीं: अरुणाचल के मुख्यमंत्री

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि अगला दलाई लामा एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश से होगा, चीन से नहीं.
खांडू ने कहा कि दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया किसी वर्तमान दलाई लामा के निधन के बाद ही शुरू होती है. साथ ही उन्होंने आशा जताई और प्रार्थना की कि 14वें दलाई लामा अगले 40 वर्षों तक जीवित रहें.

खांडू ने मंगलवार को ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”जैसा मैंने कहा कि दलाई लामा का स्वास्थ्य बहुत अच्छा है और इस बार अपने 90वें जन्मदिन समारोह में दलाई लामा ने भी कहा कि वह लगभग 130 वर्ष तक जीवित रहेंगे. इसलिए हम सभी ऐसी प्रार्थना करते हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि वह 130 वर्ष तक जीवित रहेंगे.” मुख्यमंत्री स्वयं दलाई लामा के अनुयायी हैं और बौद्ध समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. खांडू ने कहा कि उन्हें अगले दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया, उसके तरीके या विवरण के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन चयन की पूरी एक प्रक्रिया होती है.

उन्होंने कहा, ” सभी नियम तय हैं, सभी प्रक्रियाएं तय हैं. इस बारे में अटकलें लगाने का कोई मतलब नहीं है. यह अनुमान लगाने का कोई तुक नहीं है कि उनका जन्म कहां होगा, किस क्षेत्र में होगा, भारत में होगा या तिब्बत में होगा. इस मुद्दे पर केवल एक ही स्पष्टता है कि अगले दलाई लामा का जन्म एक स्वतंत्र दुनिया में होगा. और यह बात शायद दलाई लामा ने एक साक्षात्कार में कही है.” यह पूछे जाने पर कि क्या वह यह संकेत दे रहे हैं कि अगला दलाई लामा चीन से नहीं होगा और कहीं और से हो सकता है, खांडू ने कहा, ” हां, निश्चित रूप से चीन से नहीं होगा क्योंकि वहां लोकतंत्र नहीं है. इसलिए जहां कहीं भी लोकतंत्र है… वह दुनिया में कहीं भी हो सकता है.” जब उनसे कहा गया कि तिब्बत भी चीन के शासन के अधीन है तो मुख्यमंत्री ने कहा,” इसलिए, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह इस देश या उस देश से होगा.” खांडू ने कहा, ”अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी. लेकिन इतना तो तय है… जहां लोकतंत्र है, जहां लोगों को आज.ादी है ,जहां वे अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं. मुझे लगता है कि इस बारे में स्पष्टता है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट अगले दलाई लामा की खोज करेगा.

उन्होंने कहा, ”15वें दलाई लामा की खोज… पूरी प्रक्रिया वर्तमान दलाई लामा के निधन के बाद ही शुरू होगी. इसलिए इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है.” दलाई लामा के उत्तराधिकारी के मुद्दे पर चीन की आपत्ति पर खांडू ने कहा, ” मुझे नहीं पता कि चीन इस पर आपत्ति क्यों कर रहा है. उनकी अपनी नीति होनी चाहिए. चीन में कोई दलाई लामा परंपरा नहीं है. दलाई लामा परंपरा को मुख्यत? हिमालयी क्षेत्र और तिब्बती बौद्धों द्वारा मान्यता प्राप्त है. चीन की इसमें कोई भूमिका नहीं है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि दलाई लामा परंपरा पहले दलाई लामा से लेकर वर्तमान के 14वें दलाई लामा तक 600 वर्षों से भी अधिक समय से जारी है.

उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या दलाई लामा परंपरा जारी रहेगी और क्या अगली दलाई लामा कोई महिला हो सकती है? खांडू ने कहा, ”14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिन से पहले बौद्ध परंपराओं के सभी प्रमुखों ने बैठक की और पुष्टि की कि यह परंपरा जारी रहेगी.”

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