लाल किला विस्फोट: अदालत ने NIA मुख्यालय में वकील से मिलने की आरोपी की याचिका को नामंजूर किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 21 Nov 2025 10:14 PM
लाल किला विस्फोट: अदालत ने NIA मुख्यालय में वकील से मिलने की आरोपी की याचिका को नामंजूर किया
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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने लालकिले के निकट धीमी गति से चलती कार में हुए विस्फोट मामले के सह-आरोपी जसीर बिलाल वानी की उस याचिका पर आदेश पारित करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया, जिसमें एनआईए मुख्यालय में वकील से मुलाकात करने देने का अनुरोध किया गया था.

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि आरोपी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मुख्यालय में अपने वकील से मुलाकात करने देने की अनुरोध याचिका को खारिज करने संबंधी निचली अदालत का कोई भी आदेश दिखाने में विफल रहा है. उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी कोई विशेष व्यक्ति नहीं है, तथा अदालत में एक निश्चित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और उसके लिए कोई नयी प्रक्रिया नहीं बनाई जा सकती.

न्यायाधीश ने कहा, ”आपको लगता है कि मैं अपनी प्रक्रिया स्वयं बनाऊंगा? मैं ऐसा नहीं करूंगा. यह कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है.” अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब वानी के वकील ने दावा किया कि निचली अदालत ने अर्जी को मौखिक रूप से खारिज कर दिया था. न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ”कोई मौखिक अस्वीकृति नहीं हो सकती. यदि आपके पास आदेश नहीं है, तो आप मेरे सामने क्यों हैं? पहले अस्वीकृति का आदेश पारित होना चाहिए, फिर आप इसे मेरे समक्ष चुनौती दे सकते हैं… एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसका हम सभी पालन करते हैं.” एनआईए ने 10 नवंबर को लालकिले के निकट हुए विस्फोट के सिलसिले में वानी को 17 नवंबर को गिरफ्तार किया था. घटना में में 15 लोगों की जान चली गई थी. निचली अदालत ने 18 नवंबर को उसे 10 दिन के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया था.

उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान वानी के वकील ने दावा किया कि एक वकील आरोपियों से मिलने एनआईए कार्यालय गया था लेकिन एजेंसी ने मुलाकात कराने से इनकार कर दिया और उनसे इस संबंध में अदालत का निर्देश दिखाने को कहा. वकील ने कहा कि जब उन्होंने इस संबंध में आवेदन लेकर निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया तो उसने कानूनी ‘मुलाकात’ की अनुमति देने से इनकार करने के साथ ही मौखिक रूप से आरोपी को अपनी पसंद के वकील से मिलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया.

हालांकि, एनआईए के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से पहले सभी उपायों का इस्तेमाल नहीं किया है और इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए. उच्च न्यायालय ने आरोपी की याचिका को मंजूर करने से इनकार करते हुए कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता ने सभी प्रभावी उपायों का लाभ उठा लिया है. वैकल्पिक रूप से, उच्च न्यायालय ने आरोपी के वकील को कानून के अनुसार याचिका पर निर्णय के लिए शनिवार को संबंधित निचली अदालत में जाने की छूट प्रदान कर दी.

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