‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल नारे बनकर रह गए हैं: राहुल

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 06 Jul 2026 11:34 AM
‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल नारे बनकर रह गए हैं: राहुल
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नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की दो प्रमुख पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल नारे बनकर रह गई हैं तथा उसकी ‘एमएसएमई विरोधी नीतियां’ इन उद्योगों का गला घोंट रही हैं। कांग्रेस नेता ने जयपुर में स्थानीय बस और ट्रक बॉडी बिल्डर्स की फैक्ट्री का दौरा करने के बाद अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी किया।

उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों में मेहनत और हुनर से भारत का भविष्य गढ़ने वाले कारीगर देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में परिवहन मंत्रालय द्वारा बनाए गए कुछ नियम देशभर के छोटे बस और ट्रक बॉडी निर्माण उद्योगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।

गांधी ने आरोप लगाया कि बसों में तकनीकी खराबी के कारण लगने वाली आग का दोष उन बॉडी बिल्डर्स पर मढ़ा जा रहा है, जबकि उनका काम केवल वाहनों की बॉडी तैयार करना है। राहुल गांधी ने कहा कि जिन एमएसएमई को प्रोत्साहन और सहारा मिलना चाहिए, उनकी गतिविधियों पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां छोटे उद्योगों के हितों के अनुरूप नहीं हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि ऐसी फैक्ट्रियां बंद होती हैं तो केवल कारोबार ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि पारंपरिक हुनर बिखरेगा, रोजगार के अवसर कम होंगे और इसका असर आम लोगों पर बढ़ती महंगाई के रूप में भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे अधिक कीमत मेहनतकश और हुनरमंद भारतीयों को चुकानी पड़ेगी।

राहुल गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने राजस्थान के स्थानीय बस और ट्रक बॉडी बिल्डर्स से मुलाकात की, जहां उन्हें ऐसा भारत देखने को मिला जो अपने हाथों से रोजगार भी बनाता है और देश की रफ्तार भी बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि इन कारीगरों की विश्वस्तरीय कारीगरी को सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें नियमों के बोझ तले काम बंद करने पर मजबूर किया जा रहा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की एमएसएमई विरोधी नीतियां इन उद्योगों का गला घोंट रही हैं। उन्होंने कहा, “जब छोटे उद्योग हारते हैं, तब सिर्फ फैक्ट्री नहीं बंद होती, बल्कि भारत का हुनर हारता है और मेहनतकश कारीगर बेरोजगार होता है।”

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