कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा पर महबूबा की टिप्पणी ‘गैर-जिम्मेदाराना’, माफी मांगें: उमर

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 27 Jul 2026 02:51 PM
कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा पर महबूबा की टिप्पणी ‘गैर-जिम्मेदाराना’, माफी मांगें: उमर
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श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जंतर-मंतर जाने के बजाय घर पर रहना चाहिए था और कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित ठहराने वाली अपनी टिप्पणियों के लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

अब्दुल्ला ने अपने निजी कार्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा कि सत्ता में रह चुके लोगों के ”गैर-जिम्मेदाराना” बयान आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने से रोकने का काम कर सकते हैं। महबूबा 23 जुलाई को जंतर-मंतर गई थीं और परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले प्रदर्शन को समर्थन दिया था।

दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए पीडीपी प्रमुख घाटी में पहले हुए ‘पैलेट गन’ के इस्तेमाल का बचाव करती दिखीं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में स्थिति अलग थी क्योंकि वहां सुरक्षा बल आतंकवाद से लड़ रहे थे।
मुफ्ती की इन टिप्पणियों की वजह से अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) समेत विरोधी राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पीडीपी ने सत्तारूढ़ नेकां पर आरोप लगाया कि उसने जंतर-मंतर पर महबूबा के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल किया।

अब्दुल्ला ने कहा, ”जब एक पूर्व मुख्यमंत्री यह कहती हैं कि कश्मीर में आतंकवाद से लड़ने के लिए बल का इस्तेमाल सही है, तो अपने अधिकारों के लिए लड़ने कौन आगे आएगा? अच्छा होता वह जंतर-मंतर नहीं गई जातीं।” उन्होंने कहा, ”जब हम (नेता) केंद्र द्वारा किए जा रहे दमन और बल के इस्तेमाल का समर्थन करते हैं तो तो अगर लोग राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन करना चाहेंगे, तो हमारा समर्थन कौन करेगा? वे बाहर नहीं आएंगे, क्योंकि महबूबा जी ने कह दिया है कि ‘यह तो बनता है’ (यह सही है)।” मुख्यमंत्री ने कहा कि महबूबा जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेकां के प्रदर्शन में शामिल होने जंतर-मंतर नहीं गई थीं बल्कि वह छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वहां गई थीं।

उन्होंने कहा, ”वह जम्मू कश्मीर के लिए जंतर-मंतर नहीं गईं। लेकिन वह वहां गईं और आतंकवाद से लड़ने के बहाने सत्ता और बल के दुरुपयोग को सही ठहराया।” अब्दुल्ला ने कहा, ”वह इसे कैसे सही ठहराती हैं? क्या सिर्फ आतंकवाद की वजह से बच्चों को इंसाफ नहीं मिलना चाहिए? क्या आतंकवाद की वजह से पासपोर्ट रोक दिए जाने चाहिए? क्या आतंकवाद की वजह से कानून लागू नहीं होने चाहिए? मैं यह नहीं समझ पाया कि इसे कैसे उचित ठहराया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि पीडीपी नेता की दिल्ली और जम्मू कश्मीर में अलग-अलग बातें कहने की पुरानी आदत है।

उन्होंने कहा, ”मान लीजिए कि वह कुछ देर के लिए वहां के कुछ लोगों को खुश करने की कोशिश कर रही थीं। वह अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग बातें कहने की अपनी पुरानी आदत भूली नहीं हैं।” अब्दुल्ला ने कहा कि महबूबा को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।

पिछले हफ्ते अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे दुखद बात यह है कि महबूबा आतंकवाद से निपटने के लिए लोगों को परेशान करने के तरीके को सही ठहरा रही हैं।
अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर लौटने के बाद गिरफ्तारियों के खिलाफ बात करने का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा, ”उन्हें इस बारे में दिल्ली में बोलना चाहिए था क्योंकि वहां देश भर से मीडिया मौजूद था और सबकी नजरें जंतर-मंतर पर थीं। वहां तो उन्होंने इसे सही ठहराया दिया।” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों को हिरासत में लेने के खिलाफ हैं क्योंकि लोगों के समर्थन के बिना आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता।

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