दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आई दुष्कर्म की घटनाओं और चलती स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा से कथित यौन अपराध के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इन घटनाओं को 2012 के निर्भया मामले की दर्दनाक याद से जोड़ते हुए सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कोर्ट रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सुरक्षा व्यवस्था पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल एकजुटता जताना पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। अदालत ने सार्वजनिक पार्कों और बसों जैसे स्थानों पर पर्याप्त रोशनी, निगरानी और अन्य जरूरी प्रशासनिक सुविधाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पीठ ने हालिया घटनाओं को 2012 के निर्भया मामले से जोड़ते हुए यह सवाल भी उठाया कि क्या पिछले एक दशक में कानून लागू करने वाली व्यवस्था में कोई सार्थक सुधार हुआ है।
चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित अपराध
दिए गए विवरण के अनुसार, दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलने वाली एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ चालक और कंडक्टर द्वारा कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया।
घटना 4 अगस्त 2026 की बताई गई है। पुलिस ने मामले में चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है तथा वारदात में इस्तेमाल बस को भी कब्जे में लिया है।
पीड़िता मैनपुरी जिले की रहने वाली और 11वीं कक्षा की छात्रा बताई गई है। खबर के अनुसार, वह 3 अगस्त को घर से बिना बताए निकली थी और नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के घर जाने का इरादा रखती थी।
सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद अब इस मामले में सार्वजनिक परिवहन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक पहलुओं पर सुनवाई होगी।